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भगवान के सामने स्वीकार कर लें, पाप हो जाएंगे खत्म
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फोटो-10- श्रीराम कथा के दौरान कथा सुनते साधूसंत व अन्य । संवाद
- फोटो : CHITRAKOOT
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चित्रकूट। धर्मनगरी के रामायण मेला परिसर में श्रीराम कथा में मानस वक्ता मुरलीधर महराज ने कहा कि भरत प्रेम की मूर्ति हैं। दुनिया के सभी भाइयों के लिए प्रेणास्रोत व आदर्श हैं। व्यक्ति अपने जीवन में जाने अनजाने अनेक पाप करता है, इन्हीं पापों को भगवान के सामने स्वीकार करने मात्र से पापों का नाश हो जाता है।
रविवार को परिसर में महाजन मनिहार परिवार की मेजबानी में श्रीराम कथा शुरू हुई। मानस वक्ता ने भगवान राम के वन गमन, भरत व माता कैकई के प्रसंग, अयोध्यावासियों का चित्रकूट प्रस्थान, निषादराज व कैकई चरित्र पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि भगवान को प्राप्त करने के लिए भक्ति मार्ग से श्रेष्ठ कोई मार्ग नहीं हो सकता। व्यक्ति को क्रोध, लोभ, मोह, हिंसा संग्रह आदि का त्याग कर विवेक के साथ श्रेष्ठ कर्म करना चाहिए।
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संत की वाणी के एक उपदेश को भी अगर जीवन में आत्मसात कर लिया जाए तो जन्म सफल हो जाता है। इस मौके पर यज्ञवेदी महंत सत्यदास महाराज, भागवताचार्य सिद्धार्थ पयासी, चंद्रकला, रमेश चंद्र मनिहार, विजय महाजन, नीलम महाजन गोयल, विष्णु गोयल, डा. चंदा शर्मा, शिव कुमार कंसल, उम्मेद सिंह राजपुरोहित, जगदीश गौतम, पंकज अग्रवाल व सौरभ पयासी सहित अनेक संत व श्रद्धालु मौजूद रहे।
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रविवार को परिसर में महाजन मनिहार परिवार की मेजबानी में श्रीराम कथा शुरू हुई। मानस वक्ता ने भगवान राम के वन गमन, भरत व माता कैकई के प्रसंग, अयोध्यावासियों का चित्रकूट प्रस्थान, निषादराज व कैकई चरित्र पर प्रकाश डाला।
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उन्होंने कहा कि भगवान को प्राप्त करने के लिए भक्ति मार्ग से श्रेष्ठ कोई मार्ग नहीं हो सकता। व्यक्ति को क्रोध, लोभ, मोह, हिंसा संग्रह आदि का त्याग कर विवेक के साथ श्रेष्ठ कर्म करना चाहिए।
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संत की वाणी के एक उपदेश को भी अगर जीवन में आत्मसात कर लिया जाए तो जन्म सफल हो जाता है। इस मौके पर यज्ञवेदी महंत सत्यदास महाराज, भागवताचार्य सिद्धार्थ पयासी, चंद्रकला, रमेश चंद्र मनिहार, विजय महाजन, नीलम महाजन गोयल, विष्णु गोयल, डा. चंदा शर्मा, शिव कुमार कंसल, उम्मेद सिंह राजपुरोहित, जगदीश गौतम, पंकज अग्रवाल व सौरभ पयासी सहित अनेक संत व श्रद्धालु मौजूद रहे।