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किशोरियों के अधिकार के लिए चलेगा अभियान
ब्यूरो/अमर उजाला, चंदौली
Updated Tue, 27 Oct 2015 01:26 AM IST
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घर के कार्यों, गरीबी और कम उम्र में विवाह होने के चलते गांव में रहने वाली किशोरियां स्कूल नहीं जा पाती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की अधिकांश किशोरियां शिक्षा से वंचित हैं।
ऐसे में समाज में व्याप्त कुरीतियों के विरूद्ध लड़ नहीं पाती हैं। यह बातें सोमवार को नगर स्थित कैंप कार्यालय पर आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान ग्राम्या संस्थान की बिंदू ने कहीं।
उन्होंने बताया कि किशोरियों के स्वास्थ्य और अधिकार को लेकर संस्था द्वारा मेरे सपने मेरी उड़ान अभियान चलाया जाएगा।
इसमें नक्सल क्षेत्र की किशोरियों को नुक्कड़ नाटक, गोष्ठी आदि गतिविधियों के माध्यम से जागरूक किया जाएगा। बताया कि वैसे तो यह अभियान पूरे प्रदेश में चलाया जा रहा है,
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लेकिन जनपद के 40 गांवों में अभियान को मूर्त रूप देते हुए किशोरियों को प्रशिक्षित करने की योजना है। संस्था की नीतू ने बताया कि किशोरियों में होने वाली माहवारी जैसी प्राकृतिक प्रक्रिया को लोग छुआछूत मानकर उनके साथ कई तरीके से भेदभाव करते हैं। गांवों में इसका प्रचलन कुछ अधिक ही है।
ऐसे में समाज में व्याप्त कुरीतियों के विरूद्ध लड़ नहीं पाती हैं। यह बातें सोमवार को नगर स्थित कैंप कार्यालय पर आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान ग्राम्या संस्थान की बिंदू ने कहीं।
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उन्होंने बताया कि किशोरियों के स्वास्थ्य और अधिकार को लेकर संस्था द्वारा मेरे सपने मेरी उड़ान अभियान चलाया जाएगा।
इसमें नक्सल क्षेत्र की किशोरियों को नुक्कड़ नाटक, गोष्ठी आदि गतिविधियों के माध्यम से जागरूक किया जाएगा। बताया कि वैसे तो यह अभियान पूरे प्रदेश में चलाया जा रहा है,
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लेकिन जनपद के 40 गांवों में अभियान को मूर्त रूप देते हुए किशोरियों को प्रशिक्षित करने की योजना है। संस्था की नीतू ने बताया कि किशोरियों में होने वाली माहवारी जैसी प्राकृतिक प्रक्रिया को लोग छुआछूत मानकर उनके साथ कई तरीके से भेदभाव करते हैं। गांवों में इसका प्रचलन कुछ अधिक ही है।