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लॉकडाउन: बीमार बेटे के इलाज को भटक रही मां
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चित्रकूट। मानिकपुर तहसील क्षेत्र के रामपुर की एक महिला बीमार बेटे का इलाज कराने के लिए दर दर भटकती रही। लॉकडाउन के चलते उसे न तो साधन मिल रहा हैं और न ही अस्पताल में भर्ती किया जा रहा था। मंगलवार को प्रयागराज से 60 किलोमीटर पैदल चलकर बरगढ़ आने पर मां-बेटे की हालत देख कुछ लोगों ने एंबुलेंस को फोन कर दिया। बाद में दोनों एंबुलेंस से मऊ सीएचसी पहुंच गए हैं। वहां उसके बेटे का अब इलाज शुरू हो गया।
रामपुर निवासी रासजीवन की पत्नी सुबेदिया देवी (60) ने मंगलवार को अपना दर्द बयां किया। बताया कि उसके बेटे गिरधारी लाल (40) के एक हाथ में फोड़ा और फैक्चर है। उसका इलाज कराने के लिए 24 अप्रैल को वह मानिकपुर सीएचसी पहुंची। वहां से जिला अस्पताल रेफर कर दिया। एंबुलेंस से वह जिला अस्पताल पहुंची तो वहां से प्रयागराज रेफर कर दिया। एंबुलेंस से उसे उसी रात प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने गिरधारी का इलाज करने से मना कर दिया। किसी तरह दोनों ने अस्पताल में रात गुजारी।
सुबेदिया देवी ने बताया कि उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर है। पति मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं। इससे वह अकेले ही बीमार बेटे का इलाज कराने के लिए भटकती रही। लॉकडाउन के चलते प्रयागराज से कोई एंबुलेंस नहीं मिली और न ही अन्य कोई साधन। इस पर बेटे के साथ पैदल ही गांव लौटने को चली दी। मंगलवार की दोपहर को वह किसी तरह बरगढ़ पहुंची तो दोनों की हालत देखकर कुछ लोगों ने एंबुलेंस को फोन कर बुला लिया। देर शाम को वह बेटे को लेकर मऊ सीएचसी पहुंची। सीएचसी के डॉ.धर्मराज ने बताया कि बीमार गिरधारी का इलाज शुरू किया है।
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रामपुर निवासी रासजीवन की पत्नी सुबेदिया देवी (60) ने मंगलवार को अपना दर्द बयां किया। बताया कि उसके बेटे गिरधारी लाल (40) के एक हाथ में फोड़ा और फैक्चर है। उसका इलाज कराने के लिए 24 अप्रैल को वह मानिकपुर सीएचसी पहुंची। वहां से जिला अस्पताल रेफर कर दिया। एंबुलेंस से वह जिला अस्पताल पहुंची तो वहां से प्रयागराज रेफर कर दिया। एंबुलेंस से उसे उसी रात प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने गिरधारी का इलाज करने से मना कर दिया। किसी तरह दोनों ने अस्पताल में रात गुजारी।
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सुबेदिया देवी ने बताया कि उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर है। पति मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं। इससे वह अकेले ही बीमार बेटे का इलाज कराने के लिए भटकती रही। लॉकडाउन के चलते प्रयागराज से कोई एंबुलेंस नहीं मिली और न ही अन्य कोई साधन। इस पर बेटे के साथ पैदल ही गांव लौटने को चली दी। मंगलवार की दोपहर को वह किसी तरह बरगढ़ पहुंची तो दोनों की हालत देखकर कुछ लोगों ने एंबुलेंस को फोन कर बुला लिया। देर शाम को वह बेटे को लेकर मऊ सीएचसी पहुंची। सीएचसी के डॉ.धर्मराज ने बताया कि बीमार गिरधारी का इलाज शुरू किया है।
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