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चित्रकूट में डेढ़ हजार किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद
Chitrakoot
Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
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चित्रकूट। जनपद में भूमि विकास बैंक की एक मात्र शाखा में कुल 2163 किसानों के कर्ज पचास हजार रुपए तक व इससे कम हैं। प्रदेश सरकार की किसानों की कर्ज माफी की घोषणा से जिले में लगभग डेढ़ हजार किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इन किसानों के कुल 3 करोड़ 75 लाख रुपए बाकी हैं।
बैंक प्रबंधक महेश चंद्र ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इनमें से लगभग 30 फीसदी किसानों ने तो अब तक अपनी पहली किश्त भी नहीं अदा की है। उन्होंने कहा कि शासनादेश मिलने के बाद ही सभी किसानों की सूची बनाकर पूरा डिटेल शासन को भेजा जाएगा। प्रबंधक ने बताया कि 2008 में केंद्र सरकार के द्वारा किसानों की कर्जमाफी के बाद किसान कर्ज अदायगी के लिए और लापरवाह हो चुके हैं। वैसे भी बुंदेलखंड में किसानों को कर्ज अदायगी के लिए इतना ज्यादा दबाव देने की मनाही के बाद इसके लिए भी दबाव नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने बताया कि उनका बैंक किसानों को मीडियम व लांग टर्म लोन ही देता है। इसके बदले किसान की जमीन के कागजात रखाए जाते हैं। कम से कम एक किसान की डेढ़ एकड़ यानी कम से कम लगभग 3500 एकड़ जमीने गिरवी रखी हैं। प्रबंधक ने किसानों के नाम व नंबर देने से इंकार कर दिया लेकिन बैंक के सामने कुछ बकाएदारों के नाम के बोर्ड भी लगे थे लेकिन वे कर्ज माफी की सीमा से बाहर थे।
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बैंक प्रबंधक महेश चंद्र ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इनमें से लगभग 30 फीसदी किसानों ने तो अब तक अपनी पहली किश्त भी नहीं अदा की है। उन्होंने कहा कि शासनादेश मिलने के बाद ही सभी किसानों की सूची बनाकर पूरा डिटेल शासन को भेजा जाएगा। प्रबंधक ने बताया कि 2008 में केंद्र सरकार के द्वारा किसानों की कर्जमाफी के बाद किसान कर्ज अदायगी के लिए और लापरवाह हो चुके हैं। वैसे भी बुंदेलखंड में किसानों को कर्ज अदायगी के लिए इतना ज्यादा दबाव देने की मनाही के बाद इसके लिए भी दबाव नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने बताया कि उनका बैंक किसानों को मीडियम व लांग टर्म लोन ही देता है। इसके बदले किसान की जमीन के कागजात रखाए जाते हैं। कम से कम एक किसान की डेढ़ एकड़ यानी कम से कम लगभग 3500 एकड़ जमीने गिरवी रखी हैं। प्रबंधक ने किसानों के नाम व नंबर देने से इंकार कर दिया लेकिन बैंक के सामने कुछ बकाएदारों के नाम के बोर्ड भी लगे थे लेकिन वे कर्ज माफी की सीमा से बाहर थे।
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