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बर्बाद फसल पर दो ने तोड़ा दम
ब्यूरो अमर उजाला चंदौली
Updated Fri, 17 Apr 2015 01:29 AM IST
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बर्बाद फसल पर दो ने तोड़ा दम
गत दिनों बेमौसम आई आंधी व बारिश अब किसानों की जान लेने लगी है। गुरुवार को अपने फसल की बर्बादी न देख पाने पर दो किसानों की सदमे से मौत हो गई।
जिसमें पहली मौत सकलडीहा के पौरा गांव में तथा दूसरी मौत धानापुर क्षेत्र के कुसुम्ही गांव में किसान की हुई। जिले में इस तरह की पहली घटना है।
मौके पर राजस्व विभाग की टीम पहुंचकर रिपोर्ट तैयार करने में जुट गई।
गत दिनों हुई बारिश से चार एकड़ की फसल बर्बाद होने पर गुरुवार की भोर में सकलडीहा तहसील के पौरा गांव निवासी हरंवश पाठक (68) की सदमे से मौत हो गई।
सुबह लोगों ने उनको चारपाई पर मृत पाया। किसान पर सहकारी बैंक का 25 हजार रुपये कर्ज भी है। सकलडीहा के पौरा गांव के हरवंश पाठक की जीविका खेती बारी थी। उनकी चार एकड़ गेहूं की फसल बारिश से चौपट हो गई। बुधवार को पूरे दिन वे परिवारीजनों से बारिश से फसल के बर्बाद होने की चर्चा करते रहे। सहकारी बैंक के कर्ज को लेकर भी वे चिंतित रहते थे।
इसके पहले किसान ने काशी ग्रामीण बैंक से कर्ज पर ट्रैक्टर भी खरीदा था। खेती में लगातार हो रहे घाटे से बैंक का कर्ज चुका न पाने पर उन्हें चार विस्वा खेत बेचना पड़ा। हरवंश के चार बेटे हैं। एसडीएम सकलडीहा जितेन्द्र मोहन सिंह ने राजस्व विभाग की टीम को पौरा गांव भेजकर रिपोर्ट मांगी है।
उधर धानापुर थाना क्षेत्र के कुसुम्ही गॉव के किसान नगीना राम (65) की गुरुवार को अपने खेत में ही फसल को देखकर मौत हो गई। उन्होंने 6 बीघा खेत में गेहूं बोया था।
जिसमें प्रयोग की गई खाद, बीज, कीटनाशक दवाओं का भुगतान अभी नहीं हुआ। गुरुवार को खेत पर पहुचे नगीना राम ने जो बर्बादी देखी, तो कलेजे पर हाथ रखकर खेत में वहीं बैठ गये और मौत हो गई। लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर ले गये, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
ग्राम प्रधान पति श्यामनारायण कुशवाहा ने मृत किसान के घरवालों को 10 लाख की आर्थिक सहायता देने की शासन से मांग की है। नगीना को दो पुत्र एवं दो पुत्रियां है ।
दस लाख रुपये मुआवजा देनेे की मांग
सकलडीहा। पौरा गांव के मरे किसान को लेकर जिले में सियासत शुरू हो गयी है। विभिन्न दलों के नेताओं ने मृतक के परिवार को दस लाख मुआवजा देने की मांग की है।
भाजपा नेता हरवंश पटेल ने चंदौली को आपदा पीड़ित जिला घोषित करने की मांग की। वहीं सपा जिलाध्यक्ष सत्यनारायण राजभर व पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष जोखू सिद्की ने कहा है कि मृतक परिवार के लोगों की हर संभव मदद पहुंचाई जायेगी। उधर भाजपा जिलामंत्री संजय त्रिपाठी ने कहा कि किसानों के साथ प्रदेश सरकार मजाक कर रही है। सरकारी मुआवजे के नाम पर खानापूर्ति करने में जुुटी है।
13500 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा
सकलडीहा। बारिश से बर्बाद हुई फसलों को राजस्व विभाग की टीम द्वारा किसानों को सिर्फ 13 हजार पांच सौ रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा उपलब्ध कराया जायेगा।
तहसील क्षेत्र में बर्बाद फसल के लिए राजस्व विभाग की टीम ने मूल्यांकन करना शुरू कर दिया है। उपजिलाधिकारी सकलडीहा जितेन्द्र मोहन सिंह ने बताया कि बर्बाद फसल के लिए शासन ने मानक तय कर दिया है। मानकों के हिसाब से ही किसानों को फसलों का मुआवजा दिया जायेगा।
उधर किसानों का कहना है कि शासन स्तर से तय की गयी मुआवजे की रकम काफी कम है। इसे और बढ़ाने की जरूरत है। वहीं यह भी पता चला है कि शासन ने तो मानक तय कर दिया है। मगर किसानों को मुआवजा देेने के लिए धन नहीं आया है।
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गत दिनों बेमौसम आई आंधी व बारिश अब किसानों की जान लेने लगी है। गुरुवार को अपने फसल की बर्बादी न देख पाने पर दो किसानों की सदमे से मौत हो गई।
जिसमें पहली मौत सकलडीहा के पौरा गांव में तथा दूसरी मौत धानापुर क्षेत्र के कुसुम्ही गांव में किसान की हुई। जिले में इस तरह की पहली घटना है।
मौके पर राजस्व विभाग की टीम पहुंचकर रिपोर्ट तैयार करने में जुट गई।
गत दिनों हुई बारिश से चार एकड़ की फसल बर्बाद होने पर गुरुवार की भोर में सकलडीहा तहसील के पौरा गांव निवासी हरंवश पाठक (68) की सदमे से मौत हो गई।
सुबह लोगों ने उनको चारपाई पर मृत पाया। किसान पर सहकारी बैंक का 25 हजार रुपये कर्ज भी है। सकलडीहा के पौरा गांव के हरवंश पाठक की जीविका खेती बारी थी। उनकी चार एकड़ गेहूं की फसल बारिश से चौपट हो गई। बुधवार को पूरे दिन वे परिवारीजनों से बारिश से फसल के बर्बाद होने की चर्चा करते रहे। सहकारी बैंक के कर्ज को लेकर भी वे चिंतित रहते थे।
इसके पहले किसान ने काशी ग्रामीण बैंक से कर्ज पर ट्रैक्टर भी खरीदा था। खेती में लगातार हो रहे घाटे से बैंक का कर्ज चुका न पाने पर उन्हें चार विस्वा खेत बेचना पड़ा। हरवंश के चार बेटे हैं। एसडीएम सकलडीहा जितेन्द्र मोहन सिंह ने राजस्व विभाग की टीम को पौरा गांव भेजकर रिपोर्ट मांगी है।
उधर धानापुर थाना क्षेत्र के कुसुम्ही गॉव के किसान नगीना राम (65) की गुरुवार को अपने खेत में ही फसल को देखकर मौत हो गई। उन्होंने 6 बीघा खेत में गेहूं बोया था।
जिसमें प्रयोग की गई खाद, बीज, कीटनाशक दवाओं का भुगतान अभी नहीं हुआ। गुरुवार को खेत पर पहुचे नगीना राम ने जो बर्बादी देखी, तो कलेजे पर हाथ रखकर खेत में वहीं बैठ गये और मौत हो गई। लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर ले गये, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
ग्राम प्रधान पति श्यामनारायण कुशवाहा ने मृत किसान के घरवालों को 10 लाख की आर्थिक सहायता देने की शासन से मांग की है। नगीना को दो पुत्र एवं दो पुत्रियां है ।
दस लाख रुपये मुआवजा देनेे की मांग
सकलडीहा। पौरा गांव के मरे किसान को लेकर जिले में सियासत शुरू हो गयी है। विभिन्न दलों के नेताओं ने मृतक के परिवार को दस लाख मुआवजा देने की मांग की है।
भाजपा नेता हरवंश पटेल ने चंदौली को आपदा पीड़ित जिला घोषित करने की मांग की। वहीं सपा जिलाध्यक्ष सत्यनारायण राजभर व पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष जोखू सिद्की ने कहा है कि मृतक परिवार के लोगों की हर संभव मदद पहुंचाई जायेगी। उधर भाजपा जिलामंत्री संजय त्रिपाठी ने कहा कि किसानों के साथ प्रदेश सरकार मजाक कर रही है। सरकारी मुआवजे के नाम पर खानापूर्ति करने में जुुटी है।
13500 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा
सकलडीहा। बारिश से बर्बाद हुई फसलों को राजस्व विभाग की टीम द्वारा किसानों को सिर्फ 13 हजार पांच सौ रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा उपलब्ध कराया जायेगा।
तहसील क्षेत्र में बर्बाद फसल के लिए राजस्व विभाग की टीम ने मूल्यांकन करना शुरू कर दिया है। उपजिलाधिकारी सकलडीहा जितेन्द्र मोहन सिंह ने बताया कि बर्बाद फसल के लिए शासन ने मानक तय कर दिया है। मानकों के हिसाब से ही किसानों को फसलों का मुआवजा दिया जायेगा।
उधर किसानों का कहना है कि शासन स्तर से तय की गयी मुआवजे की रकम काफी कम है। इसे और बढ़ाने की जरूरत है। वहीं यह भी पता चला है कि शासन ने तो मानक तय कर दिया है। मगर किसानों को मुआवजा देेने के लिए धन नहीं आया है।