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स्कूली बच्चों ने देखा भारत कला भवन
ब्यूरो/अमर उजाला, चंदौली
Updated Fri, 04 Sep 2015 01:52 AM IST
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दुलहीपुर स्थित सनबीम स्कूल के 11 वीं व 12 वीं के बच्चों ने गुरुवार को बीएचयू स्थित भारत कला भवन को देखा।
इस दौरान कला भवन के डायरेक्टर प्रोफेसर अजय कुमार सिंह ने बच्चों को भवन में उपलब्ध संग्रहों की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि कला जीवन की अभिव्यक्ति है।
इस तरह कला मानव की कल्पनाशीलता का मूर्त रूप है। उन्होंने छात्रों को कला भवन एवं विविध कलाओं से जूड़ी अनेक बारीकियों से परिचित कराया। बताया कि भारत कला भवन की स्थापना एक जनवरी 1920 में रामकृष्ण दास एवं पंडित मदन मोहन मालवीय ने कला एवं पुरातत्व के विकास एवं संरक्षण के लिए की थी।
बीएचयू के प्रांगण में स्थित संग्रहालय की देश विदेश में अपनी साख है। छात्रों ने यहां सहेज कर रखे कला एवं संस्कृति से जूड़ेे असंख्य धरोहरों का गहन अवलोकन किया। संग्रहालय में बौद्ध, हिंदू, जैन एवं मुस्लिम कलाओं एवं वास्तु-कौशलों की छात्रों ने खूब सराहना की।
वे इसके प्रति काफी उत्साहित भी नजर आए। छात्रों ने बताया कि 270 ईसा पूर्व से लेकर वर्तमान समय तक की अनेक कलाकृतियां इस संग्रहालय में संग्रहीत हैं और उन्हें इससे काफी कुछ सीखने को मिला।
विशेष कर मुगलकालीन, राजस्थानी, पहाड़ी, चित्रकला, आभूषण एवं वस्त्र निर्माण से संबंधित वस्तुओं ने आकर्षित किया।
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इस दौरान कला भवन के डायरेक्टर प्रोफेसर अजय कुमार सिंह ने बच्चों को भवन में उपलब्ध संग्रहों की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि कला जीवन की अभिव्यक्ति है।
इस तरह कला मानव की कल्पनाशीलता का मूर्त रूप है। उन्होंने छात्रों को कला भवन एवं विविध कलाओं से जूड़ी अनेक बारीकियों से परिचित कराया। बताया कि भारत कला भवन की स्थापना एक जनवरी 1920 में रामकृष्ण दास एवं पंडित मदन मोहन मालवीय ने कला एवं पुरातत्व के विकास एवं संरक्षण के लिए की थी।
बीएचयू के प्रांगण में स्थित संग्रहालय की देश विदेश में अपनी साख है। छात्रों ने यहां सहेज कर रखे कला एवं संस्कृति से जूड़ेे असंख्य धरोहरों का गहन अवलोकन किया। संग्रहालय में बौद्ध, हिंदू, जैन एवं मुस्लिम कलाओं एवं वास्तु-कौशलों की छात्रों ने खूब सराहना की।
वे इसके प्रति काफी उत्साहित भी नजर आए। छात्रों ने बताया कि 270 ईसा पूर्व से लेकर वर्तमान समय तक की अनेक कलाकृतियां इस संग्रहालय में संग्रहीत हैं और उन्हें इससे काफी कुछ सीखने को मिला।
विशेष कर मुगलकालीन, राजस्थानी, पहाड़ी, चित्रकला, आभूषण एवं वस्त्र निर्माण से संबंधित वस्तुओं ने आकर्षित किया।