कृषि विज्ञान केंद्र के प्रक्षेत्र पर शुक्रवार को ड्रोन के माध्यम से दवाओं के छिड़काव का परीक्षण किया गया। ड्रोन से अरहर की फसल पर कीटनाशक का छिड़काव कर कृषि वैज्ञानिकों ने स्थिति को देखा। इसमें सबकुछ सही मिला। इस पर कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से इस तकनीक के उपयोग का आह्वान किया। कहा कि यह तकनीकी किसानों के लिए वरदान साबित होगा। इस दौरान केंद्र के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि ड्रोन से 10 से 15 मिनट में किसी भी कीटनाशक फफूंदी नाशक एवं घुलनशील उर्वरक का स्प्रे एक एकड़ खेत में किया जा सकता है। इससे समय एवं पानी दोनों की बचत होती है। केला, अरहर, सरसों एवं पपीता जैसी ऊंची फसलों के लिए तो यह तकनीक काफी लाभकारी है। इन फसलों में सामान्य स्प्रे में दवा का छिड़काव करना मुश्किल हो जाता है। केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अभयदीप गौतम ने कहा कि ड्रोन को एक बार चार्ज करने पर तीन से चार एकड़ में दवा का छिड़काव किया जा सकता है। इससे गीले खेत में भी बिना खेत में उतरे दवा का छिड़काव हो सकता है। केंद्र के वैज्ञानिक रितेश सिंह गंगवार ने किसानों को दवा एवं उर्वरकों का घोल बनाने की विधि बताई।
इस मौके पर वैज्ञानिक डॉ. दिनेश यादव, डॉ. हनुमान प्रसाद पांडेय, प्रक्षेत्र प्रबंधक अविनाश वर्मा, जिला कृषि अधिकारी वसंत कुमार दुबे, इंजीनियर मान सिंह आदि उपस्थित रहे।