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Chandauli News: विद्यालयों में जीएसटी लागू होने से पहले बने फर्जी बिलों से करोड़ों का घोटाला
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पूर्व माध्यमिक विद्यालय भोगवार की ओर से फर्म को 17 नवंबर 2013 को दी गई भुगतान की रसीद साथ में ऊ
नियामताबाद(चंदाैली)। नियामताबाद विकास खंड के कई विद्यालयों में वर्ष 2013 से 2017 के बीच बच्चों के ड्रेस खरीद में जीएसटी नंबर अंकित फर्जी बिलों के माध्यम से लाखों रुपये का भुगतान किया गया। जबकि उस समय जीएसटी लागू नहीं हुआ था। यह खुलासा जनसूचना के अधिकार के तहत मांगी जानकारी से हुआ है।
वाराणसी के सामाजिक कार्यकर्ता सत्येंद्र सिंह ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत वर्ष 2014 से 2022 तक छह विद्यालयों से बच्चों के ड्रेस और ड्रेस खरीद से संबंधित बिल, वाउचर और वितरण पंजिका की जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने जो दस्तावेज उपलब्ध कराए, उनमें कई अनियमितताएं सामने आईं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कंपोजिट विद्यालय भोगवार द्वारा वर्ष 2017 के पहले के बिलों में भी अभिषेक इंटरप्राइजेज नामक फर्म का जीएसटी नंबर अंकित था, जबकि उस अवधि में देश में जीएसटी अस्तित्व में ही नहीं था। इससे यह स्पष्ट होता है कि फर्जी बिल तैयार कर वित्तीय गबन किया गया।
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फर्जी फर्मों से हुआ करोड़ों का भुगतान
आरटीआई के माध्यम से पता चला कि एक ही व्यक्ति ने अपने परिजनों के नाम से एक ही पते पर छह फर्में बनाई थीं। इनमें से अधिकांश फर्में ड्रेस और ड्रेस की आपूर्ति के नाम पर भुगतान लेती रहीं। दस्तावेजों में केवल अभिषेक इंटरप्राइजेज का जीएसटी नंबर मान्य पाया गया, जो मात्र नवंबर 2017 से दिसंबर 2018 तक वैध था।
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फिर भी, वर्ष 2014 से 2017 के बीच अभिषेक इंटरप्राइजेज और अंजना जायसवाल नामक फर्म को लाखों रुपये का भुगतान किया गया। इन फर्मों के बैंक खातों से राजकुमार जायसवाल नामक व्यक्ति ने सैकड़ों बार छोटे-छोटे हिस्सों में कैश निकासी की।
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रिकॉर्ड गायब बताकर लीपापोती की कोशिश
घोटाले को छिपाने के लिए कई विद्यालयों ने अपने वित्तीय दस्तावेज गुम या चोरी हो जाने का बहाना बना लिया। इनमें क्रमशः प्राथमिक विद्यालय कबीरपुर, कटेरिया, कटेसर द्वितीय, पूर्व माध्यमिक विद्यालय भरछा और प्राथमिक विद्यालय भरछा शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इन विद्यालयों ने भी अभिषेक इंटरप्राइजेज और अंजना जायसवाल की फर्मों को भुगतान किया था।
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विभागीय अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप
आवेदक सत्येंद्र सिंह का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की जानकारी में होने के बावजूद अब तक किसी प्रधानाध्यापक या जिम्मेदार अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि वे इस पूरे प्रकरण को लेकर माननीय न्यायालय में पीआईएल दाखिल करने और भ्रष्ट प्रधानाध्यापकों व अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं।
कोट-- -
यह मामला हमारे कार्यकाल से पहले का है। इस पर कार्रवाई का अधिकार जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी स्तर पर है।-मनोज कुमार यादव, सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी, नियामताबाद
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नोट-- -
बेसिक शिक्षा अधिकारी का फोन नहीं उठा है, बात होने पर उनका वर्जन अगली फाइल में दिया जाएगा।
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वाराणसी के सामाजिक कार्यकर्ता सत्येंद्र सिंह ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत वर्ष 2014 से 2022 तक छह विद्यालयों से बच्चों के ड्रेस और ड्रेस खरीद से संबंधित बिल, वाउचर और वितरण पंजिका की जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने जो दस्तावेज उपलब्ध कराए, उनमें कई अनियमितताएं सामने आईं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कंपोजिट विद्यालय भोगवार द्वारा वर्ष 2017 के पहले के बिलों में भी अभिषेक इंटरप्राइजेज नामक फर्म का जीएसटी नंबर अंकित था, जबकि उस अवधि में देश में जीएसटी अस्तित्व में ही नहीं था। इससे यह स्पष्ट होता है कि फर्जी बिल तैयार कर वित्तीय गबन किया गया।
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फर्जी फर्मों से हुआ करोड़ों का भुगतान
आरटीआई के माध्यम से पता चला कि एक ही व्यक्ति ने अपने परिजनों के नाम से एक ही पते पर छह फर्में बनाई थीं। इनमें से अधिकांश फर्में ड्रेस और ड्रेस की आपूर्ति के नाम पर भुगतान लेती रहीं। दस्तावेजों में केवल अभिषेक इंटरप्राइजेज का जीएसटी नंबर मान्य पाया गया, जो मात्र नवंबर 2017 से दिसंबर 2018 तक वैध था।
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फिर भी, वर्ष 2014 से 2017 के बीच अभिषेक इंटरप्राइजेज और अंजना जायसवाल नामक फर्म को लाखों रुपये का भुगतान किया गया। इन फर्मों के बैंक खातों से राजकुमार जायसवाल नामक व्यक्ति ने सैकड़ों बार छोटे-छोटे हिस्सों में कैश निकासी की।
रिकॉर्ड गायब बताकर लीपापोती की कोशिश
घोटाले को छिपाने के लिए कई विद्यालयों ने अपने वित्तीय दस्तावेज गुम या चोरी हो जाने का बहाना बना लिया। इनमें क्रमशः प्राथमिक विद्यालय कबीरपुर, कटेरिया, कटेसर द्वितीय, पूर्व माध्यमिक विद्यालय भरछा और प्राथमिक विद्यालय भरछा शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इन विद्यालयों ने भी अभिषेक इंटरप्राइजेज और अंजना जायसवाल की फर्मों को भुगतान किया था।
विभागीय अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप
आवेदक सत्येंद्र सिंह का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की जानकारी में होने के बावजूद अब तक किसी प्रधानाध्यापक या जिम्मेदार अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि वे इस पूरे प्रकरण को लेकर माननीय न्यायालय में पीआईएल दाखिल करने और भ्रष्ट प्रधानाध्यापकों व अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं।
कोट
यह मामला हमारे कार्यकाल से पहले का है। इस पर कार्रवाई का अधिकार जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी स्तर पर है।-मनोज कुमार यादव, सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी, नियामताबाद
नोट
बेसिक शिक्षा अधिकारी का फोन नहीं उठा है, बात होने पर उनका वर्जन अगली फाइल में दिया जाएगा।