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Chitrakoot News: मंदाकिनी में पुरखों को जल तर्पण कर किया याद
Mon, 08 Sep 2025 12:57 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Mon, 08 Sep 2025 12:57 AM IST
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फोटो05सीकेटीपी-5- परिचय- पितृपक्ष के पहले दिन मंदाकिनी में पूर्वजों को जलतर्पण करते भक्त। संवाद
चित्रकूट। पितृपक्ष के पहले ही दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मनगरी पहुंचे। मंदाकिनी नदी में स्नान कर लोगों ने अपने पुरखों को रामघाट में जल तर्पण कर पिंडदान किया। वहीं जिले की अन्य नदियों में भी श्रद्धालुओं ने पुरखों को जल तर्पण कर याद किया।
अश्विनी मास के कृष्ण पक्ष को पितृपक्ष माना जाता है। इसका आरंभ भाद्रपद पूर्णिमा से ही होता है। इस वर्ष पितृपक्ष की शुरुआत सात सितंबर से शुरू हुई। अमावस्या पर्व तक यह रहेगा। पहले दिन भगवान श्रीराम की तपोस्थली में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदाकिनी नदी में स्नान कर अपने पुरखों को जल तर्पण किया। इसके बाद रामघाट में पिंडदान किया। जिले के राजापुर, मऊ, मानिकपुर, भरतकूप क्षेत्र में नदियों में ग्रामीणों ने स्नान कर अपने पुरखों को जल तर्पण किया।
संत नवलेश दीक्षित, गायत्री पीठ चित्रकूट के व्यवस्थापक पं. रामनारायण त्रिपाठी ने बताया कि पौराणिक मान्यता है कि पितृ पक्ष में हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं। अपने वंशजों से तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध स्वीकार करते हैं। पितृ वास्तव में श्रद्धा के भूखे होते हैं। इस लिए निष्ठा से अर्पण करना चाहिए। इस दौरान तामसिक आहार नहीं खाना चाहिए। क्रोध नहीं करना चाहिए। किसी का अपमान नहीं करना चाहिए। सात्विक आचरण के साथ पितरों का स्मरण करना चाहिए।
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इनसेट
भगवान श्रीराम ने किया था पिंडदान
भरतमंदिर के महंत दिव्यजीवनदास ने बताया कि भगवान श्रीराम जब धर्मनगरी चित्रकूट आए थे। अपने पिता दशरथ की मृत्यु होने की जानकारी होने पर यही पर जल तर्पण कर पिंडदान किया था। उसी समय से श्रद्धा के कारण श्रद्धालु यहां पर अपने पुरखों को जल तर्पण करते हैं। यहां तक की विदेशों से भी श्रद्धालु यहां आते हैं।
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अश्विनी मास के कृष्ण पक्ष को पितृपक्ष माना जाता है। इसका आरंभ भाद्रपद पूर्णिमा से ही होता है। इस वर्ष पितृपक्ष की शुरुआत सात सितंबर से शुरू हुई। अमावस्या पर्व तक यह रहेगा। पहले दिन भगवान श्रीराम की तपोस्थली में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदाकिनी नदी में स्नान कर अपने पुरखों को जल तर्पण किया। इसके बाद रामघाट में पिंडदान किया। जिले के राजापुर, मऊ, मानिकपुर, भरतकूप क्षेत्र में नदियों में ग्रामीणों ने स्नान कर अपने पुरखों को जल तर्पण किया।
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संत नवलेश दीक्षित, गायत्री पीठ चित्रकूट के व्यवस्थापक पं. रामनारायण त्रिपाठी ने बताया कि पौराणिक मान्यता है कि पितृ पक्ष में हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं। अपने वंशजों से तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध स्वीकार करते हैं। पितृ वास्तव में श्रद्धा के भूखे होते हैं। इस लिए निष्ठा से अर्पण करना चाहिए। इस दौरान तामसिक आहार नहीं खाना चाहिए। क्रोध नहीं करना चाहिए। किसी का अपमान नहीं करना चाहिए। सात्विक आचरण के साथ पितरों का स्मरण करना चाहिए।
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भगवान श्रीराम ने किया था पिंडदान
भरतमंदिर के महंत दिव्यजीवनदास ने बताया कि भगवान श्रीराम जब धर्मनगरी चित्रकूट आए थे। अपने पिता दशरथ की मृत्यु होने की जानकारी होने पर यही पर जल तर्पण कर पिंडदान किया था। उसी समय से श्रद्धा के कारण श्रद्धालु यहां पर अपने पुरखों को जल तर्पण करते हैं। यहां तक की विदेशों से भी श्रद्धालु यहां आते हैं।