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दूसरे दिन भी घरों के चूल्हे ठंडे रहे
ब्यूरो/ अमरउजाला, चंदौली
Updated Thu, 16 Jun 2016 01:33 AM IST
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घर में नहीं जले चूल्हे।
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क्षेत्र के मवई कला गांव के तीन बच्चों की गंगा में डूबकर हुई मौत के दूसरे दिन भी गांव में मातम पसरा रहा। दूसरे दिन भी पूरे गांव में चूल्हे नहीं जले और बस रोने की आवाजें आती रही।
गंगा दशहरा पर गंगा स्नान करने गए मवईकला के तीन बच्चों की गंगा में डूबने से मौत हो गई थी। इन किशोरों के साथ डूबे दो अन्य को किसी तरह बचा लिया गया। बुधवार को बच्चों के शव पोस्टमार्टम के बाद परिवार के लोगों को मिले और गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन बच्चों के न रहने का गम सिर्फ परिवार वालों को ही नहीं बल्कि पूरे गांव को है। यही कारण है कि दूसरे दिन भी लगभग सभी घरों में चूल्हे ठंडे रहे।
मृत बच्चों के परिवार वालों को ढांढस बंधाने के लिए पूरा गांव एकत्र रहा। यही नहीं मृत बच्चों के दूर दराज के रिश्तेदारों के आने का भी सिलसिला जारी है।
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इससे गांव में रोने की आवाज कम नहीं हो रही है। यहां तक कि ढांढस बंधाने पहुंच रहे लोग भी परिवार वालों के करुण क्रंदन से कांप जा रहे हैं। सभी तरफ सिर्फ इस घटना की ही चर्चा हो रही है। दूसरी तरफ गांव में इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के न पहुंचने का गांव वालों को मलाल रहा।
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गंगा दशहरा पर गंगा स्नान करने गए मवईकला के तीन बच्चों की गंगा में डूबने से मौत हो गई थी। इन किशोरों के साथ डूबे दो अन्य को किसी तरह बचा लिया गया। बुधवार को बच्चों के शव पोस्टमार्टम के बाद परिवार के लोगों को मिले और गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन बच्चों के न रहने का गम सिर्फ परिवार वालों को ही नहीं बल्कि पूरे गांव को है। यही कारण है कि दूसरे दिन भी लगभग सभी घरों में चूल्हे ठंडे रहे।
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मृत बच्चों के परिवार वालों को ढांढस बंधाने के लिए पूरा गांव एकत्र रहा। यही नहीं मृत बच्चों के दूर दराज के रिश्तेदारों के आने का भी सिलसिला जारी है।
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इससे गांव में रोने की आवाज कम नहीं हो रही है। यहां तक कि ढांढस बंधाने पहुंच रहे लोग भी परिवार वालों के करुण क्रंदन से कांप जा रहे हैं। सभी तरफ सिर्फ इस घटना की ही चर्चा हो रही है। दूसरी तरफ गांव में इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के न पहुंचने का गांव वालों को मलाल रहा।