फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Chitrakoot News ›   Chitrakoot jail shootout case, Criminal history of Mukim, Anshu and Meraj

चित्रकूट जेल गैंगवार: मुकीम के आतंक से थर्राया था कैराना, हिंदू कर गए थे पलायन, ये रही तीनों दुर्दांत की आपराधिक कुंडली

Sat, 15 May 2021 03:10 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट Published by: शिखा पांडेय Updated Sat, 15 May 2021 03:10 PM IST
सार

गैंगस्टर मुकीम काला शामली के कैराना का रहने वाला था। अंशू दीक्षित सीतापुर जिले के मानकपुर कुड़रा बनी का रहने वाला था। मेराज मूलरूप से गाजीपुर का रहने वाला था। पढ़ें तीनों का आपराधिक इतिहास...

विज्ञापन
Chitrakoot jail shootout case, Criminal history of Mukim, Anshu and Meraj
मुकीम, अंशू और मेराज की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गैंगस्टर मुकीम काला पश्चिमी उत्तर प्रदेश का खूंखार अपराधी था। आम जनता से लेकर कारोबारियों यहां तक कि पुलिस में भी उसका भय था। उसके आतंक की वजह से ही कैराना में हिंदुओं का पलायन हुआ था। जो यूपी विधानसभा 2017 के चुनाव में बड़ा मुद्दा बना था। सरकार बदलने के बाद काला का गैंग के खात्मे की शुरुआत हुई। अब उसका गैंग लीडर मारा गया। हत्या, लूट, रंगदारी, हत्या के प्रयास, फिरौती समेत काला पर 60 से अधिक आपराधिक केस दर्ज थे।
विज्ञापन


घर-घर लगवाए थे पोस्टर, रंगदारी दे जिंदगी बख्शता था
मुकीम काला शामली के कैराना का रहने वाला था। वह मुख्य रूप से लूट, डकैती और रंगदारी की वारदातों को अंजाम देता था। उसी दौरान वो हत्याएं करता था। उसने शामली व आसपास के जिलों में गांव गांव और शहरों में पोस्टर लगवाए थे। जिसमें उसने सीधे धमकी दी थी कि व्यापारियों को अगर जिंदा रहना है तो उसको रंगदारी देनी होगी। इससे लोग बेहद परेशान थे। एक विशेष धर्म के लोगों को अधिक प्रताड़ित करता था। इसी वजह से 2015-16 में कैराना से हिंदू पलायन करने लगे थे। यूपी विधानसभा चुनाव में ये बड़ा मुद्दा भाजपा ने बनाया था। जिसका लाभ भी मिला। कुल मिलाकर मुकीम कैराना से हिंदुओं के पलायन के पीछे का मुख्य खलनायक था।
विज्ञापन


तीन पुलिसकर्मियों की कर दी थी हत्या
मुकीम खाकी पर वार करता था। 5 जुलाई 2011 को शामली में सिपाही सचिन की हत्या की। 14 अक्तूबर 2011 सहारनपुर में सिपाही बलबीर को मौत के घाट उतारा था। पांच जून 2013 को सिपाही राहुल ढाका की कारबाइन लूटकर उसी को मार दिया था। कई बार लूट के बाद पुलिसकर्मियों पर गोलियां दाग चुका था। वो एके-47 भी रखता था। कई वारदातों को उसने इससे अंजाम दिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


ट्रैक्टर लूट से जरायम की दुनिया में रखा कदम
मुकीम का पिता मुस्तफा असलहा सप्लायर था। उसका भाई गैंगस्टर वसीम काला को एसटीएफ ने 28 सितंबर 2018 को एनकाउंटर में मार गिराया था। मुकीम राजमिस्त्री का काम करता था। 2010 में मुकीम ने हरियाणा में एक ट्रैक्टर लूटा था। इसके बाद से वो एक के बाद एक आपराधिक वारदातों को अंजाम देना शुरू किया जो सिलसिला लगातार जारी रहा। 2015 में सहारनपुर में तनिष्क के शोरूम में दस करोड़ की डकैती डाली थी। सबसे पहले मुकीम कग्गा के गैंग में शामिल हुआ था। 2011 में जब कग्गा का एनकाउंटर हुआ तब वो गैंग का सरगना बन गया।

अंशू का आपराधिक इतिहास

छात्र नेताओं की हत्या से दहलाई थी राजधानी

अंशू दीक्षित सीतापुर जिले के मानकपुर कुड़रा बनी का रहने वाला था। लखनऊ विश्वविद्यालय से उसने पढ़ाई की और छात्र राजनीति में भी कदम रखा। 2007 में उसने लखनऊ विवि के पूर्व महामंत्री विनोद त्रिपाठी और छात्र नेता गौरव सिंह की हत्या कर सनसनी मचा दी थी। तब वो अचानक सुर्खियों में आ गया था। इसके बाद सीतापुर में पुलिसकर्मियों को जहरीला पदार्थ खिलाकर कस्टडी से फरार हो गया था। पूर्व सीएमओ विनोद आर्या हत्याकांड में भी अंशू शामिल था। लखनऊ में उसने मड़ियांव और महानगर थाना क्षेत्र में हत्याकांड को अंजाम दिया था। उस पर एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज थे। दस से अधिक हत्याएं कर चुका था।

एसटीएफ पर किया था हमला
फरारी के दौरान एसटीएफ और पुलिस की टीम ने भोपाल में अंशू की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी थी। इस दौरान उसने टीम पर हमला कर दिया था। जिसमें एसटीएफ के दरोगा संदीप मिश्रा को दो गोलियां लगी थीं। वहीं क्राइम ब्रांच भोपाल के सिपाही राघवेंद्र को एक गोली लगी थी। गोरखपुर के पूर्व सभासद फैजी हत्याकांड में भी अंशू का नाम आया था। भोपाल से भी उस पर ईनाम था।

दोनों हाथों से करता था फायरिंग
अंशू शार्प शूटर था। बात बात पर गोली मारता था। पुलिस अफसर बताते हैं कि वो दोनों हाथों से असलहा चलाता था। उसको भी राजनीतिक संरक्षण मिला। यही वजह थी कि जेल में भी उसको पूरी सुविधाएं मिलती थी। जेल से वीडियो वायरल होना इसका सुबूत है।

मेराज का आपराधिक इतिहास

मुख्तार का गुर्गा था मेराज, मुन्ना बजरंगी का था करीबी

गैंगवार में मारा गया मेराज भी शातिर अपराधी रहा है। वो माफिया मुख्तार अंसारी का गुर्गा था। वो मुन्ना बजरंगी का बेहद खास था। मेराज मूलरूप से गाजीपुर का रहने वाला था। वो वाराणसी के जैतपुर थाने का हिस्ट्रीशीटर था। पुलिस अफसरों के मुताबिक मेराज का मुख्य काम था गैंग और शूटरों को असलहा मुहैया करवाना। फर्जी दस्तावेजों पर शस्त्र लाइसेंस भी जारी करवाता था। अलग-अलग राज्यों में मेराज का नेटवर्क था। वहां से ये फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवाता था। मेराज पर 14 आपराधिक केस दर्ज हैं। इसमें आर्म्स एक्ट, गैर इरादतन हत्या, गुंडा एक्ट, धोखाधड़ी फर्जीवाड़ा आदि केस शामिल हैं। उस पर 2004 में एनएसए भी लगा था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed