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सोशल मीडिया का प्रयोग करें सावधानी से, सच्ची खबर अखबारों से
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पीडीडीयू नगर। आज सोशल मीडिया लोगों के जीवन का मुख्य हिस्सा बन गया है। चाहे खबर हो, मनोरंजन हो या किसी अन्य क्षेत्र की बात पल में हमारे सामने आ जाती है। हमारे पड़ोस की घटना हो अथवा संसार के दूसरे छोर पर बसे किसी देश की घटना आंखों देखी हाल हमारे सामने होता है, लेकिन जितनी तेजी से सूचनाओं का आदान प्रदान हो रहा है, उससे तेज गति से इसका दुरुपयोग भी हो रहा है। सूचनाओं की आड़ में लगातार अफवाह भी फैलाई जा रही है। ऐसे में युवाओं को इसका उपयोग सावधानी पूर्वक करना चाहिए। आज भी हमारे पास सही और सटीक सूचनाएं अखबार पहुंचाते हैं। नगर के युवाओं की माने तो हम सभी सतर्क रहकर ही सुरक्षित रह सकते हैं।
नगर के युवा सुमित कुमार कहते हैं कि आज जमाना सोशल मीडिया का है। चाहे फेसबुक हो, वाट्सएप हो, इंस्टाग्राम हो अथवा टिकटॉक व अन्य सोशल साइटें। सूचना, मनोरंजन के लिए हमारा प्रमुख जरिया बन गया है लेकिन यह धीरे धीरे हमारे दिमाग को अपने कब्जे में ले रहा है। कोरोना वायरस संक्रमण काल में फेक न्यूज ने लोगों का नुकसान पहुंचाया है। इसी तरह प्रदीप यादव ने कहा कि सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें परोसी जा रही है। उस पर लोग भरोसा भी कर रहे हैं और उसे आगे बढ़ा रहे हैं। इस तरह गलत सूचनाओं का प्रसार तेजी से होता है और इसका गलत असर दिखता है। घटनाएं जितनी भयावह बताई जाती है, मामला वैसा कुछ नहीं होता है। ऐसा सोशल मीडिया पर सेंसर न होने की वजह से होता है। अखबार विश्वनीय और सटीक जानकारी देते हैं। इसलिए इस पर भरोसा करना चाहिए। कुंतल सिंह ने कहा कि अखबार भी अब सोशल साइटों पर जानकारी दे रहे हैं। यही नहीं इसका ई पेपर मोबाइल पर भी पढ़ा जा सकता है। ऐसे में सोशल साइटों पर विश्वास करने के बजाए अखबार देखना ज्यादा अच्छा है। शालू चौहान ने कहा कि अखबारों के डिजिटल प्लेटफार्म भी है। सोशल साइट पर भरोसा करने के बजाए अखबार के साइट पर जाकर सही जानकारी लेनी चाहिए।
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नगर के युवा सुमित कुमार कहते हैं कि आज जमाना सोशल मीडिया का है। चाहे फेसबुक हो, वाट्सएप हो, इंस्टाग्राम हो अथवा टिकटॉक व अन्य सोशल साइटें। सूचना, मनोरंजन के लिए हमारा प्रमुख जरिया बन गया है लेकिन यह धीरे धीरे हमारे दिमाग को अपने कब्जे में ले रहा है। कोरोना वायरस संक्रमण काल में फेक न्यूज ने लोगों का नुकसान पहुंचाया है। इसी तरह प्रदीप यादव ने कहा कि सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें परोसी जा रही है। उस पर लोग भरोसा भी कर रहे हैं और उसे आगे बढ़ा रहे हैं। इस तरह गलत सूचनाओं का प्रसार तेजी से होता है और इसका गलत असर दिखता है। घटनाएं जितनी भयावह बताई जाती है, मामला वैसा कुछ नहीं होता है। ऐसा सोशल मीडिया पर सेंसर न होने की वजह से होता है। अखबार विश्वनीय और सटीक जानकारी देते हैं। इसलिए इस पर भरोसा करना चाहिए। कुंतल सिंह ने कहा कि अखबार भी अब सोशल साइटों पर जानकारी दे रहे हैं। यही नहीं इसका ई पेपर मोबाइल पर भी पढ़ा जा सकता है। ऐसे में सोशल साइटों पर विश्वास करने के बजाए अखबार देखना ज्यादा अच्छा है। शालू चौहान ने कहा कि अखबारों के डिजिटल प्लेटफार्म भी है। सोशल साइट पर भरोसा करने के बजाए अखबार के साइट पर जाकर सही जानकारी लेनी चाहिए।
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