{"_id":"2c075980376d38c71ed9f06372de31b2","slug":"consign-a-around-tajiye-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ताजिये सुपुर्द-ए-खाक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ताजिये सुपुर्द-ए-खाक
ब्यूरो अमर उजाला, चित्रकूट
Updated Sun, 25 Oct 2015 10:15 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आशूरा यानी दसवीं मोहर्रम को इमामबाड़ों से उठे ताजियों को दफन किया गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में इसके पहले पूरी रात मातम और रस्मी ढोल-ताशों की गूंज रही।
शनिवार को दसवीं के मौके पर देर रात तक ताजिया और सवारियां निकाली गईं। सभी इमामबाड़ों से ये ताजिये और सवारियां निर्धारित स्थानों पर पहुंचे और वहां दफन किए गए।
कोतवाल रनवीर सिंह ने बताया कि कजियाना मुहल्ले के दो ताजिए पुल घाट के पास, कजियाना का एक ताजिया और तीन उटारखाने के ताजिए राजा घाट में दफन किए गए।
विज्ञापन
इसके अलावा मन्नत के छोटे-छोटे अन्य ताजिए भी विभिन्न स्थानों पर दफन किए गए। भरतकूप में भी निर्धारित स्थान पर दफन किए गए।
बताया कि सीतापुर के दो ताजिए रविवार सुबह नदी किनारे निर्धारित स्थान पर दफन किए गए। अन्य जगहों पर भी शांतिपूर्वक माहौल में ताजियों को दफन किया गया।
विज्ञापन
शनिवार को दसवीं के मौके पर देर रात तक ताजिया और सवारियां निकाली गईं। सभी इमामबाड़ों से ये ताजिये और सवारियां निर्धारित स्थानों पर पहुंचे और वहां दफन किए गए।
विज्ञापन
कोतवाल रनवीर सिंह ने बताया कि कजियाना मुहल्ले के दो ताजिए पुल घाट के पास, कजियाना का एक ताजिया और तीन उटारखाने के ताजिए राजा घाट में दफन किए गए।
विज्ञापन
इसके अलावा मन्नत के छोटे-छोटे अन्य ताजिए भी विभिन्न स्थानों पर दफन किए गए। भरतकूप में भी निर्धारित स्थान पर दफन किए गए।
बताया कि सीतापुर के दो ताजिए रविवार सुबह नदी किनारे निर्धारित स्थान पर दफन किए गए। अन्य जगहों पर भी शांतिपूर्वक माहौल में ताजियों को दफन किया गया।