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Chandauli News: तीन दिन के बाद सपही जंगल में मिला मजदूर का शव
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चकिया। कोतवाली क्षेत्र के मुहम्मदाबाद-चकिया इलिया मार्ग पर उप सब्जी मंडी के सामने सपही जंगल में शेरपुर निवासी अरविंद प्रजापति (40) का शव बुधवार को संदिग्ध अवस्था में पड़ा मिला। शरीर पर कहीं भी चोट के निशान नहीं थे।
परिजनों के अनुसार 28 जुलाई को पेट में दर्द होने पर दवा खाकर अरविंद दोपहर में घर से निकले थे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मुहम्मदाबाद ग्राम पंचायत के शेरपुर निवासी स्वर्गीय भिखारी प्रजापति के तीन बेटों में अरविंद मझले बेटे थे। भाई अलग-अलग रहते हैं।
अरविंद मेहनत मजदूरी कर घर चलाते थे। सपही जंगल में कर्मनाशा नदी को जाने वाले रास्ते पर औंधे मुंह अरविंद का शव सुबह देखते ही इसकी चर्चा क्षेत्र में आग की तरह फैल गई। इसकी सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस, परिजन व बड़ी संख्या में बस्ती के लोग मौके पर पहुंच गए।
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अरविंद के शरीर पर चोट का कोई निशान नहीं था। मौके पर किसी विषैले जंतु के काटने की भी चर्चा होती रही। बड़े भाई विनोद प्रजापति ने बताया कि अरविंद की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। हालांकि बस्ती के ही कुछ लोगों के साथ जमीन के मसले पर कुछ मामूली विवाद था।
अरविंद की पत्नी प्रिया ने बिलखते हुए बताया कि वह 28 जुलाई की दोपहर पेट में दर्द होने पर दवा खाने के थोड़ी देर बाद मोबाइल घर पर छोड़कर निकले थे। देर रात तक नहीं लौटे तो परिवार के लोग कहीं मजदूरी करने गए होने की बात सोचकर रात में सो गए। दूसरे दिन नहीं लौटे तो रिश्तेदारी नातेदारी में फोन कर जानकारी हासिल करना आरंभ कर दिया गया। लेकिन कोई पता नहीं चला। तीसरे दिन बुधवार को अरविंद का शव घर से मात्र एक किलोमीटर की दूर सपही जंगल में मिला।
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परिजनों के अनुसार 28 जुलाई को पेट में दर्द होने पर दवा खाकर अरविंद दोपहर में घर से निकले थे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मुहम्मदाबाद ग्राम पंचायत के शेरपुर निवासी स्वर्गीय भिखारी प्रजापति के तीन बेटों में अरविंद मझले बेटे थे। भाई अलग-अलग रहते हैं।
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अरविंद मेहनत मजदूरी कर घर चलाते थे। सपही जंगल में कर्मनाशा नदी को जाने वाले रास्ते पर औंधे मुंह अरविंद का शव सुबह देखते ही इसकी चर्चा क्षेत्र में आग की तरह फैल गई। इसकी सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस, परिजन व बड़ी संख्या में बस्ती के लोग मौके पर पहुंच गए।
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अरविंद के शरीर पर चोट का कोई निशान नहीं था। मौके पर किसी विषैले जंतु के काटने की भी चर्चा होती रही। बड़े भाई विनोद प्रजापति ने बताया कि अरविंद की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। हालांकि बस्ती के ही कुछ लोगों के साथ जमीन के मसले पर कुछ मामूली विवाद था।
अरविंद की पत्नी प्रिया ने बिलखते हुए बताया कि वह 28 जुलाई की दोपहर पेट में दर्द होने पर दवा खाने के थोड़ी देर बाद मोबाइल घर पर छोड़कर निकले थे। देर रात तक नहीं लौटे तो परिवार के लोग कहीं मजदूरी करने गए होने की बात सोचकर रात में सो गए। दूसरे दिन नहीं लौटे तो रिश्तेदारी नातेदारी में फोन कर जानकारी हासिल करना आरंभ कर दिया गया। लेकिन कोई पता नहीं चला। तीसरे दिन बुधवार को अरविंद का शव घर से मात्र एक किलोमीटर की दूर सपही जंगल में मिला।