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जनता की भावना के अनुरूप बनें योजनाएं: भागवत

Mon, 27 Feb 2017 11:41 PM IST
चित्रकूट अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 27 Feb 2017 11:41 PM IST
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Be in the spirit of public schemes: Bhagwat
मोहन भागवत - फोटो : ब्यूरो/ आगरा
भगवान राम की तपोभूमि में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शासन और जनता दोनों को उनका धर्म समझाया। कहा कि सरकार नाममात्र की होती है, जनता की भावना के अनुरूप नीतियां बनाने वाले को सफलता मिलती है। उन्होंने राष्ट्र के विकास के लिए मंत्रियों व आम जनमानस को चार मंत्र भी दिए। कहा कि सरकार की नीति, प्रशासन की कृति, समाज की चलती और गुप्त कीर्ति विकास और राष्ट्र निर्माण की कुंजी हैं। इन्हीं से गांव का विकास होगा। सरकारों को प्रयोग का साहस और सर्वत्र विकास की दृष्टि रखनी चाहिए।
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ग्रामोदय मेले के समापन में सोमवार को दीनदयाल शोध संस्थान के उद्यमिता परिसर में संघ प्रमुख ने कहा कि विकास के अलग-अलग अर्थ होते हैं। जो अमेरिका का मापक है वह भारत के लिए सही नहीं हो सकता है। पाश्चात्य सभ्यता के पीछे नहीं भागना चाहिए। ग्रामीण संस्कृति को बढ़ाने से देश विकसित होगा। पूर्ण स्वराज व अंतिम व्यक्ति को योजना का लाभ मिलने लगे तभी सफलता मानी जाती है।
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आरएसएस प्रमुख ने दीनदयाल शोध संस्थान के ग्रामीण विकास व पुनर्रचना की अवधारणा की सराहना करते हुए कहा कि सभी सरकारों को इस मॉडल को अपने क्षेत्रों में भी लागू करना चाहिए। विकास का रास्ता गांव से ही होकर जाता है। सरकारें भी समाज की भावनाओं के अनुरूप ही योजना बनाएं। इस मौके पर केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता स्वतंत्र प्रभार मंत्री राजीव प्रताप रूडी, केंद्रीय श्रम व रोजगार मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, डीआरआई के प्रधान सचिव अतुल जैन, संगठन मंत्री अभय महाजन, डीआरआई के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार और मप्र शासन के कुछ मंत्री मौजूद रहे।
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