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उलझन को समझते रहे भूतप्रेत का चक्कर
Updated Fri, 09 Mar 2018 11:00 PM IST
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चित्रकूट के तिहरे हत्याकांड की साइड स्टोरी
उलझन को समझते रहे भूतप्रेत का चक्कर
- परिजन अजीत को चार बार ले जा चुके थे ओझा के पास
- चौकी में फूट-फूटकर रोया आरोपी, चाचा चाची को ठहराया दोषी
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट।
शिवरामपुर के चकलागुरुबाबा गांव निवासी अजीत रैदास एक माह से मानसिक रूप से बीमार था, लेकिन परिवार डाक्टर को दिखाने के बजाए झांड़-फूंक के चक्कर में पड़ गए।
अजीत रैदास सात भाई हैं। उसके पिता रेलवे से रिटायर्ड कर्मचारी हैं। उसके दो पुत्री एक पुत्र हैं। परिजनों के अनुसार भंभई गांव में एक ओझा के यहां पांच बार जाना था जिसमें से वह चार बार हो आया था लेकिन सुधार नहीं हुआ। इसके बावजूद उसे किसी ने डाक्टर को दिखाने का प्रयास नहीं किया। अजीत के बडे़ भाई विकास रैदास ने बताया कि अजीत का रेलवे क्रासिंग के पास जनरल स्टेार था। कभी कभार उसकी पत्नी भी दुकान में जाती थी। कुछ माह पहले पारिवारिक खुन्नस के चलते उसके चाचा राममिलन व चाची आभा ने भी उसकी दुकान के सामने दुकान खोल दी थी। चाचा के साले और एक युवक से अजीत का कई बार विवाद भी हुआ था।
इधर, पुलिस चौकी में बातचीत के दौरान आरोपी पहले फूटफूट कर रोया। बताया कि सब उसके चाचा चाची ने कराया है। उस पर जादू टोना कराकर और मोबाइल में गलत संदेश भिजवाने का काम किया है। पूरे गांव में शोक है। सभी यह भी कह रहे थे कि अजीत तो बेहद मृदुभाषी था। आखिर कोई ठोस वजह होगी तभी वह इतना निर्दयी बन गया।
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इनसेट
पुत्र को बचाने दौड़ी मां
अजीत के भाई विकास रैदास ने बताया कि घटनास्थल से स्पष्ट है कि मैनादेवी घायलावस्था में कमरे से लगभग 15 मीटर तक घसीटती हुई आई और चिल्लाकर पुत्र अंकित को बचाने का प्रयास किया है।
इनसेट
अपनों का खून कर रिश्ते किए तार- तार
चित्रकूट। जिले में एक साल के अंदर दिल दहला देने वाली तीसरी घटना जिले के शिवरामपुर चौकी क्षेत्र अंतर्गत चकलागुरुबाबा गांव में हुई है। तीनों घटनाओं में अपनो ने ही अपनों का खून कर पिता पुत्रियों के रिश्ते को तार-तार कर दिया है। इसी तरह से राजापुर कस्बे में किराए से कमरा लेकर रहने वाले एक युवक ने अपनी दूसरी पत्नी व उसकी दो बच्चिायों व एक लड़के की चाकू से हमला कर हत्या कर दी थी। शव को छीबों रोड के किनारे फेंक दिया था। इसी तरह से कुछ दिन पहले धर्मनगरी में परिक्रमा मार्ग में एक नाबालिग लड़की की हत्या कर दी गई थी। जिसमें लड़की के सौतेले पिता व उसकी मां का हाथ था।
महिला शक्ति ने कराया अहसास
चित्रकूट। पंचनामा से लेकर पोस्टमार्टम कराने और फिर शव के साथ गांव जाकर अंतिम संस्कार कराने का काम महिला पुलिस ने किया। यह चित्रकूट जिले में पहली बार हुआ है जब किसी कांड पर शव को लेकर लिखापढ़ी, पंचनामा, शव खुद उठाकर वाहन मे रखना, पोस्टमार्टम कराना और अंतिम संस्कार क्रिया तक पूरा काम महिला पुलिसकर्मी नेहा, ललिता, रश्मि और सुषमा ने किया। अपर एसपी बलवंत चौधरी ने बताया कि इनकी हिम्मत व कार्यशैली की सबने तारीफ की है। ब्यूरो
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उलझन को समझते रहे भूतप्रेत का चक्कर
- परिजन अजीत को चार बार ले जा चुके थे ओझा के पास
- चौकी में फूट-फूटकर रोया आरोपी, चाचा चाची को ठहराया दोषी
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट।
शिवरामपुर के चकलागुरुबाबा गांव निवासी अजीत रैदास एक माह से मानसिक रूप से बीमार था, लेकिन परिवार डाक्टर को दिखाने के बजाए झांड़-फूंक के चक्कर में पड़ गए।
अजीत रैदास सात भाई हैं। उसके पिता रेलवे से रिटायर्ड कर्मचारी हैं। उसके दो पुत्री एक पुत्र हैं। परिजनों के अनुसार भंभई गांव में एक ओझा के यहां पांच बार जाना था जिसमें से वह चार बार हो आया था लेकिन सुधार नहीं हुआ। इसके बावजूद उसे किसी ने डाक्टर को दिखाने का प्रयास नहीं किया। अजीत के बडे़ भाई विकास रैदास ने बताया कि अजीत का रेलवे क्रासिंग के पास जनरल स्टेार था। कभी कभार उसकी पत्नी भी दुकान में जाती थी। कुछ माह पहले पारिवारिक खुन्नस के चलते उसके चाचा राममिलन व चाची आभा ने भी उसकी दुकान के सामने दुकान खोल दी थी। चाचा के साले और एक युवक से अजीत का कई बार विवाद भी हुआ था।
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इधर, पुलिस चौकी में बातचीत के दौरान आरोपी पहले फूटफूट कर रोया। बताया कि सब उसके चाचा चाची ने कराया है। उस पर जादू टोना कराकर और मोबाइल में गलत संदेश भिजवाने का काम किया है। पूरे गांव में शोक है। सभी यह भी कह रहे थे कि अजीत तो बेहद मृदुभाषी था। आखिर कोई ठोस वजह होगी तभी वह इतना निर्दयी बन गया।
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पुत्र को बचाने दौड़ी मां
अजीत के भाई विकास रैदास ने बताया कि घटनास्थल से स्पष्ट है कि मैनादेवी घायलावस्था में कमरे से लगभग 15 मीटर तक घसीटती हुई आई और चिल्लाकर पुत्र अंकित को बचाने का प्रयास किया है।
इनसेट
अपनों का खून कर रिश्ते किए तार- तार
चित्रकूट। जिले में एक साल के अंदर दिल दहला देने वाली तीसरी घटना जिले के शिवरामपुर चौकी क्षेत्र अंतर्गत चकलागुरुबाबा गांव में हुई है। तीनों घटनाओं में अपनो ने ही अपनों का खून कर पिता पुत्रियों के रिश्ते को तार-तार कर दिया है। इसी तरह से राजापुर कस्बे में किराए से कमरा लेकर रहने वाले एक युवक ने अपनी दूसरी पत्नी व उसकी दो बच्चिायों व एक लड़के की चाकू से हमला कर हत्या कर दी थी। शव को छीबों रोड के किनारे फेंक दिया था। इसी तरह से कुछ दिन पहले धर्मनगरी में परिक्रमा मार्ग में एक नाबालिग लड़की की हत्या कर दी गई थी। जिसमें लड़की के सौतेले पिता व उसकी मां का हाथ था।
महिला शक्ति ने कराया अहसास
चित्रकूट। पंचनामा से लेकर पोस्टमार्टम कराने और फिर शव के साथ गांव जाकर अंतिम संस्कार कराने का काम महिला पुलिस ने किया। यह चित्रकूट जिले में पहली बार हुआ है जब किसी कांड पर शव को लेकर लिखापढ़ी, पंचनामा, शव खुद उठाकर वाहन मे रखना, पोस्टमार्टम कराना और अंतिम संस्कार क्रिया तक पूरा काम महिला पुलिसकर्मी नेहा, ललिता, रश्मि और सुषमा ने किया। अपर एसपी बलवंत चौधरी ने बताया कि इनकी हिम्मत व कार्यशैली की सबने तारीफ की है। ब्यूरो