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भारतीय संस्कृति के दो प्रमुख आधार कृषि एवं ऋषि
Chitrakoot
Updated Wed, 14 Aug 2013 05:35 AM IST
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सीतापुर (चित्रकूट)। श्री जयेंद्र सरस्वती वेद विद्यालय में वेद ज्ञान सप्ताह के पहले दिन शोभायात्रा निकाली गई। इस मौके पर ग्रामोदय विवि के कुलपति प्रो. अरूप दास गुप्ता मुख्य अतिथि थे। विद्वत गोष्ठी में वेदों की व्याख्या की गई। साथ ही कहा गया कि भारतीय संस्कृति के दो प्रमुख आधार कृषि एवं ऋषि हैं।
कुलपति ने वेदांत दर्शन पर उद्बोधन दिया। डा. यमुना प्रसाद झा ने चारों वेदों के कलेवर पर प्रकाश डाला। आचार्य गोपाल तिवारी ने कहा कि अध्यात्मनिष्ठ भारतीय संस्कृति के दो प्रमुख आधार हैं। विद्या और ज्ञान के क्षेत्र में आज हमें जो भी उपलब्ध है, वह ऋषियों की देन है। आचार्य संतोष पाठक ने बताया कि वेदों में बहुत से वैज्ञानिक तथ्य हैं, जिन पर आज तक प्रकाश नहीं डाला जा सका है। डा. कमलेश कुमार थापक का कहना था कि वेदों में निरूपित देव तत्व अत्यंत जटिल है। कस्मै देवाय हविषा विधेम। प्रकाश त्रिपाठी का कहना था कि देवताओं का आधार तत्व ही अमूर्त है। डा. नीलम चौरे ने प्राच्य पंरपराओं पर प्रकाश डाला। डा. अजय चौरे ने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में वैदिक साहित्य के महत्व की प्रासंगिकता बताई। आचार्य पारीक ने वास्तोष्पाति शब्द का अर्थ समझाया और कहा कि ये ग्रह रक्षक देवता हैं। आचार्य विजय ने बताया कि प्राचीन ऋषि प्रकृति की विभिन्न घटनाओं में किसी रहस्यमयी शक्ति का दर्शन करते थे। ये शक्तियां ही मानव जीवन को संचालित करती थीं। धीरज पाठ, रामेंद्र त्रिपाठी, राधेरमण त्रिपाठी आदि ने भी विचार रखे।
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कुलपति ने वेदांत दर्शन पर उद्बोधन दिया। डा. यमुना प्रसाद झा ने चारों वेदों के कलेवर पर प्रकाश डाला। आचार्य गोपाल तिवारी ने कहा कि अध्यात्मनिष्ठ भारतीय संस्कृति के दो प्रमुख आधार हैं। विद्या और ज्ञान के क्षेत्र में आज हमें जो भी उपलब्ध है, वह ऋषियों की देन है। आचार्य संतोष पाठक ने बताया कि वेदों में बहुत से वैज्ञानिक तथ्य हैं, जिन पर आज तक प्रकाश नहीं डाला जा सका है। डा. कमलेश कुमार थापक का कहना था कि वेदों में निरूपित देव तत्व अत्यंत जटिल है। कस्मै देवाय हविषा विधेम। प्रकाश त्रिपाठी का कहना था कि देवताओं का आधार तत्व ही अमूर्त है। डा. नीलम चौरे ने प्राच्य पंरपराओं पर प्रकाश डाला। डा. अजय चौरे ने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में वैदिक साहित्य के महत्व की प्रासंगिकता बताई। आचार्य पारीक ने वास्तोष्पाति शब्द का अर्थ समझाया और कहा कि ये ग्रह रक्षक देवता हैं। आचार्य विजय ने बताया कि प्राचीन ऋषि प्रकृति की विभिन्न घटनाओं में किसी रहस्यमयी शक्ति का दर्शन करते थे। ये शक्तियां ही मानव जीवन को संचालित करती थीं। धीरज पाठ, रामेंद्र त्रिपाठी, राधेरमण त्रिपाठी आदि ने भी विचार रखे।
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