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अमिताभ की आवाज से झुमाते रहे सुदेश
ब्यूरो, अमर उजाला, चित्रकूट
Updated Wed, 19 Oct 2016 12:02 AM IST
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शरदोत्सव में गाना गाते पार्श्व गायक सुदेश भोसले
- फोटो : अमर उजाला
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शरदोत्सव के समापन दिवस पर पार्श्वगायक सुदेश भोंसले ने लोगों का भरपूर मनोरंजन किया। फिल्मों में आम तौर पर महानायक अमिताभ बच्चन के गीतों को आवाज देने वाले सुदेश ने जब गाने गाने शुरू किए तो लोग झूम उठे। श्रोता गुलाबी ठंड व ओस की गिरती बूंदों के बीच देर रात तक कार्यक्रम का आनंद लेते रहे।
समाजसेवी नानाजी देशमुख की जन्म शताब्दी पर सुरेंद्र पाल विद्यालय के परिसर में शरदोत्सव का समापन दिवस के कार्यक्रमों की शुरुआत सुदेश भोंसले ने मोहम्मद रफ ी के गाए भजन... सुख के सब साथी दु:ख में न कोय मेरे राम, मेरे राम से शुरू की। किशोर दा के गीत... मेरे महबूब कयामत होगी आज रुसवा तेरी गलियों में मोहब्बत होगी से पुराने गानों की तान छेड़ी।
इसके बाद सोना ओ मेरी मखणा से पर्दे पर अमिताभ के गाए गाने गाने शुरू किए तो लोगों की तालियां देर तक बजती रहीं। खइके पान बनारस वाला... और अरे दीवानाें मुझे पहचानो मैं हूं डान..., ओ लाल दुपट्टे वाली तेरा नाम तो बता, शाबा-शाबा आदि एक के बाद एक गानों से लोग झूमते रहे। लगातार दो घंटे तक उन्होंने प्रस्तुति दी और इस बीच लोगों की फ रमाइश पर भी गीत गाए, मिमिक्री करके लोगों को खूब हंसाया। मुंबई से आए उनके साथी कलाकार भूमिका एवं जुगुल किशोर तथा प्रदीप पल्लवी ने भी प्रस्तुतियां दीं।
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समाजसेवी नानाजी देशमुख की जन्म शताब्दी पर सुरेंद्र पाल विद्यालय के परिसर में शरदोत्सव का समापन दिवस के कार्यक्रमों की शुरुआत सुदेश भोंसले ने मोहम्मद रफ ी के गाए भजन... सुख के सब साथी दु:ख में न कोय मेरे राम, मेरे राम से शुरू की। किशोर दा के गीत... मेरे महबूब कयामत होगी आज रुसवा तेरी गलियों में मोहब्बत होगी से पुराने गानों की तान छेड़ी।
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इसके बाद सोना ओ मेरी मखणा से पर्दे पर अमिताभ के गाए गाने गाने शुरू किए तो लोगों की तालियां देर तक बजती रहीं। खइके पान बनारस वाला... और अरे दीवानाें मुझे पहचानो मैं हूं डान..., ओ लाल दुपट्टे वाली तेरा नाम तो बता, शाबा-शाबा आदि एक के बाद एक गानों से लोग झूमते रहे। लगातार दो घंटे तक उन्होंने प्रस्तुति दी और इस बीच लोगों की फ रमाइश पर भी गीत गाए, मिमिक्री करके लोगों को खूब हंसाया। मुंबई से आए उनके साथी कलाकार भूमिका एवं जुगुल किशोर तथा प्रदीप पल्लवी ने भी प्रस्तुतियां दीं।
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