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चित्रकूट : बरदहा नदी उफान पर, रपटे पर भरा पानी, तहसील मुख्यालय के लिए 15 किमी की अतिरिक्त दूरी तय कर रहे
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फोटो नंबर-2- रामघाट पर मंदाकिनी का जलस्तर घटने के बाद का नजारा। संवाद
- फोटो : CHITRAKOOT
चित्रकूट। मध्यप्रदेश में लगातार बारिश के कारण बरदहा नदी उफान पर है। रपटे पर पानी भरा होने से लोगों को 15 किमी की अतिरिक्त दूरी तहसील मुख्यालय आने के लिए तय करनी पड़ रही है।
बरदहा नदी का जलस्तर बढ़ा होने से रानीपुर, गिदुरहा, रामपुर, कल्याणगढ़, ऊंचाडीह, चमरौहा, सकरौंहा, कोटा कंदेला, झलमल, कुबरी आदि का आपस में संपर्क कटा हुआ है। यहां के निवासियों का तीन दिन से आवागमन बंद है। कई ग्रामीण तो तट पर बैठ कर पानी कम होने का इंतजार कर रहे है। कई समाजसेवी तट पर फंसे ग्रामीणों को भोजन करा रहे हैं।
रानीपुर गांव के राजनारायण, सुनील द्विवेदी, सुरेश सिंह ने बताया कि वह मानिकपुर कस्बे में बाजार में सामान खरीदने के लिए आए थे। जब गांव लौटने लगे तो उसी दौरान नदी का जलस्तर बढ़ा होने के कारण नदी पार नहीं कर सके। इससे नदी के तट पर रुककर कर पानी कम होने का इंतजार कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों ने उन्हें खाना खिलाया है।
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मंदाकिनी का जलस्तर घटा, रामघाट में कीचड़
चित्रकूट। मंदाकिनी नदी में आया बाढ़ का पानी सोमवार को उतर गया। इससे स्थानीय निवासियों सहित प्रशासन ने राहत की सांस ली। वहीं, रामघाट सहित अन्य घाटों में कीचड़ जमा होने से मुश्किल हो गई है। रविवार को आई बाढ़ से मंदाकिनी नदी खतरे के निशान को पार कर गई थी। सोमवार की सुबह जलस्तर कम हो गया। कीचड़ होने के कारण रामघाट में सन्नाटा छाया रहा। कोई भी श्रद्धालु नहीं पहुंचा और दुकानें भी नहीं खुलीं। नदी से सटे एमपी क्षेत्र के प्रमोद वन, स्फटिक शिला के घाटों में भी गंदगी जमा हो गई है। नगर पालिका के चेयरमैन नरेंद्र गुप्ता ने बताया कि घाटों की सफाई कराई जा रही है। (संवाद)
नदी किनारे लगी सब्जी बही, किसान चिंतित
चित्रकूट। मंदाकिनी नदी के तट पर सीतापुर कस्बे से लेकर बनकट गांव तक सब्जी की पैदावार की जाती है। नदी में बाढ़ आने से सब्जी की फसल खराब हो गई है। इससे किसान चिंतित हैं। सीतापुर के राजकुमार निषाद, तरौहा के राजेश कुशवाहा, मोहन कुशवाहा, टिकुरा गांव निवासी राजकरन ने बताया कि बाढ़ आने से सब्जी नदी में बह गई। (संवाद)
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बरदहा नदी का जलस्तर बढ़ा होने से रानीपुर, गिदुरहा, रामपुर, कल्याणगढ़, ऊंचाडीह, चमरौहा, सकरौंहा, कोटा कंदेला, झलमल, कुबरी आदि का आपस में संपर्क कटा हुआ है। यहां के निवासियों का तीन दिन से आवागमन बंद है। कई ग्रामीण तो तट पर बैठ कर पानी कम होने का इंतजार कर रहे है। कई समाजसेवी तट पर फंसे ग्रामीणों को भोजन करा रहे हैं।
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रानीपुर गांव के राजनारायण, सुनील द्विवेदी, सुरेश सिंह ने बताया कि वह मानिकपुर कस्बे में बाजार में सामान खरीदने के लिए आए थे। जब गांव लौटने लगे तो उसी दौरान नदी का जलस्तर बढ़ा होने के कारण नदी पार नहीं कर सके। इससे नदी के तट पर रुककर कर पानी कम होने का इंतजार कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों ने उन्हें खाना खिलाया है।
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मंदाकिनी का जलस्तर घटा, रामघाट में कीचड़
चित्रकूट। मंदाकिनी नदी में आया बाढ़ का पानी सोमवार को उतर गया। इससे स्थानीय निवासियों सहित प्रशासन ने राहत की सांस ली। वहीं, रामघाट सहित अन्य घाटों में कीचड़ जमा होने से मुश्किल हो गई है। रविवार को आई बाढ़ से मंदाकिनी नदी खतरे के निशान को पार कर गई थी। सोमवार की सुबह जलस्तर कम हो गया। कीचड़ होने के कारण रामघाट में सन्नाटा छाया रहा। कोई भी श्रद्धालु नहीं पहुंचा और दुकानें भी नहीं खुलीं। नदी से सटे एमपी क्षेत्र के प्रमोद वन, स्फटिक शिला के घाटों में भी गंदगी जमा हो गई है। नगर पालिका के चेयरमैन नरेंद्र गुप्ता ने बताया कि घाटों की सफाई कराई जा रही है। (संवाद)
नदी किनारे लगी सब्जी बही, किसान चिंतित
चित्रकूट। मंदाकिनी नदी के तट पर सीतापुर कस्बे से लेकर बनकट गांव तक सब्जी की पैदावार की जाती है। नदी में बाढ़ आने से सब्जी की फसल खराब हो गई है। इससे किसान चिंतित हैं। सीतापुर के राजकुमार निषाद, तरौहा के राजेश कुशवाहा, मोहन कुशवाहा, टिकुरा गांव निवासी राजकरन ने बताया कि बाढ़ आने से सब्जी नदी में बह गई। (संवाद)