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Chitrakoot News: टूरिस्ट बसों में सुरक्षा में बड़ी चूक
Fri, 25 Sep 2026 11:35 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Fri, 25 Sep 2026 11:35 PM IST
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सीकेटीपी-06-दो बसों के बीच में सिलिंडर में खाना बनाते पर्यटक। संवाद
चित्रकूट। धर्मनगरी में भगवान कामतानाथ के दर्शन व रामघाट-हनुमानधारा की यात्रा के लिए रोजाना हजारों श्रद्धालु टूरिस्ट और स्लीपर बसों से पहुंचते हैं।
दूसरे राज्यों से आने वाली इन बसों में भी सुरक्षा इंतजामों की पड़ताल में तस्वीर चिंताजनक नजर आई। कहीं बस के अंदर रखे घरेलू गैस सिलिंडर को सड़क किनारे उतारकर खाना पकाया जा रहा तो कहीं यात्रियों से भरी बस में आग बुझाने का कोई यंत्र नजर नहीं आया।
एक अन्य बस में क्षमता से अधिक सवारियां इस कदर भरी थीं कि यात्रियों को पैर रखने तक की जगह नहीं थी। शुक्रवार को की गई पड़ताल में बसों की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े ये तीन अलग-अलग दृश्य सामने आए। इन बसों में सफर कर रहे यात्रियों के लिए किसी आपात स्थिति में क्या इंतजाम हैं, इसकी तस्वीर भी इन दृश्यों से साफ होती है।
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सीन-एक
रामायण मेला परिसर, सुबह 11 बजे पश्चिम बंगाल व राजस्थान से श्रद्धालुओं को लेकर आई दो स्लीपर बसें परिसर में खड़ी थीं। बस रुकने के बाद उनमें रखे दो घरेलू गैस सिलिंडर नीचे उतारे गए और वहीं खाना बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई।
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बस में सफर कर रहे बृजेश और कौशलेश ने बताया कि सिलिंडर बस में ही रखे जाते हैं। जरूरत पड़ने पर चाय व दूध गर्म करने के लिए बस के अंदर ही गैस का प्रयोग कर लिया जाता है। जहां भी बस जाती है, वहां स्वयं खाना बनाया जाता है।
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सीन-दो:
रामघाट के पास यात्रियों से भरी एक टूरिस्ट बस खड़ी थी। बस में 50 से अधिक यात्री बैठे नजर आए। पड़ताल के दौरान बस के अंदर आग बुझाने वाला अग्निशमन यंत्र नजर नहीं आया। इतना ही नहीं फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं था। चालक व परिचालक से पूछा गया तो उनको इस विषय में कोई जानकारी ही नहीं है।
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सीन-तीन
बेड़ी पुलिया में दोपहर दो बजे एक टूरिस्ट बस में करीब 50 से अधिक यात्री सवार थे। यात्री बस के आगे तक सटे बैठे दिखे। वहीं बस के आगे बारिश के दौरान शीशा साफ करने वाला वाइपर भी गायब मिला। बस में सफर कर रहे एक यात्री ने बताया कि वह लोग अब मथुरा जा रहे हैं।
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हादसे के बाद भी नहीं बदली तस्वीर
यात्री बसों में सुरक्षा की यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है, जब हाल में यमुना एक्सप्रेसवे पर टूरिस्ट बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत हो चुकी है। इस हादसे के बाद बसों में अग्निशमन यंत्र, इमरजेंसी एग्जिट, वायरिंग और यात्रियों की क्षमता जैसे सुरक्षा मानकों को लेकर चिंता बढ़ी है। धर्मनगरी में सामान्य दिनों में दूसरे राज्यों से 10 से अधिक टूरिस्ट बसें पहुंचती हैं।
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वर्जन
जिले में छह स्लीपर बसें है, जिनकी नियमित जांच की जाती है। इसके अलावा बाहर से आने वाली स्लीपर व अन्य बसों की लगातार जांचकर कार्रवाई की जाती है। -राजीव कुमार, एआरटीओ
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दूसरे राज्यों से आने वाली इन बसों में भी सुरक्षा इंतजामों की पड़ताल में तस्वीर चिंताजनक नजर आई। कहीं बस के अंदर रखे घरेलू गैस सिलिंडर को सड़क किनारे उतारकर खाना पकाया जा रहा तो कहीं यात्रियों से भरी बस में आग बुझाने का कोई यंत्र नजर नहीं आया।
एक अन्य बस में क्षमता से अधिक सवारियां इस कदर भरी थीं कि यात्रियों को पैर रखने तक की जगह नहीं थी। शुक्रवार को की गई पड़ताल में बसों की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े ये तीन अलग-अलग दृश्य सामने आए। इन बसों में सफर कर रहे यात्रियों के लिए किसी आपात स्थिति में क्या इंतजाम हैं, इसकी तस्वीर भी इन दृश्यों से साफ होती है।
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सीन-एक
रामायण मेला परिसर, सुबह 11 बजे पश्चिम बंगाल व राजस्थान से श्रद्धालुओं को लेकर आई दो स्लीपर बसें परिसर में खड़ी थीं। बस रुकने के बाद उनमें रखे दो घरेलू गैस सिलिंडर नीचे उतारे गए और वहीं खाना बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई।
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बस में सफर कर रहे बृजेश और कौशलेश ने बताया कि सिलिंडर बस में ही रखे जाते हैं। जरूरत पड़ने पर चाय व दूध गर्म करने के लिए बस के अंदर ही गैस का प्रयोग कर लिया जाता है। जहां भी बस जाती है, वहां स्वयं खाना बनाया जाता है।
सीन-दो:
रामघाट के पास यात्रियों से भरी एक टूरिस्ट बस खड़ी थी। बस में 50 से अधिक यात्री बैठे नजर आए। पड़ताल के दौरान बस के अंदर आग बुझाने वाला अग्निशमन यंत्र नजर नहीं आया। इतना ही नहीं फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं था। चालक व परिचालक से पूछा गया तो उनको इस विषय में कोई जानकारी ही नहीं है।
सीन-तीन
बेड़ी पुलिया में दोपहर दो बजे एक टूरिस्ट बस में करीब 50 से अधिक यात्री सवार थे। यात्री बस के आगे तक सटे बैठे दिखे। वहीं बस के आगे बारिश के दौरान शीशा साफ करने वाला वाइपर भी गायब मिला। बस में सफर कर रहे एक यात्री ने बताया कि वह लोग अब मथुरा जा रहे हैं।
हादसे के बाद भी नहीं बदली तस्वीर
यात्री बसों में सुरक्षा की यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है, जब हाल में यमुना एक्सप्रेसवे पर टूरिस्ट बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत हो चुकी है। इस हादसे के बाद बसों में अग्निशमन यंत्र, इमरजेंसी एग्जिट, वायरिंग और यात्रियों की क्षमता जैसे सुरक्षा मानकों को लेकर चिंता बढ़ी है। धर्मनगरी में सामान्य दिनों में दूसरे राज्यों से 10 से अधिक टूरिस्ट बसें पहुंचती हैं।
वर्जन
जिले में छह स्लीपर बसें है, जिनकी नियमित जांच की जाती है। इसके अलावा बाहर से आने वाली स्लीपर व अन्य बसों की लगातार जांचकर कार्रवाई की जाती है। -राजीव कुमार, एआरटीओ

सीकेटीपी-06-दो बसों के बीच में सिलिंडर में खाना बनाते पर्यटक। संवाद