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UP Politics: जब राज्यपाल के भाषण के बीच सीएम टीएन सिंह ने किया इस्तीफे का एलान, लोहिया को दी थी शिकस्त
Thu, 11 Apr 2024 04:14 PM IST
अमन विश्वकर्मा
अमरेंद्र पांडेय, अमर उजाला, चंदौली
अमरेंद्र पांडेय, अमर उजाला, चंदौली
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Thu, 11 Apr 2024 04:14 PM IST
सार
UP Politics: राजनीतिक परिवेश में आज भी इस किस्से को याद किया जाता है। 60 के दशक में वे केंद्र सरकार में उद्योग और फिर लौह और इस्पात मंत्री रहे।
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पत्नी के साथ सीएम टीएन सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चंदौली लोकसभा सीट से जुड़े कई दिलचस्प किस्से आज भी लोगों की जुबां पर हैं। यहां शुरू के दो लोकसभा चुनाव में त्रिभुवन नारायण सिंह सांसद चुने गए। वे चंदौली के एकमात्र ऐसे सांसद हैं जो बाद में मुख्यमंत्री बने। वहीं वह एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री रहे जो मुख्यमंत्री रहते हुए उपचुनाव में खुद हार गए।
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भारतीय राजनीति में ऐसी आम धारणा है कि उपचुनाव का परिणाम सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में ही जाता है। ख़ासतौर से जब मुख्यमंत्री खुद उपचुनाव लड़ रहा हो, तो इस चुनाव परिणाम के बारे में बहुत कम लोगों को संदेह रह जाता है। लेकिन 1971 में गोरखपुर के मानीराम विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में ठीक इसका उल्टा हुआ। यूं तो त्रिभुवन नारायण सिंह वाराणसी के रहने वाले थे।
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उन्होंने पहली बार 1952 में चंदौली से लोकसभा का चुनाव लड़ा था और 1957 के चुनाव में उन्होंने उसी सीट से दिग्गज समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया को हराया था। 60 के दशक में वे केंद्र सरकार में उद्योग और फिर लौह और इस्पात मंत्री रहे।
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कांग्रेस के रामकृष्ण द्विवेदी से हारे टीएन सिंह
मार्च 1971 में हुए विधानसभा उपचुनाव में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ख़ुद कांग्रेस के उम्मीदवार रामकृष्ण द्विवेदी के समर्थन में प्रचार करने मानीराम गई थीं। इसकी वजह ये थी कि कांग्रेस का विभाजन हो चुका था और त्रिभुवन नारायण सिंह, मोरारजी देसाई और चंद्रभानु गुप्त के समर्थक थे। इसलिए इंदिरा गांधी नहीं चाहती थीं कि टीएन सिंह विधानसभा के सदस्य बनें।
अमर उजाला में संवाददाता रहे रामकृष्ण द्विवेदी ने इंदिरा गांधी के प्रचार की बदौलत मुख्यमंत्री त्रिभुवन नारायण सिंह को करीब 15,000 वोटों से पराजित किया था। भारत के इतिहास में ये पहला मौका था जब कोई मुख्यमंत्री इस तरह उपचुनाव में पराजित हुआ था। चुनाव परिणाम तब आया जब सदन में राज्यपाल का अभिभाषण चल रहा था। टीएन सिंह ने भाषण के बीच में अपने इस्तीफे की घोषणा करके सबको चौंका दिया था।