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एक माह बाद खुला स्कूल, दिखी खामोशी
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एक माह बाद खुला स्कूल, दिखी खामोशी
स्कूल गेेट के पास मप्र पुलिस कर्मी भी तैनात
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। जुड़वा बच्चों के अपहरण के बाद हत्या की घटना के एक माह बाद सोमवार को सदगुरु पब्लिक स्कूल जानकीकुंड खुला। स्कूल में अजीब सी खामोशी व भय का माहौल रहा। सुरक्षा के लिए गेट पर निजी सुरक्षाकर्मियों के अलावा पुलिस बल भी तैनात रहा। नन्हें छात्र जो परीक्षा देने आए थे उनके चेहरे में मासूमियत भरी खामोशी थी। वह सब तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था देख हतप्रद भी थे। शिक्षक व अन्य कर्मचारी आपस में सिर्फ वही जुड़वां बच्चों की घटना की ही चर्चा करते रहे।
12 फरवरी की दोपहर स्कूल परिसर से बस से रामघाट निवासी तेल उद्यमी बृजेश रावत के जुड़वां बेटे प्रियांश व श्रेयांश को नकाबपोश बाइक सवारों ने तमंचे की नोंक पर अपहरण कर लिया था। इसके बाद से स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे और तब से स्कूल बंद रहा। सोमवार परीक्षा देने के लिए छात्रों की संख्या तो 90 प्रतिशत रही लेकिन खामोशी थी। स्कूल के प्राचार्य राकेश कुमार ने बताया कि सुरक्षा के लिए मप्र पुलिस बल भी गेट के पास तैनात किया गया है। कई सुरक्षा नियमों पर बदलाव कर छात्रों की सुरक्षा के लिए काम किया गया है।
पीड़ित परिवार के नहीं गए बच्चे
खोही। रामघाट निवासी बृजेश रावत के परिवार के 11 बच्चे इसी स्कूल में पढ़ते थे। इस घटना के बाद दो की हत्या हुई और बाकी नौ में सिर्फ तीन ही बोर्ड की परीक्षा कक्षा 10 व 12 की परीक्षा देने जाते थे। शेष छह बच्चे सोमवार को भी स्कूल नहीं गए।
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स्कूल गेेट के पास मप्र पुलिस कर्मी भी तैनात
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। जुड़वा बच्चों के अपहरण के बाद हत्या की घटना के एक माह बाद सोमवार को सदगुरु पब्लिक स्कूल जानकीकुंड खुला। स्कूल में अजीब सी खामोशी व भय का माहौल रहा। सुरक्षा के लिए गेट पर निजी सुरक्षाकर्मियों के अलावा पुलिस बल भी तैनात रहा। नन्हें छात्र जो परीक्षा देने आए थे उनके चेहरे में मासूमियत भरी खामोशी थी। वह सब तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था देख हतप्रद भी थे। शिक्षक व अन्य कर्मचारी आपस में सिर्फ वही जुड़वां बच्चों की घटना की ही चर्चा करते रहे।
12 फरवरी की दोपहर स्कूल परिसर से बस से रामघाट निवासी तेल उद्यमी बृजेश रावत के जुड़वां बेटे प्रियांश व श्रेयांश को नकाबपोश बाइक सवारों ने तमंचे की नोंक पर अपहरण कर लिया था। इसके बाद से स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे और तब से स्कूल बंद रहा। सोमवार परीक्षा देने के लिए छात्रों की संख्या तो 90 प्रतिशत रही लेकिन खामोशी थी। स्कूल के प्राचार्य राकेश कुमार ने बताया कि सुरक्षा के लिए मप्र पुलिस बल भी गेट के पास तैनात किया गया है। कई सुरक्षा नियमों पर बदलाव कर छात्रों की सुरक्षा के लिए काम किया गया है।
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पीड़ित परिवार के नहीं गए बच्चे
खोही। रामघाट निवासी बृजेश रावत के परिवार के 11 बच्चे इसी स्कूल में पढ़ते थे। इस घटना के बाद दो की हत्या हुई और बाकी नौ में सिर्फ तीन ही बोर्ड की परीक्षा कक्षा 10 व 12 की परीक्षा देने जाते थे। शेष छह बच्चे सोमवार को भी स्कूल नहीं गए।
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