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स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का हो रहा प्रयास
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चित्रकूट। ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के प्रयास जारी है। खोह गांव में 200 बेड का जच्चा-बच्चा अस्पताल का निर्माण हो गया है। जल्द ही यहां मरीजों को सुविधाएं मिलनी शुरू हो जाएंगी। इसके अलावा प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी बनवाए जा रहे हैं। हाल ही में भौरी कस्बे में पीएचसी का शुभारंभ किया गया। रूखमा खुर्द में पीएचसी व रैपुरा में सीएचसी का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है।
डाक्टरों की कमी सबसे बड़ी बाधा
चित्रकूट। मौजूदा समय जिला चिकित्सालय सहित छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) व 28 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) संचालित हैं। इनमें ज्यादातर स्वास्थ्य केंद्रों में मानकों के मुताबिक डॉक्टरों समेत अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ की तैनाती नहीं है। हाल यह है सभी केंद्रों के लिए 98 चिकित्सकों के पद स्वीकृत है। इनमें मात्र 29 डॉक्टर ही तैनात हैं। 165 स्वास्थ्य कर्मचारियों की जगह 130 कर्मी काम कर रहे हैं। कर्मचारी न होने से टीकाकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम प्रभावित होते हैं।
स्वास्थ्य केंद्रों में डाक्टरों, रेडियोलॉजिस्ट, फार्मासिस्ट, ओटी टेक्नीशियन व अन्य पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती के लिए शासन से पत्राचार किया गया है। इससे अलावा लोगों को सभी सीएचसी में एक्सरे की सुविधा शुरू होने की भी उम्मीद है। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. राजेंद्र सिंह का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई कार्य किए जा रहे हैं। डाक्टरों व कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए शासन-प्रशासन को पत्र लिखा गया है।
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चित्रकूट। मऊ क्षेत्र में यमुना नदी पर पुल का निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है। करीब 10 वर्ष शुरू किया गए निर्माण कार्य में अब तक मात्र 12 पिलर ही बन सके है। मामले को लेकर लोगों में खासी नाराजगी है।
पुल का निर्माण 2011 में शुरू हुआ था। यहां कुल 42 पिलर लगने हैं। कार्यदायी संस्था राज्य सेतु निगम की लापरवाही से निर्माण कार्य कछुआ गति से भी ज्यादा सुस्त है। डीएम विशाखा जी अय्यर ने बताया कि अधिकारियों को पुल का निर्माण जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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डाक्टरों की कमी सबसे बड़ी बाधा
चित्रकूट। मौजूदा समय जिला चिकित्सालय सहित छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) व 28 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) संचालित हैं। इनमें ज्यादातर स्वास्थ्य केंद्रों में मानकों के मुताबिक डॉक्टरों समेत अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ की तैनाती नहीं है। हाल यह है सभी केंद्रों के लिए 98 चिकित्सकों के पद स्वीकृत है। इनमें मात्र 29 डॉक्टर ही तैनात हैं। 165 स्वास्थ्य कर्मचारियों की जगह 130 कर्मी काम कर रहे हैं। कर्मचारी न होने से टीकाकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम प्रभावित होते हैं।
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स्वास्थ्य केंद्रों में डाक्टरों, रेडियोलॉजिस्ट, फार्मासिस्ट, ओटी टेक्नीशियन व अन्य पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती के लिए शासन से पत्राचार किया गया है। इससे अलावा लोगों को सभी सीएचसी में एक्सरे की सुविधा शुरू होने की भी उम्मीद है। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. राजेंद्र सिंह का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई कार्य किए जा रहे हैं। डाक्टरों व कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए शासन-प्रशासन को पत्र लिखा गया है।
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चित्रकूट। मऊ क्षेत्र में यमुना नदी पर पुल का निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है। करीब 10 वर्ष शुरू किया गए निर्माण कार्य में अब तक मात्र 12 पिलर ही बन सके है। मामले को लेकर लोगों में खासी नाराजगी है।
पुल का निर्माण 2011 में शुरू हुआ था। यहां कुल 42 पिलर लगने हैं। कार्यदायी संस्था राज्य सेतु निगम की लापरवाही से निर्माण कार्य कछुआ गति से भी ज्यादा सुस्त है। डीएम विशाखा जी अय्यर ने बताया कि अधिकारियों को पुल का निर्माण जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।