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समस्या बिजली, पानी और सड़क की
ब्यूरो/अमर उजाला, चंदौली
Updated Thu, 20 Aug 2015 01:55 AM IST
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करीब दस वर्ग किमी में फैले और सवा सौ औद्योगिक इकाइयों के साथ औद्योगिक
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क्षेत्र रामनगर की स्थिति कागजों पर तो बेहद मजबूत दिखती है पर बिजली की
मार से आस्थान के अधिकांश कारखानों की सेहत खराब है।
कई इकाइयां बंद हो चुकी हैं तो कई इसकी कगार पर हैं।
नेशनल हाइवे के दक्षिणी छोर पर बसे इस औद्योगिक परिक्षेत्र को फेज वन नाम दिया गया है। इसे औद्योगिक क्षेत्र रामनगर के नाम से भी जाना जाता है।
यहां छोटी बड़ी 124 इकाइयां स्थापित हैं। जिनमें दस पर ताला लग चुका है। आस्थान के विकास की जिम्मेदारी यूपी एसआईडीसी की है पर कहीं उसका काम दिखता नहीं है।
इतना बड़ा क्षेत्र होने के बावजूद परिसर में पानी की कोई व्यवस्था नहीं की है। ऐसे में उद्यमी सबमर्सिबल पंप लगा कर काम चलाते है।
औद्योगिक इलाके से अच्छा राजस्व मिलने के बाद भी यहां बिजली आपूर्ति व्यवस्था चौपट है। बार-बार ट्रिपिंग होने से कई बार कारखानों में काम शुरू ही नहीं हो पाता है।
वजह कि एक बार मशीनों के बंद होने पर उसे हीट होने में दो से तीन घंटे का समय लगता है। इस वजह से अधिकांश कारखानेदार अब जेनरेटर पर अधिक भरोसा कर रहे हैं पर इससे निर्माण की लागत बढ़ती है। सड़कें जर्जर होने से माल को लाने ले जाने में परेशानी होती है।
पशु आहार और आयरन निर्माण कंपनी की तरफ जाने वाले रोड पर गहरे गड्ढे बने हैं। बारिश में पूरा परिक्षेत्र तालाब बन जाता है। तीन दशक पहले बनी नालियां मलबों से पट चुकी हैं।
व्यापारी संगठन चंदा लगाकर इनकी सफाई कराते हैं पर स्थायी समाधान न होने से फिर वही स्थित हो जाती है।
कई इकाइयां बंद हो चुकी हैं तो कई इसकी कगार पर हैं।
नेशनल हाइवे के दक्षिणी छोर पर बसे इस औद्योगिक परिक्षेत्र को फेज वन नाम दिया गया है। इसे औद्योगिक क्षेत्र रामनगर के नाम से भी जाना जाता है।
यहां छोटी बड़ी 124 इकाइयां स्थापित हैं। जिनमें दस पर ताला लग चुका है। आस्थान के विकास की जिम्मेदारी यूपी एसआईडीसी की है पर कहीं उसका काम दिखता नहीं है।
इतना बड़ा क्षेत्र होने के बावजूद परिसर में पानी की कोई व्यवस्था नहीं की है। ऐसे में उद्यमी सबमर्सिबल पंप लगा कर काम चलाते है।
औद्योगिक इलाके से अच्छा राजस्व मिलने के बाद भी यहां बिजली आपूर्ति व्यवस्था चौपट है। बार-बार ट्रिपिंग होने से कई बार कारखानों में काम शुरू ही नहीं हो पाता है।
वजह कि एक बार मशीनों के बंद होने पर उसे हीट होने में दो से तीन घंटे का समय लगता है। इस वजह से अधिकांश कारखानेदार अब जेनरेटर पर अधिक भरोसा कर रहे हैं पर इससे निर्माण की लागत बढ़ती है। सड़कें जर्जर होने से माल को लाने ले जाने में परेशानी होती है।
पशु आहार और आयरन निर्माण कंपनी की तरफ जाने वाले रोड पर गहरे गड्ढे बने हैं। बारिश में पूरा परिक्षेत्र तालाब बन जाता है। तीन दशक पहले बनी नालियां मलबों से पट चुकी हैं।
व्यापारी संगठन चंदा लगाकर इनकी सफाई कराते हैं पर स्थायी समाधान न होने से फिर वही स्थित हो जाती है।