{"_id":"5a78a0fb4f1c1b88268b8ad5","slug":"61517854971-chitrakoot-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फरीदाबाद-सतना में कई दिनों तक घूमता रहा डाकू जियालाल","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
फरीदाबाद-सतना में कई दिनों तक घूमता रहा डाकू जियालाल
Updated Mon, 05 Feb 2018 11:52 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। डाकू बबुली कोल गैंग का शार्प शूटर इनामी जियालाल कोल अधिकतर समय सतना और फरीदाबाद में मजदूर बनकर रहता था। जरूरत पड़ने पर गैंग के भांजे (बबुली व लवलेश) मामा को जंगल बुलाते थे। इस बार भी वह बड़ी वारदात के लिए आया था।
साढ़े पांच लाख के इनामी डाकू बबुली कोल गैंग को उनके शार्प शूटर के पकड़े जाने से करारा झटका तो लगा है। दो दिन की पूछताछ में यह बात सामने आ रही है कि 25 हजार का इनामी डाकू जियालाल कोल गैंग में बराबर नहीं रहता था।
24 अगस्त को निही के मुटवन मानिकपुर में पुलिस से मुठभेड़ के बाद दो सप्ताह तक वह घायल बबुली व लवलेश को लेकर जंगल में इधर-उधर घूमता रहा और इलाज कराया। इसके बाद वह गैंग छोड़कर फरीदाबाद चला गया।
विज्ञापन
वहां क्षेत्र के लोगों के बीच रहकर मजदूरी करता रहा। मकर संक्रांति पर गांव आया था। पर्व मनाने के बाद वह पड़ोसी जिला सतना मप्र के हेलीपैड से सटी सरस्वती स्कूल के पीछे एक बस्ती में रह रहा था। डाकू लवलेश का सगा मामा जियालाल के साथ डाकुओं के घर के कई और भी रिश्तेदार थे।
सूत्रों के अनुसार जियालाल को गैंग ने किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए बुलाया था तभी वह सतना से ट्रेन पर मानिकपुर आ रहा था। इनकी भनक दोनों जिले के पुलिस अधिकारियों को लग गई थी। मझगवां-चितहरा स्टेशन के पास सादी वर्दी में कुछ पुलिसकर्मी उसे पूरी तरह शिनाख्त के बाद दबोचने की तैयारी में थे। इसके बाद भी वह जंगल पहुंच गया था।
सीमावर्ती सेमरिया कटाई मप्र जिला रीवा से एक किसान के अपहरण के बाद फिरौती वसूलने के दौरान गैंग में मौजूद रहा। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इसके बाद जियालाल गैंग के साथ ही था। किहुनिंया जंगल में मुठभेड़ के दौरान उसे गोली लगी और दबोच लिया गया है। उसने पुलिस अधिकारियों से बातचीत में यह माना है कि वह हरियाणा के फरीदाबाद व मप्र के सतना में अक्सर रहने जाता था। इसके बाद लौटकर गैंग में शामिल हो जाता था।
विज्ञापन
चित्रकूट। डाकू बबुली कोल गैंग का शार्प शूटर इनामी जियालाल कोल अधिकतर समय सतना और फरीदाबाद में मजदूर बनकर रहता था। जरूरत पड़ने पर गैंग के भांजे (बबुली व लवलेश) मामा को जंगल बुलाते थे। इस बार भी वह बड़ी वारदात के लिए आया था।
साढ़े पांच लाख के इनामी डाकू बबुली कोल गैंग को उनके शार्प शूटर के पकड़े जाने से करारा झटका तो लगा है। दो दिन की पूछताछ में यह बात सामने आ रही है कि 25 हजार का इनामी डाकू जियालाल कोल गैंग में बराबर नहीं रहता था।
विज्ञापन
24 अगस्त को निही के मुटवन मानिकपुर में पुलिस से मुठभेड़ के बाद दो सप्ताह तक वह घायल बबुली व लवलेश को लेकर जंगल में इधर-उधर घूमता रहा और इलाज कराया। इसके बाद वह गैंग छोड़कर फरीदाबाद चला गया।
विज्ञापन
वहां क्षेत्र के लोगों के बीच रहकर मजदूरी करता रहा। मकर संक्रांति पर गांव आया था। पर्व मनाने के बाद वह पड़ोसी जिला सतना मप्र के हेलीपैड से सटी सरस्वती स्कूल के पीछे एक बस्ती में रह रहा था। डाकू लवलेश का सगा मामा जियालाल के साथ डाकुओं के घर के कई और भी रिश्तेदार थे।
सूत्रों के अनुसार जियालाल को गैंग ने किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए बुलाया था तभी वह सतना से ट्रेन पर मानिकपुर आ रहा था। इनकी भनक दोनों जिले के पुलिस अधिकारियों को लग गई थी। मझगवां-चितहरा स्टेशन के पास सादी वर्दी में कुछ पुलिसकर्मी उसे पूरी तरह शिनाख्त के बाद दबोचने की तैयारी में थे। इसके बाद भी वह जंगल पहुंच गया था।
सीमावर्ती सेमरिया कटाई मप्र जिला रीवा से एक किसान के अपहरण के बाद फिरौती वसूलने के दौरान गैंग में मौजूद रहा। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इसके बाद जियालाल गैंग के साथ ही था। किहुनिंया जंगल में मुठभेड़ के दौरान उसे गोली लगी और दबोच लिया गया है। उसने पुलिस अधिकारियों से बातचीत में यह माना है कि वह हरियाणा के फरीदाबाद व मप्र के सतना में अक्सर रहने जाता था। इसके बाद लौटकर गैंग में शामिल हो जाता था।