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वन्यजीवों को बचाने की मुहिम: मुंबई हावड़ा रेल मार्ग किनारे बेरिकैडिंग
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मानिकपुर(चित्रकूट)। हावड़ा-मुंबई रेल रूट पर आए वन्यजीवों की मौत हो जाती है। अब रेल विभाग ने ट्रक पर वन्यजीवों व बाघों की आवाजाही रोकने के लिए काम शुरू किया है। पूर्व घोषित योजना के तहत मानिकपुर मारकुंडी से मझगवां रेल मार्ग पर जंगल के पास के रेल ट्रैक के दोनों ओर बैरिकेडिंग कराई जा रही है।
यूपी-एमपी सीमा अंतर्गत मझगवां वन परिक्षेत्र से गुजरने वाले मुंबई-हावड़ा रेल ट्रैक पर बाघ व अन्य वन्यजीवों की आवाजाही रोकने के लिए चैन लिंक लगाने का कार्य प्रारंभ किया गया है। बुधवार से काम शुुरू हुआ। अभी 500 मीटर में ही चेन लिंक लगाने की व्यवस्था हो पाई है। अक्सर इस मार्ग पर वन्यजीवों की ट्रेन से टकराने पर मौत होने के बाद डीएफओ सतना राजीव मिश्रा ने लगभग आठ महीने पहले वन मंत्रालय को पत्र लिखकर पांच किलोमीटर क्षेत्र में रेलवे ट्रैक पर चेन लिंक लगाने के लिए बजट की मांग की गई थी। पहले शासन ने इस बारे में दिलचस्पी नहीं दिखाई। लिहाजा अन्य मदों से 500 मीटर उस क्षेत्र में चेन लिंक लगाने का काम किया जा रहा है। वहां अक्सर बाघों का मूवमेंट होता रहता है। बताया बजट की व्यवस्था होने पर बाकी बचे एरिया मे चेन लिंक की जाएगी।
बता दें कि मझगवां और मारकुंडी रेंज में लगभग एक दर्जन छोटे बड़े बाघों की मौजूदगी है। इसमें से कई ऐसे हैं जो रेलवे लाइन पार करके अक्सर एक तरफ से दूसरी तरफ आते जाते रहते हैं। बाघों का रेलवे ट्रैक पर लगातार आना जाना खतरे से खाली नहीं रहता। ठंड के दिनों में बाघों की आना-जाना और ज्यादा बढ़ जाती है। इसकी वजह से वन विभाग को गश्ती दल लगाना पड़ता है। दो साल में बाघ समेत कई वन्यजीव ट्रेन की चपेट में आने से मर चुके हैं।
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यूपी-एमपी सीमा अंतर्गत मझगवां वन परिक्षेत्र से गुजरने वाले मुंबई-हावड़ा रेल ट्रैक पर बाघ व अन्य वन्यजीवों की आवाजाही रोकने के लिए चैन लिंक लगाने का कार्य प्रारंभ किया गया है। बुधवार से काम शुुरू हुआ। अभी 500 मीटर में ही चेन लिंक लगाने की व्यवस्था हो पाई है। अक्सर इस मार्ग पर वन्यजीवों की ट्रेन से टकराने पर मौत होने के बाद डीएफओ सतना राजीव मिश्रा ने लगभग आठ महीने पहले वन मंत्रालय को पत्र लिखकर पांच किलोमीटर क्षेत्र में रेलवे ट्रैक पर चेन लिंक लगाने के लिए बजट की मांग की गई थी। पहले शासन ने इस बारे में दिलचस्पी नहीं दिखाई। लिहाजा अन्य मदों से 500 मीटर उस क्षेत्र में चेन लिंक लगाने का काम किया जा रहा है। वहां अक्सर बाघों का मूवमेंट होता रहता है। बताया बजट की व्यवस्था होने पर बाकी बचे एरिया मे चेन लिंक की जाएगी।
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बता दें कि मझगवां और मारकुंडी रेंज में लगभग एक दर्जन छोटे बड़े बाघों की मौजूदगी है। इसमें से कई ऐसे हैं जो रेलवे लाइन पार करके अक्सर एक तरफ से दूसरी तरफ आते जाते रहते हैं। बाघों का रेलवे ट्रैक पर लगातार आना जाना खतरे से खाली नहीं रहता। ठंड के दिनों में बाघों की आना-जाना और ज्यादा बढ़ जाती है। इसकी वजह से वन विभाग को गश्ती दल लगाना पड़ता है। दो साल में बाघ समेत कई वन्यजीव ट्रेन की चपेट में आने से मर चुके हैं।
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