जिले में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच थर्मल स्कैनर की खरीद में घोटाला, डीएम ने बैठाई जांच
- उपनिदेशक पंचायत ने तीन कर्मचारियों पर जताया संदेह
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चंदौली जिले में एक तरफ जहां कोरोना संक्रमण तेजी से पांव पसार रहा है तो वहीं दूसरी तरफ थर्मल स्कैनर की खरीद में घोटाले का मामला सामने आया है। गांवों में लोगों के स्वास्थ्य की जांच करने के लिए निगरानी समिति के लिए खरीदे गए थर्मल स्कैनर में वित्तीय अनियमितता की आशंका जताई गई है।
वाराणसी उपनिदेशक पंचायत एके सिंह ने डीएम को पत्र भेजकर मामले की जांच कराने का निर्देश दिया। साथ ही, उन्होंने डीपीआरओ कार्यालय में तैनात लेखाकार, अपर पंचायतीराज अधिकारी सहित सभी एडीओ पंचायत के मिलीभगत करके एक ही फर्म से स्कैनर खरीदने पर संदेह जताया है। जांच के लिए डीएम ने तीन सदस्यीय टीम बनाकर दस दिनों में जांच रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
बता दें कि थर्मल स्कैनर खरीदने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को सौंपी गई थी। पंचायत राज विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की ओर से एक ही कंपनी से थर्मल स्कैनर व पल्स आक्सीमीटर खरीदा गया है। इसके बदले निर्धारित से अधिक कीमत चुकाई गई। उपनिदेशक पंचायत वाराणसी एके सिंह ने मामले का खुद संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल से जांच कराने का आग्रह किया है।
पत्र में उन्होंने कहा है कि अपर जिला पंचायत राज अधिकारी रामउदय यादव, वरिष्ठ लेखा लिपिक राजेश सोनकर, ब्लाकों के सहायक विकास अधिकारी व खंड विकास अधिकारियों ने कंपनी के साथ मिलीभगत कर संसाधनों की खरीद में अनियमितता की है।
निगरानी समितियों के लिए थर्मल स्कैनर खरीदने में वित्तीय अनियमितता की उपनिदेशक पंचायत ने आशंका जताई है। प्रकरण की जांच करने के लिए तीन अधिकारियों की कमेटी बनाई गई है। कमेटी में शामिल अफसरों को दस दिनों में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। - नवनीत सिंह चहल, जिलाधिकारी।