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Chandauli News: सार्वजनिक संस्थान और जनता के अधिकारों को खत्म करना चाहती हैं केंद्र सरकार

Thu, 10 Jul 2025 12:51 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 10 Jul 2025 12:51 AM IST
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The central government wants to abolish public institutions and the rights of the public
चंदौली। केंद्र सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी हड़ताल के समर्थन में बुधवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा वर्कर, रसोइया कर्मचारी, खेत श्रमिक, किसानों ने वामपंथी दलों के नेतृत्व में ब्लाॅक परिसर से जुलूस निकालकर धरना स्थल बिछिया पर आम सभा की। इस दौरान वक्ताओं ने श्रम संहिता कानून रद्द करने, बिजली का निजीकरण बंद करने, 200 यूनिट बिजली मुफ्त करने, मनरेगा में 200 दिन काम देने और 783 रुपये मजदूरी करने समेत अन्य मांगें पूरी करने की मांग की।
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वक्ताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के कार्पोरेट परस्त नीतियों के कारण शिक्षा, स्वास्थ्य, सार्वजनिक संस्थान और जनता के अधिकारों को खत्म कर रही है। इस दौरान नौजवान सभा के प्रांतीय सचिव गुलाब चंद, राजेश सचान, रामप्यारे यादव, जोखू बिंद आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता रामदुलार व संचालन ठाकुर प्रसाद ने किया। उधर, बैंक कर्मियों ने निजीकरण के विरोध में बैंकों को बंद कराया। हड़ताल के कारण बैंकों के ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं बैंक कर्मियों का कहना था कि सरकारी बैंकों के निजीकरण से आम जनता के हितों को नुकसान पहुंचेगा और बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होंगी। सरकार से मांग की कि अविलंब सरकारी बैंकों के निजीकरण का फैसला वापस लिया जाए। हड़ताल के कारण विभिन्न बैंकों में कामकाज ठप रहा। इसके चलते ग्राहकों को परेशान होना पड़ा।
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