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श्रीराम का जीवन समाज के लिए पथ प्रदर्शक : राजन महाराज
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धानापुर में कथा सुनते लोग। संवाद
धानापुर। कस्बा स्थित दशमी पोखरा परिसर में उदयनाथ सिंह फाउंडेशन की ओर से आयोजित पांच दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के अंतिम दिन राजन महाराज ने राम-सीता विवाह का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन समाज के लिए पथ प्रदर्शक है। श्रीराम ने सिखाया कि समाज में कैसे रहना चाहिए और पत्नी, भाई तथा परिवार के अन्य सदस्यों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए। इसी वजह से श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए।
श्री राम कथा में राजन महाराज ने कहा कि श्रीराम कथा से लोगों को सीख लेनी चाहिए। उनके आदर्शों को अपनाने से समाज आदर्श बनेगा। श्रीराम कथा प्रेम, सद्भाव, नैतिकता और मर्यादित जीवन का संदेश देती है। इसे लोगों को अपने जीवन में भी उतारना चाहिए। और सीख को अपनाना चाहिए।
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उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों को वर्तमान सामाजिक जीवन से जोड़ते हुए उनके आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा दी। कथा के अंतिम दिन संगीतमय राम-सीता विवाह प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। भक्ति गीतों और जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा परिसर भक्तिमय बना रहा।
कथा में भीड़ इतनी ज्यादा थी कि मुख्य पंडाल में खड़े होने तक की जगह नहीं बची। ऐसे में लोगों को पंडाल से बाहर लगाई गई स्क्रीन के माध्यम से कथा सुननी पड़ी।
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उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन समाज के लिए पथ प्रदर्शक है। श्रीराम ने सिखाया कि समाज में कैसे रहना चाहिए और पत्नी, भाई तथा परिवार के अन्य सदस्यों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए। इसी वजह से श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए।
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श्री राम कथा में राजन महाराज ने कहा कि श्रीराम कथा से लोगों को सीख लेनी चाहिए। उनके आदर्शों को अपनाने से समाज आदर्श बनेगा। श्रीराम कथा प्रेम, सद्भाव, नैतिकता और मर्यादित जीवन का संदेश देती है। इसे लोगों को अपने जीवन में भी उतारना चाहिए। और सीख को अपनाना चाहिए।
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उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों को वर्तमान सामाजिक जीवन से जोड़ते हुए उनके आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा दी। कथा के अंतिम दिन संगीतमय राम-सीता विवाह प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। भक्ति गीतों और जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा परिसर भक्तिमय बना रहा।
कथा में भीड़ इतनी ज्यादा थी कि मुख्य पंडाल में खड़े होने तक की जगह नहीं बची। ऐसे में लोगों को पंडाल से बाहर लगाई गई स्क्रीन के माध्यम से कथा सुननी पड़ी।

धानापुर में कथा सुनते लोग। संवाद