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मऊ के मवई कलां गांव में भी हुई थी तबाही

Thu, 10 Oct 2013 05:39 AM IST
Chitrakoot
Chitrakoot Updated Thu, 10 Oct 2013 05:39 AM IST
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उधर, मऊ के मवई कलां गांव में भीषण तबाही हुई थी। गांव के ब्रजकिशोर ने बताया कि उसका कुल 27 लोगों का परिवार है। उसने पिछले साल 12 कुंतल बाजरा, डेढ़ कुंतल तिली, पांच कुंतल धान, चार कुंतल अरहर, तीन कुंतल ज्वार और मूंग उर्द हुई थी। इस साल तो परिवार का पालन पोषण हो सके इतनी भी फसल नहीं हुई। जयनारायण ने बताया कि उसका नौ लोगों का परिवार है। कुल 24 बीघा खेत है। पिछले साल खरीफ फसल की पैदावार 20 कुंतल बाजार, 10 कुंतल अरहर, सात कुंतल व मूंग उर्द की फसल हुई थी। इस बार भी फसल तैयार होते होते पानी ने पानी फेर दिया। उन्होंने बताया कि उसने इलाहाबाद बैंक की शाखा मऊ से एक लाख 16 हजार रुपये ऋण लिया था। अब यह है कि बैंक का कर्ज कहां से अदा किया जाएगा। शिवभान, बुधई, राजू, लल्लू आदि किसानों के खेत पानी में डूबे रहे। मवई कलां के प्रधान बेबी त्रिपाठी ने शासन प्रशासन से फसल के मुआवजे की मांग की। कुसुमा पत्नी गोरेलाल ने बताया कि उसके घर में पानी भर जाने से घर ढह गया था पर आज तक सहायता नहीं मिली। यही रोना गुलाबचंद्र पुत्र हुबलाल का है। उसने कहा कि गनीमत रही कि गिरते घर से उसने अपना अनाज सुरक्षित कर लिया था, जिसकी वजह से खाना पीना किसी तरह चल रहा है। ग्रामीणों का यहभी कहना था कि लेखपाल आदि आते थे और लिस्ट बनाकर चले जाते थे। उधर, बारिश और बाढ़ के दौरान मदद करने वाले मजदूरों गेंदालाल, श्रीपाल, शंकरलाल, देशराज, चौबे, लग्गड़, जगतपाल, टुनटुन आदि ने कहा कि उन लोगों ने रात दिन मेहनत की पर कोई मजदूरी आज तक नहीं मिली।
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‘मुआवजा तो शासन की रिपोर्ट से तय होगा’
उधर, इस संबंध में अधिकारियों का कहना था कि बाढ़ के बारे में शासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है और अब इसी के आधार पर मुआवजा मिलेगा। कितना मिलेगा यह तो बाद में ही बताया जा सकेगा। एसडीएम कर्वी अभयराज, एसडीएम मऊ एके श्रीवास्तव. तहसीलदार मऊ कतवारू राम का कहना है कि लेखपालों से प्राक्कलन रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। इसे शासन को भेजा जाएगा और तभी कितना किसको मुआवजा मिला यह बात पता चल सकेगी।
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अब अन्ना जानवरों की दिक्कत
उधर, किसानों की खरीफ की बची खुची फसल को रोजाना अन्ना जानवर निगल रहे हैं। सरैंया के गोकरण प्रसाद, हेमनारायण, गुलाब यादव, महेश प्रसाद शुक्ला, सुरेश प्रसाद, सुरेश त्रिपाठी, छबलाल यादव आदि ने बताया कि उनकी अरहर, ज्वार को अब अन्ना जानवर और वनरोज नष्ट किए जा रहे हैं।
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यह अच्छा संकेत भी- कृषि वैज्ञानिक
उधर, गनीवां कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. विनय इस बारिश से आशान्वित भी दिखे। उन्होंने बताया कि इस साल 1146 मिलीमीटर बारिश हुई, जो बहुत ज्यादा नहीं है। यहां तो रिकार्ड 15 सौ मिमी बारिश का रहा है। दिक्कत यह हुई कि समय गलत था। लगातार बारिश होने से किसान को फसल बुआई, रोपाई का समय नहीं मिला। उन्होंने कहा कि पिछले दो-तीन साल से बारिश अच्छी हो रही है और अगर यही हाल रहा तो जिले के जो एकाध ड्राई जोन हैं वे भी जलसंचयन की वजह से इससे बाहर हो जाएंगे।

किसानों की व्यथा...
तीस हजार बीघे के रकबे वाले सरधुवा गांव के किसान हरबक्श सिंह ने बताया कि 25 फीसदी कृषि की जमीन पयस्वनी नदी के किनारे पड़ती है, जिसमें बोई तिलहनी और दलहनी फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई। उन्होंने कहा कि किसान खरीफ की फसल की आमदनी से रबी की फसल को तैयार करने की आस लगाए था, जिसमें पानी फिर गया। मुआवजा भी अभी तक नसीब नहीं हो सका। महुआगांव के लालबहादुर सिंह ने बताया कि शुरुआत में अच्छी फसल से किसानों को अच्छी पैदावार की आशा थी। अब तो बीज निकलने का भी संकट है। जानवरों को चारे तक की दिक्कत है। गांव के कन्हई सिंह, नत्थू पाल, नन्हीं सिंह, देशराज निषाद, सुयश सिंह, भोला पाल, शंकर सिंह, लालू सिंह आदि ने बताया कि पयस्वनी नदी के किनारे उनकी भी 50 फीसदी खेती थी, जो पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में आ गई। गांव के दक्षिण में भदेदू गांव के किसानों की हालत भी दयनीय है। 14 हजार रकबे के गांव भदेदू की 25 फीसदी जमीन दोनों नदियों के किनारे किनारे थी, जिसमें ज्वार, बाजरा, अरहर, तिल, मूंग, उरद आदि की फसल थी। अब किसान बेबस है। राजा भइया सिंह, रोशन सिंह, विजय सिंह, पूर्व प्रधान बलवीर सिंह, शिवचंद्र, ज्ञान सिंह, जयनारायण त्रिपाठी, धर्मपाल, भानुप्रताप, कौशल किशोर, राजकिशोर, शिवमंगल निषाद, कुंजीलाल निषाद आदि ने बताया कि गांव में अस्सी फीसदी किसानों को खरीफ की फसल में भारी क्षति का सामना करना पड़ रहा है। खोंपा के भगवान दीन निषाद ने बताया कि बाढ़ में गांव टापू की तरह हो गया था। उन्होंने कहा कि मुआवजे को लेकर शासन-प्रशासन गंभीर नहीं नजर आता। जगरूप सिंह, बलराम सिंह, राममनोहर निषाद, बालेंद्र, लूटे सिंह, शिवशंकर आदि का कहना है कि गांव का कोई ऐसा किसान नहीं है, जो बाढ़ की मार से बचा हो। जिला पंचायत सदस्य शिवशंकर सिंह ने बताया कि किसान सूखे की वजह से टूट चुका है और इस संबंध में उन्होंने अपने स्तर से प्रति एकड़ 10 हजार रुपये की सहायता की मांग की है।
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