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कैसे होगी पढ़ाई, स्कूलों में भरा घुटनों तक पानी
Updated Sat, 01 Sep 2018 11:17 PM IST
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कैसे होगी पढ़ाई, जब स्कूलों में भरा घुटनों तक पानी
अमर उजाला ब्यूरो
मऊ। बारिश के बाद तालाब और नदियों के ऊफान का असर गांव की बस्तियों पर भी पड़ने लगा है। हाईवे किनारे अहिरी गांव के प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक स्कूल के हालात तो यह हैं कि घुटनों तक पानी भर गया है। जिससे शिक्षण कार्य व आवागमन प्रभावित है। छात्रों में पढ़ाई का ऐसा जज्बा रहा कि शनिवार को भी कुछ परवाह किए वह स्कूल पहुंचे।
मऊ ब्लाक क्षेत्र के अहिरी गांव के प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक स्कूल अगल-बगल हैं। यहां से गुजरने वाली सड़क खराब व अधूरी बनी पड़ी है। स्कूल भवन में गहराई होने और पानी निकासी की व्यवस्था न होने से बारिश के दिनों में अक्सर यहां पढ़ाई बाधित रहती है। स्थानीय लोगाें का कहना है कि हाईवे की ओर से बारिश का पानी और स्कूल के पीछे बने तालाब के लबालब होने के बाद वहां का पानी सड़क व स्कूल भवन तक पहुंच जाता है। शनिवार को ऐसी ही स्थिति बन गई तो आधे से ज्यादा बच्चे पढ़ने ही नहीं पहुंचे। इसके बावजूद कुछ साहसी व शिक्षा के प्रति जागरूक बच्चे घुटनों तक पानी में भी चलकर स्कूल पहुंचे। जहां उन्हें मिड-डे मील खिलाकर जल्द ही घर भेज दिया गया।
प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक शारतेंद्रु शुक्ला व पूर्व माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक शीतल प्रसाद सिंह ने बताया कि शनिवार को बारिश का पानी स्कूल भवन व बाहर भरा है। जिससे शिक्षण कार्य बाधित है। वैसे तो इन स्कूलों में 197 बच्चे हैं लेकिन शनिवार को कुल 35 बच्चे ही आए थे। यहां की सड़क व जलभराव की समस्या के निस्तारण के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है।
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अमर उजाला ब्यूरो
मऊ। बारिश के बाद तालाब और नदियों के ऊफान का असर गांव की बस्तियों पर भी पड़ने लगा है। हाईवे किनारे अहिरी गांव के प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक स्कूल के हालात तो यह हैं कि घुटनों तक पानी भर गया है। जिससे शिक्षण कार्य व आवागमन प्रभावित है। छात्रों में पढ़ाई का ऐसा जज्बा रहा कि शनिवार को भी कुछ परवाह किए वह स्कूल पहुंचे।
मऊ ब्लाक क्षेत्र के अहिरी गांव के प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक स्कूल अगल-बगल हैं। यहां से गुजरने वाली सड़क खराब व अधूरी बनी पड़ी है। स्कूल भवन में गहराई होने और पानी निकासी की व्यवस्था न होने से बारिश के दिनों में अक्सर यहां पढ़ाई बाधित रहती है। स्थानीय लोगाें का कहना है कि हाईवे की ओर से बारिश का पानी और स्कूल के पीछे बने तालाब के लबालब होने के बाद वहां का पानी सड़क व स्कूल भवन तक पहुंच जाता है। शनिवार को ऐसी ही स्थिति बन गई तो आधे से ज्यादा बच्चे पढ़ने ही नहीं पहुंचे। इसके बावजूद कुछ साहसी व शिक्षा के प्रति जागरूक बच्चे घुटनों तक पानी में भी चलकर स्कूल पहुंचे। जहां उन्हें मिड-डे मील खिलाकर जल्द ही घर भेज दिया गया।
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प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक शारतेंद्रु शुक्ला व पूर्व माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक शीतल प्रसाद सिंह ने बताया कि शनिवार को बारिश का पानी स्कूल भवन व बाहर भरा है। जिससे शिक्षण कार्य बाधित है। वैसे तो इन स्कूलों में 197 बच्चे हैं लेकिन शनिवार को कुल 35 बच्चे ही आए थे। यहां की सड़क व जलभराव की समस्या के निस्तारण के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है।
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