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बदलते मौसम के कारण बीमारियों का खतरा बढ़ा
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चंदौली। जून में अच्छी बारिश के बाद इधर कुछ दिनों से कड़ी धूप निकल रही है। इसके कारण उमस वाली गर्मी से लोग परेशान हैं। मौसम का यह बदलाव लोगों के लिए तमाम दुश्वारियां लेकर आया है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सर्दी, खांसी, बुखार, घबराहट और अन्य तमाम बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। इसी चलते सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। पं. कमलापति त्रिपाठी संयुक्त जिला चिकित्सालय चंदौली में जहां पहले 700 मरीज आते थे वहीं अब 900 हो गए हैं।
अस्पताल में प्रतिदिन 10 से 15 मरीज भर्ती भी हो रहे हैं। भर्ती ओपीडी में आने वाले मरीजों में ज्यादातर उल्टी-दस्त, अपच, मौसमी बुखार, सर्दी व जुकाम, पीलिया, मलेरिया ,धूप के कारण पानी की कमी, चक्कर आना हीट स्ट्रोक व सांप डंसना, बिच्छू का डंक मारना आदि शामिल हैं। जिला अस्पताल के डॉ. संजय कुमार की मानें तो इससे बचाने के लिए धूप में जाएं तो पानी पीकर ही बाहर निकलें, बासी खाना न खाएं, बच्चों को ओआरएस का घोर पिलाएं, स्वयं चीनी, नमक और पानी का खोल बनाकर पीएं। मच्छरदानी का प्रयोग करें, कूलर का पानी नियमित रूप से बदलें, बाहर किसी भी पात्र में पानी इकठ्ठा न होने दें। सर्पदंश, बुखार आदि होने पर अस्पताल जाएं।
चंदौली। बारिश का पानी जहां शरीर को बड़ा नुकसान पहुंचा रहा है, वहीं बारिश के बाद निकले वाली चिलचिलाती धूप लोगों को बीमार कर रही है। बारिश की इस धूप से फेस रेडनस, सन बर्न, खुजली व कई तरह की एलर्जी हो रही है। यहां तक कि समय पर इलाज न मिलने से स्कीन की ये समस्या स्कीन कैंसर जैसी घातक बीमारी का भी रूप ले लेती है। डॉक्टर की मानें तो बरसात के मौसम में निकलने वाली तेज धूप हर तरह से लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा रही है।
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चंदौली। बारिश का अम्लीय पानी स्कीन की ऊपरी लेयर को डैमेज कर देता है, जिससे स्कीन इन्फेक्शन हो जाता है। मधुमेह वाले लोगों को बारिश में भीगने से पस वाले दाने बन सकते हैं, जो आगे चलकर स्कीन की बड़ी समस्या बन सकते हैं। बारिश में भीगने से खुजली जैसे बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं।
चंदौली। बारिश में भीगने के बाद शरीर को अच्छे से पोछें और जल्द से जल्द कपड़े बदलें। शरीर पर पाउडर लगाएं। इससे स्किन का रिप्लेशमेंट होने में मदद मिलती है। बारिश में होने वाली घमौरियों को हलके में न लें, डॉक्टर की सलाह लें व दवाइयां लें। बारिश की धूप से बचने का हर संभव प्रयास करें।
जनपद के सभी सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कोई कमी नहीं है। किसी भी प्रकार की कोई भी परेशानी हो तत्काल अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचे और इलाज कराएं।
डॉ वीपी द्विवेदी, सीएमओ।
रिपोर्ट- राकेश चंद्र यादव
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अस्पताल में प्रतिदिन 10 से 15 मरीज भर्ती भी हो रहे हैं। भर्ती ओपीडी में आने वाले मरीजों में ज्यादातर उल्टी-दस्त, अपच, मौसमी बुखार, सर्दी व जुकाम, पीलिया, मलेरिया ,धूप के कारण पानी की कमी, चक्कर आना हीट स्ट्रोक व सांप डंसना, बिच्छू का डंक मारना आदि शामिल हैं। जिला अस्पताल के डॉ. संजय कुमार की मानें तो इससे बचाने के लिए धूप में जाएं तो पानी पीकर ही बाहर निकलें, बासी खाना न खाएं, बच्चों को ओआरएस का घोर पिलाएं, स्वयं चीनी, नमक और पानी का खोल बनाकर पीएं। मच्छरदानी का प्रयोग करें, कूलर का पानी नियमित रूप से बदलें, बाहर किसी भी पात्र में पानी इकठ्ठा न होने दें। सर्पदंश, बुखार आदि होने पर अस्पताल जाएं।
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चंदौली। बारिश का पानी जहां शरीर को बड़ा नुकसान पहुंचा रहा है, वहीं बारिश के बाद निकले वाली चिलचिलाती धूप लोगों को बीमार कर रही है। बारिश की इस धूप से फेस रेडनस, सन बर्न, खुजली व कई तरह की एलर्जी हो रही है। यहां तक कि समय पर इलाज न मिलने से स्कीन की ये समस्या स्कीन कैंसर जैसी घातक बीमारी का भी रूप ले लेती है। डॉक्टर की मानें तो बरसात के मौसम में निकलने वाली तेज धूप हर तरह से लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा रही है।
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चंदौली। बारिश का अम्लीय पानी स्कीन की ऊपरी लेयर को डैमेज कर देता है, जिससे स्कीन इन्फेक्शन हो जाता है। मधुमेह वाले लोगों को बारिश में भीगने से पस वाले दाने बन सकते हैं, जो आगे चलकर स्कीन की बड़ी समस्या बन सकते हैं। बारिश में भीगने से खुजली जैसे बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं।
चंदौली। बारिश में भीगने के बाद शरीर को अच्छे से पोछें और जल्द से जल्द कपड़े बदलें। शरीर पर पाउडर लगाएं। इससे स्किन का रिप्लेशमेंट होने में मदद मिलती है। बारिश में होने वाली घमौरियों को हलके में न लें, डॉक्टर की सलाह लें व दवाइयां लें। बारिश की धूप से बचने का हर संभव प्रयास करें।
जनपद के सभी सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कोई कमी नहीं है। किसी भी प्रकार की कोई भी परेशानी हो तत्काल अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचे और इलाज कराएं।
डॉ वीपी द्विवेदी, सीएमओ।
रिपोर्ट- राकेश चंद्र यादव