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Chandauli News: यूजीसी के नए नियम के विरोध में सड़क पर उतरा सवर्ण समाज
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कलेक्ट्रेट में यूजीसी बिल के विरोध में प्रदर्शन करते सवर्ण समाज के लोग। स्रोत:-जागरूक पाठक
चंदौली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की नई नियमावली से सवर्ण समाज में उबाल आ गया है। बुधवार को विभिन्न सगठनों के लोगों ने जिला मुख्यालय पर जुलूस निकाला और धरना प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। इस दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नया नियम वापस नहीं लिया गया तो सरकार को इसके परिणाम भुगतने होंगे।
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा और अखिल भारतीय सवर्ण मोर्चा के बैनरतले लोगों ने बाइक जुलूस निकाला। नारेबाजी करते हुए नगर भ्रमण के बाद कलेक्ट्रेट पहुंचे और राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। क्षत्रिय महासभा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यूजीसी का नया नियम संविधान में प्रदत्त समानता के मूल अधिकार (अनुच्छेद 14, 15 एवं 21) की भावना के अनुरूप नहीं है।
भारत का संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार प्रदान करता है, किंतु यह केवल एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के अधिकारों पर केंद्रित है। इसमें सामान्य वर्ग के छात्रों के अधिकारों और संवैधानिक संरक्षण को नजरअंदाज किया गया है। अखिल भारतीय सवर्ण युवा मोर्चा के अध्यक्ष अखिलेश सिंह शांडिल्य ने कहा कि यह नियम सवर्ण समाज के खिलाफ है। यदि इसे वापस नहीं लिया गया तो पूरे भारत को बंद किया जाएगा।
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अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा और अखिल भारतीय सवर्ण मोर्चा के बैनरतले लोगों ने बाइक जुलूस निकाला। नारेबाजी करते हुए नगर भ्रमण के बाद कलेक्ट्रेट पहुंचे और राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। क्षत्रिय महासभा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यूजीसी का नया नियम संविधान में प्रदत्त समानता के मूल अधिकार (अनुच्छेद 14, 15 एवं 21) की भावना के अनुरूप नहीं है।
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भारत का संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार प्रदान करता है, किंतु यह केवल एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के अधिकारों पर केंद्रित है। इसमें सामान्य वर्ग के छात्रों के अधिकारों और संवैधानिक संरक्षण को नजरअंदाज किया गया है। अखिल भारतीय सवर्ण युवा मोर्चा के अध्यक्ष अखिलेश सिंह शांडिल्य ने कहा कि यह नियम सवर्ण समाज के खिलाफ है। यदि इसे वापस नहीं लिया गया तो पूरे भारत को बंद किया जाएगा।
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