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भरतकूप क्षेत्र में आजादी के बाद से रहा डाक ुओं का दबदबा
Updated Fri, 04 Aug 2017 11:08 PM IST
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पचास साल से झेल रहे डकैतों का दंश
सुधीर अग्रवाल
चित्रकूट। भरतकूप का इलाका बांदा और सतना जिले की सीमा से सटा है। इस इलाके में 1965 से ही डाकू सक्रिय हैं। यहां के ग्रामीण दहशत में जीते आए हैं। कई डाकुओं ने अपने दुश्मनों के परिवार को तो मारा ही, साथ ही दर्जनों निर्दोष लोगों को भी मौत के घाट उतार दिया। मुखबिरों को भी जिंदा जला दिया गया। ग्रामीणों को उम्मीद है कि बांदा जिला निवासी डीजीपी सुलखान सिंह इस समस्या से निजात दिलाएंगे।
भरतकूप क्षेत्र में 1965 से लखना पंडित बागी हुआ था। उसने दो दर्जन अपहरण, हत्या आदि की घटनाएं की। इसके बाद खरदूषण, गया बाबा, रामकरन कांक्षी, बुद्धानाई, संतोष यादव, संता खैरवार, धर्म, अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया, शंकर केवट, रागिया, बलखड़िया, और डाकू गोप्पा की दहशत रही।
डकैतों के डर से ग्रामीण शाम होते ही घरों में कैद हो जाते हैं। कई मुखबिरों को गोली मार दी, कई को जिंदा जला दिया। डाकुओं के दहशत से कई व्यापारी पलायन कर गए। विकास कार्यों में कमीशन लेने के कारण क्षेत्र का विकास भी नहीं हो सका।
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कुछ माह पहले ग्रामीणों ने नवोदित डाकू राजा ठाकुर को मिलकर मार डाला, लेकिन आज भी डाकू ललित पटेल गैंग का दहशत है। गैंग विकास कार्यों में कमीशन और अपहरण जैसी वारदात को अंजाम दे रहा है। गैंग तीन लोगों का अपहरण कर जिंदा जला चुका है।
इनसेट...
आत्मसमर्पण कर सकता है डाकू गौरी यादव
डाकू गोप्पा के पकड़े जाने के बाद अब चर्चा चल रही है कि एक लाख का इनामी डाकू गौरी आत्मसमर्पण कर सकता है। सूत्रों बताते हैं कि गौरी यादव के परिवार वाले भी प्रयास में लगे हैं। बताया जाता है कि डाकू गोप्पा को पकड़वाने से लेकर कथित रूप से एसटीएफ की पकड़ तक पहुंचाने में डाकू गौरी की भूमिका महत्वपूर्ण थी। कांटे से कांटा निकालने में जुटी एसटीएफ और पुलिस को एक और सफलता मिल सकती है। सूत्र यह भी बताते हैं कि एक बार आत्मसमर्पण कर चुका गौरी फिलहाल अभी समर्पण नहीं करेगा। इनामी डाकू बबुली कोेल और डाकू ललित पटेल के मारे जाने या पकड़े जाने के बाद ही वह समर्पण करेगा।
भरतकूप क्षेत्र में आज भी वारदात कर रहे डकैत
एक दर्जन से अधिक इनामी डाकू इस क्षेत्र में रहे
डीजीपी की मंडल समीक्षा बैठक में उठेगा मुद्दा
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सुधीर अग्रवाल
चित्रकूट। भरतकूप का इलाका बांदा और सतना जिले की सीमा से सटा है। इस इलाके में 1965 से ही डाकू सक्रिय हैं। यहां के ग्रामीण दहशत में जीते आए हैं। कई डाकुओं ने अपने दुश्मनों के परिवार को तो मारा ही, साथ ही दर्जनों निर्दोष लोगों को भी मौत के घाट उतार दिया। मुखबिरों को भी जिंदा जला दिया गया। ग्रामीणों को उम्मीद है कि बांदा जिला निवासी डीजीपी सुलखान सिंह इस समस्या से निजात दिलाएंगे।
भरतकूप क्षेत्र में 1965 से लखना पंडित बागी हुआ था। उसने दो दर्जन अपहरण, हत्या आदि की घटनाएं की। इसके बाद खरदूषण, गया बाबा, रामकरन कांक्षी, बुद्धानाई, संतोष यादव, संता खैरवार, धर्म, अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया, शंकर केवट, रागिया, बलखड़िया, और डाकू गोप्पा की दहशत रही।
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डकैतों के डर से ग्रामीण शाम होते ही घरों में कैद हो जाते हैं। कई मुखबिरों को गोली मार दी, कई को जिंदा जला दिया। डाकुओं के दहशत से कई व्यापारी पलायन कर गए। विकास कार्यों में कमीशन लेने के कारण क्षेत्र का विकास भी नहीं हो सका।
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कुछ माह पहले ग्रामीणों ने नवोदित डाकू राजा ठाकुर को मिलकर मार डाला, लेकिन आज भी डाकू ललित पटेल गैंग का दहशत है। गैंग विकास कार्यों में कमीशन और अपहरण जैसी वारदात को अंजाम दे रहा है। गैंग तीन लोगों का अपहरण कर जिंदा जला चुका है।
इनसेट...
आत्मसमर्पण कर सकता है डाकू गौरी यादव
डाकू गोप्पा के पकड़े जाने के बाद अब चर्चा चल रही है कि एक लाख का इनामी डाकू गौरी आत्मसमर्पण कर सकता है। सूत्रों बताते हैं कि गौरी यादव के परिवार वाले भी प्रयास में लगे हैं। बताया जाता है कि डाकू गोप्पा को पकड़वाने से लेकर कथित रूप से एसटीएफ की पकड़ तक पहुंचाने में डाकू गौरी की भूमिका महत्वपूर्ण थी। कांटे से कांटा निकालने में जुटी एसटीएफ और पुलिस को एक और सफलता मिल सकती है। सूत्र यह भी बताते हैं कि एक बार आत्मसमर्पण कर चुका गौरी फिलहाल अभी समर्पण नहीं करेगा। इनामी डाकू बबुली कोेल और डाकू ललित पटेल के मारे जाने या पकड़े जाने के बाद ही वह समर्पण करेगा।
भरतकूप क्षेत्र में आज भी वारदात कर रहे डकैत
एक दर्जन से अधिक इनामी डाकू इस क्षेत्र में रहे
डीजीपी की मंडल समीक्षा बैठक में उठेगा मुद्दा