काशी में गंगा के घाटों से आरती देखने की आदत है। इस बार नजरें ऊपर थीं। ढाई घंटे लगा कि जैसे आसमान में ही ज्यामिति की क्लास लग गई हो। कमिश्नरेट की पुलिस के मुताबिक दूसरे दिन शुक्रवार को 12 लाख से ज्यादा दर्शकों ने 100 विमानों का करतब देखा है। नमो घाट के ठीक सामने डोमरी सहित पूरे गंगा उस पार करीब पांच लाख से ज्यादा लोगों ने एयर शो का लुत्फ उठाया।
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एयर शो की तस्वीरें बना रहे लोग।
- फोटो : अमर उजाला
पहली बार 88 घाटों के अलावा गंगा पार के रेती पर भी इतनी भीड़ देखने को मिली। एयर शो खत्म होने के बाद 70 मिनट में शहर की सड़कों पर यातायात व्यवस्था को सामान्य कर दिया गया। कहा जाता है कि कुछ शहर इतिहास के लिए जाने जाते हैं। कुछ अपने भविष्य के लिए। इस बार काशी ने दोनों को एक ही फ्रेम में रख दिया। शिव तांडव से शुरू 100 विमानों का शो रोमांटिक गाने पर खत्म हुआ। सूर्य किरण और सारंग हेलिकॉप्टर के नौ विमानों ने आसमान में दिल को उकेर दिया।
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एयर शो बना रोमांच का मामला।
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100 विमानों का करतब ढाई घंटे चला मगर आकाश में हर कोण, हर दूरी और हर सेकंड के पीछे सदियों की ट्रेनिंग चली। सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम के नौ हॉक एमके 132 जेट, डीएनए मैनूवर, बैरल रोल और इनवर्टेड फ्लाइंग जैसे करतब ने दर्शकों के गर्दन और सिर को घंटों आसमान पर टिकाए रखा।
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एयर शो में सेना के विमान।
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एयर शो के दो दिनों में 142 लोगों का हुआ इलाज
चुभती धूप और गर्मी के बीच एयर शो के दो दिनों में 142 लोगों का इलाज हुआ। वहीं शुक्रवार को नमो घाट पहुंचे 32 विद्यालयों के 3150 विद्यार्थी और 200 से ज्यादा एनसीसी कैडेट्स गंगा के ऊपर में शौर्य देखकर वायुसेना पायलट बनने की कल्पनाओं में डूब गए। साथ में 100 शिक्षकों की भी टीम थी। इस बीच कई विद्यार्थियों को लेकर शिक्षक छांव खोजते रहे। स्वास्थ्य शिविर में भी लोग पहुंचे और पांच से छह बार एंबुलेंस भी नमो घाट से मरीजों को अस्पताल लेकर गई।
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एयर शो में हेलीकाॅप्टर।
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12 एयरबेस से विमानों ने भरा उड़ान
वायुसेना के 94वें स्थापना पर नमो घाट पर हो रहे एयर शो के दूसरे दिन कुल 100 विमानों ने 25 तरह के फॉर्मेशन बनाए। इसमें 52 लड़ाकू विमान, 32 हेलिकॉप्टर और एक विंटेज विमान हार्वर्ड विमानों ने अपना युद्ध और कला कौशल दिखाया। इन सभी विमानों ने तमिलनाडु, बमरौली, ग्वालियर, गोरखपुर सहित 12 एयरबेस से उड़ान भरा। इसमें काशी, वरुणा, केदार, हनुमान, ओमकार, रुद्र, भागीरथी, त्रिदेव, अलकनंदा, भैरव, कैलाश, त्रिलोचन, नटराज, महादेव, विश्वनाथ, प्रचंड, अस्सी और दशाश्वमेध फॉर्मेशन शामिल थे।