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राहत ऐसी जैसे ऊंट के मुंह में जीरा
Chitrakoot
Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
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मऊ (चित्रकूट)। धड़वार गांव के मजरे मटियारा में सोमवार को लगी भीषण आग में तबाह लोगों को प्रशासन ने मंगलवार को राहत राशि के दो लोगों को उन्नीस सौ और दो लोगों को तेरह सौ रुपए के चेक दिए। हजारों का नुकसान उठाने वाले किसानों ने कहा कि यह राहत ऐसी है जैसे ऊंट के मुंह में जीरा।
मटियारा में सोमवार की सुबह आग से हीरालाल उसके पुत्र बच्चीलाल, रामनरेश और बोधन का हजारों रुपए का अनाज और घर जलकर राख हो गए थे। इसके साथ ही बोधन के श्वसुर धर्मपाल का भी तगड़ा नुकसान हुआ था। बोधन की आंखें तो यह कहकर भर आती हैं कि कहां उसने बिटिया की शादी धूमधाम से करने की सोची थी कहां खाने के लाले हैं। धर्मपाल चकलइया तारी का रहने वाला है और पुत्री सियादुलारी पत्नी बोधन के अलावा कोई संतान न होने से वहां से यहां आकर रहने लगा है। मंगलवार को तहसीलदार जियालाल ने तीन लोगों को 1900-1900 और दो लोगों को 1300-1300 के चेक सौंपे। इसको इन लोगों ने ऊंट के मुंह में जीरा की तरह बहुत कम बताया है। इस समय ये सभी भुक्तभोगी गांव में दूसरों के घरों की शरण लिए हैं। इनके बच्चों शिवबाबू, रन्नो देवी, राजकिशोर, छोटी, राहुल आदि के शरीर पर वही कपड़े हैं जो उन लोगों ने पहन रखे थे। इन सभी बच्चों की किताबें भी आग ने लील लीं। उधर, धर्मपाल ने बताया कि उसका तो परिचय पत्र भी आग में जल गया, जिस वजह से बैंक अधिकारी ने चेक कैश करने से मना कर दिया। ये सभी भुक्तभोगी अपना जला और पानी से गीला हुआ अनाज सड़क या पड़ोसियों की छतों पर फैलाए हैं।
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मटियारा में सोमवार की सुबह आग से हीरालाल उसके पुत्र बच्चीलाल, रामनरेश और बोधन का हजारों रुपए का अनाज और घर जलकर राख हो गए थे। इसके साथ ही बोधन के श्वसुर धर्मपाल का भी तगड़ा नुकसान हुआ था। बोधन की आंखें तो यह कहकर भर आती हैं कि कहां उसने बिटिया की शादी धूमधाम से करने की सोची थी कहां खाने के लाले हैं। धर्मपाल चकलइया तारी का रहने वाला है और पुत्री सियादुलारी पत्नी बोधन के अलावा कोई संतान न होने से वहां से यहां आकर रहने लगा है। मंगलवार को तहसीलदार जियालाल ने तीन लोगों को 1900-1900 और दो लोगों को 1300-1300 के चेक सौंपे। इसको इन लोगों ने ऊंट के मुंह में जीरा की तरह बहुत कम बताया है। इस समय ये सभी भुक्तभोगी गांव में दूसरों के घरों की शरण लिए हैं। इनके बच्चों शिवबाबू, रन्नो देवी, राजकिशोर, छोटी, राहुल आदि के शरीर पर वही कपड़े हैं जो उन लोगों ने पहन रखे थे। इन सभी बच्चों की किताबें भी आग ने लील लीं। उधर, धर्मपाल ने बताया कि उसका तो परिचय पत्र भी आग में जल गया, जिस वजह से बैंक अधिकारी ने चेक कैश करने से मना कर दिया। ये सभी भुक्तभोगी अपना जला और पानी से गीला हुआ अनाज सड़क या पड़ोसियों की छतों पर फैलाए हैं।
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