फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Chandauli News ›   Sanjay Singh created a riot in the fields, celebrated in the village after reaching the top of wrestling

Wrestling Federation Of India: संजय ने खेतों में कराया दंगल, कुश्ती के शीर्ष पर पहुंचने पर गांव में मना उत्सव

Fri, 22 Dec 2023 09:23 AM IST
किरन रौतेला अमरेंद्र पांडेय, अमर उजाला, चंदौली
अमरेंद्र पांडेय, अमर उजाला, चंदौली Published by: किरन रौतेला Updated Fri, 22 Dec 2023 09:23 AM IST
सार

झांसी गांव के निवासी स्व.नंदलाल सिंह के छोटे पुत्र संजय सिंह का पांच वर्ष की आयु से ही कुश्ती से परिचय हो गया। संजय के पिता और दादा गांव में दंगल आयोजित कराते थे। इस वजह से संजय का लगाव बचपन से ही कुश्ती से रहा है। ग्रामीण परिवेश के साथ ही मजबूत आर्थिक आधार होने के कारण खेतों में अखाड़ा बनवाकर कुश्ती लड़वाने की परंपरा की शुरुआत उनके बचपन में ही हुई।

विज्ञापन
Sanjay Singh created a riot in the fields, celebrated in the village after reaching the top of wrestling
भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण सिंह के साथ नवनियुक्त कुश्ती संघ के अध्यक्ष संजय सिंह। - फोटो : संवाद

विस्तार

भारतीय कुश्ती संघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष संजय सिंह मूल रूप से चंदौली के झांसी गांव के रहने वाले हैं। संजय सिंह ने गांव के खेत-खलिहान में अखाड़े तैयार कराकर दंगल से शुरुआत की थी। गुरुवार को जब वे कुश्ती के शीर्ष पद पर निर्वाचित हुए तो पूरा गांव मारे खुशी के झूम उठा। उनके घर के बाहर आतिशबाजी की गई। लोगों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की।

विज्ञापन

झांसी गांव के निवासी स्व.नंदलाल सिंह के छोटे पुत्र संजय सिंह का पांच वर्ष की आयु से ही कुश्ती से परिचय हो गया। संजय के पिता और दादा गांव में दंगल आयोजित कराते थे। इस वजह से संजय का लगाव बचपन से ही कुश्ती से रहा है। ग्रामीण परिवेश के साथ ही मजबूत आर्थिक आधार होने के कारण खेतों में अखाड़ा बनवाकर कुश्ती लड़वाने की परंपरा की शुरुआत उनके बचपन में ही हुई। बचपन से जब पहलवानों के बीच यह रहकर बड़े होने लगे तो संजय का रुझान इस तरफ ज्यादा आने लगा। संजय सिंह जब 15 वर्ष के थे तभी गांव से वाराणसी रहने लगे। उनके पिता सिपाही थे। संजय सिंह की शिक्षा वाराणसी में हुई। काशी हिंदू विश्वविद्यालय से उन्होंने बीएड और एलएलबी की पढ़ाई पूरी की और उसके बाद का जीवन कुश्ती और पहलवानों को समर्पित कर दिया। सक्रियता की वजह से संजय सिंह वर्ष 2008 में वाराणसी कुश्ती संघ के जिलाध्यक्ष बने थे। उसके बाद जब यूपी में साल 2009 में कुश्ती संघ बना तो बृजभूषण शरण सिंह प्रदेश अध्यक्ष बने थे और संजय को उपाध्यक्ष चुना गया। वर्तमान में वाराणसी के दुर्गाकुंड क्षेत्र में घर बनवाकर रहते हैं। बृहस्पतिवार को जैसे ही गांव के लोगों को उनके अध्यक्ष बनने की सूचना मिली पूरा गांव में जश्न में डूब गया। आतिशबाजी और मिठाई खिलाकर खुशी के साथ लोगों ने एक दूसरे को बधाई दी।

विज्ञापन

20 दिन पहले खेती देखने आए थे गांव, ईमानदारी का मिला इनाम

झांसी गांव के ग्राम प्रधान आलोक सिंह ने बताया कि संजय सिंह 20 दिन पहले गांव में अपनी खेती देखने के लिए आए थे। बताया कि वे भले कहीं हो गांव की मिट्टी से पूरी तरह जुड़े रहते हैं। गांव में खेती भी कराई है जिसका समय-समय पर आकर निरीक्षण भी करते हैं। गांव के लोगों से मिलते हैं तो उसी भाव से जैसे पिछले 20 वर्ष पहले मिलते थे। कहा कि उनकी ईमानदारी, स्वच्छ छवि और वफादारी का इनाम मिला है। आज मुझे बेहद खुशी हो रही है कि उन पर इतना विश्वास जता कर भारतीय कुश्ती संघ की कमान सौंपी गई है। गांव ही नहीं पूरे जिले का नाम रोशन किया है। जल्द गांव में आएंगे उनका धूमधाम से स्वागत किया जाएगा।संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन

पहली बार बनारस की कुश्ती में महिलाओं को उतारने का श्रेय

बनारस में होनी वाले दंगल और कुश्ती प्रतियोगिता में पहली बार महिलाओं को उतारने का श्रेय संजय सिंह को ही जाता है। संजय सिंह 2008 में वाराणसी कुश्ती संघ के जिला अध्यक्ष बनाए गए थे। बृजभूषण के करीबी होने का फायदा उन्हें पूरी तरह से मिला और कुश्ती में पहली बार बनारस में महिलाओं को अखाड़े में उतारा और प्रोत्साहित किया। महिला कुश्ती को लेकर वाराणसी में उन्होंने कई बड़े आयोजन भी कराए। उनके बेहद करीबी और वाराणसी कुश्ती संघ के उपाध्यक्ष राजीव सिंह रानू ने बताया कि बनारस में एक के बाद एक छह बड़ी प्रतियोगिता करवाने का श्रेय भी संजय सिंह को ही गया। संजय सिंह ने ही प्रयास करके 2017 में पहली बार अंडर 17 कुश्ती बनारस में करवाई, जिसमें बृजभूषण शामिल होने भी पहुंचे थे।.

जन्मदिन पर 10 वर्षों से 12 महिला पहलवानों को गोद लेते और उठाते हैं पूरा खर्च

वाराणसी कुश्ती संघ के उपाध्यक्ष राजीव सिंह रानू संजय ने बताया कि संजय सिंह गांव की मिट्टी से जुड़े हुए हैं। गांव के लोगों को पहलवानी की तरफ आकर्षित करने में संजय सिंह बड़ी भूमिका निभाते रहे हैं। बताया कि हर वर्ष अपने जन्मदिन पर संजय सिंह 12 महिला पहलवानों को गोद लेते हैं। इसके बाद उनकी डाइट से लेकर उनके हर खर्च को वह पूरे साल उठाते हैं। फिर अगले जन्मदिन पर जो 12 महिला पहलवानों में से सही से ईमानदारी से प्रैक्टिस करके देश के लिए मेडल लाने की तैयारी कर रही होती हैं, उन्हें आगे बढ़ाते हैं नहीं तो उस लिस्ट में कुछ नई महिला पहलवानों को जोड़ा जाता है। यह कार्य भी लगभग 10 वर्ष से ज्यादा वक्त से किया जा रहा है।

चुनाव में अंतराष्ट्रीय पहलवान को दी पटखनी

भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष पद के चुनाव में संजय सिंह के सामने अंतरराष्ट्रीय पहलवान अनीता श्योराण ने चुनाव लड़ा। अनीता कुश्ती के मैदान में भी बड़ी सफलता हासिल कर चुकी हैं, उन्होंने 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता है। लेकिन अध्यक्ष पद की चुनाव में संजय सिंह उनके बड़े पहलवान निकले और जीत दर्ज कर उनको मात दी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed