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बीमारी से परेशान युवक ने चाकू मार खुदकुशी की
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चित्रकूट। बीमारी से परेशान युवक ने खुद चाकू मारकर जान दे दी। परिजनों ने बताया कि तीन साल से जिला मुख्यालय समेत कई स्थानों पर टीबी रोग का इलाज चल रहा था। आराम न मिलने से वह परेशान रहता था।
रैपुरा थाना क्षेत्र के देरानी गांव निवासी नाथू निषाद ने बताया कि उसका पुत्र श्रवण कुमार (30) टीबी रोग से पीड़ित था। कई जगह इलाज के बाद भी उसकी हालत सही न होने पर वह मानसिक रूप से बेहद परेशान रहता था। रविवार की देर रात चाकू से अपने पेट पर कई वार किए। पास में सो रही पत्नी सुनीता व भाई सर्वेश शोर सुनकर जाग गए। उन्होंने चाकू छीनकर रात में ही जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां से डॉक्टरों ने प्रयागराज रेफर कर दिया। उसके पारिवारिक भाई डबलू ने बताया कि प्रयागराज में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई है। वह चार भाइयों में बड़ा था। उसके चार बच्चे हैं। इस घटना के बाद किसान परिवार का रो रोकर बुरा हाल है।
टीबी रोगियों का शत प्रतिशत इलाज का दावा
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जिले में टीबी रोगियों का शत प्रतिशत इलाज किया जाता है और इसका परिणाम भी बेहतर हैं। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। श्रवण के भाई डबलू ने बताया कि जिला मुख्यालय में साधारण टीबी बताकर दवा दी जाती थी। श्रवण की तबीयत सही न रहने पर बाहर से भी इलाज कराया गया। इस संबंध में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. बीके अग्रवाल ने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। टीम भेजकर पूरी जांच पड़ताल कराई जाएगी।
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रैपुरा थाना क्षेत्र के देरानी गांव निवासी नाथू निषाद ने बताया कि उसका पुत्र श्रवण कुमार (30) टीबी रोग से पीड़ित था। कई जगह इलाज के बाद भी उसकी हालत सही न होने पर वह मानसिक रूप से बेहद परेशान रहता था। रविवार की देर रात चाकू से अपने पेट पर कई वार किए। पास में सो रही पत्नी सुनीता व भाई सर्वेश शोर सुनकर जाग गए। उन्होंने चाकू छीनकर रात में ही जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां से डॉक्टरों ने प्रयागराज रेफर कर दिया। उसके पारिवारिक भाई डबलू ने बताया कि प्रयागराज में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई है। वह चार भाइयों में बड़ा था। उसके चार बच्चे हैं। इस घटना के बाद किसान परिवार का रो रोकर बुरा हाल है।
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टीबी रोगियों का शत प्रतिशत इलाज का दावा
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जिले में टीबी रोगियों का शत प्रतिशत इलाज किया जाता है और इसका परिणाम भी बेहतर हैं। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। श्रवण के भाई डबलू ने बताया कि जिला मुख्यालय में साधारण टीबी बताकर दवा दी जाती थी। श्रवण की तबीयत सही न रहने पर बाहर से भी इलाज कराया गया। इस संबंध में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. बीके अग्रवाल ने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। टीम भेजकर पूरी जांच पड़ताल कराई जाएगी।
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