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योग के महत्व को बताया
ब्यूरो/अमर उजाला, चंदौली
Updated Fri, 08 Jan 2016 01:30 AM IST
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जीयर स्वामी महाराज ने महाभारत की कथा के माध्यम से योग के महत्व को
समझाया।
कहा कि अप्राप्त वस्तु को प्राप्त करना ही योग है। इसके पूर्व त्रिदंडी स्वामी की जय जयकार से वातावरण भक्तिमय बना रहा। उन्होंने लोगों को संस्कारिक होने का भी ज्ञान दिया।
महाराज ने कहा कि सत्य, संस्कार, आचरण की शूद्धता का ह्रास होने से ही समाज में बिखराव हो रहा है। कहा कि सही समय पर सही बात न कहने से दुविधा होती है और इससे स्थितियां बिगड़ती है।
महाभारत कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान इंद्र व कृष्ण द्वारा मैनार के सहयोग से पांडवों के लिए सभा का नर्माण कराया गया। जब सभा मंडप को देखने के लिए दुर्योधन पहुंचा और जल थल का आभास न होने पर द्रौपदी ने उसका उपहास उड़ाया तो महाभारत हो गया। स्वामी जी ने कहा कि महाभारत में न्याय अन्याय का युद्ध हुआ।
शकुनी ने झूठ और फरेब के बल पर पूरे महाभारत की नीव रची और पांडवों का समूल नष्ट करने की कोशिश की गई। वहीं प्रभु श्री कृष्ण ने मात्र पांच पांडवों के साथ पूरे महाभारत में नैतिकता, आचरणका मानक बनाया।
, निस्वार्थ की भावना रखते हुए यूद्ध में विजय हासिल की। आज समाज में अगुआ पथभ्रष्ट हो रहा है। सत्य, संस्कृति, आचरण का ह्रास हो रहा है। इससे सृष्टि का संतुलन बिगड़ता जा रहा है। कहा कि महाभारत से सीख मिलती है कि सत्य बात को भी समय देख कर कहना चाहिए।
कहा कि अप्राप्त वस्तु को प्राप्त करना ही योग है। इसके पूर्व त्रिदंडी स्वामी की जय जयकार से वातावरण भक्तिमय बना रहा। उन्होंने लोगों को संस्कारिक होने का भी ज्ञान दिया।
महाराज ने कहा कि सत्य, संस्कार, आचरण की शूद्धता का ह्रास होने से ही समाज में बिखराव हो रहा है। कहा कि सही समय पर सही बात न कहने से दुविधा होती है और इससे स्थितियां बिगड़ती है।
महाभारत कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान इंद्र व कृष्ण द्वारा मैनार के सहयोग से पांडवों के लिए सभा का नर्माण कराया गया। जब सभा मंडप को देखने के लिए दुर्योधन पहुंचा और जल थल का आभास न होने पर द्रौपदी ने उसका उपहास उड़ाया तो महाभारत हो गया। स्वामी जी ने कहा कि महाभारत में न्याय अन्याय का युद्ध हुआ।
शकुनी ने झूठ और फरेब के बल पर पूरे महाभारत की नीव रची और पांडवों का समूल नष्ट करने की कोशिश की गई। वहीं प्रभु श्री कृष्ण ने मात्र पांच पांडवों के साथ पूरे महाभारत में नैतिकता, आचरणका मानक बनाया।
, निस्वार्थ की भावना रखते हुए यूद्ध में विजय हासिल की। आज समाज में अगुआ पथभ्रष्ट हो रहा है। सत्य, संस्कृति, आचरण का ह्रास हो रहा है। इससे सृष्टि का संतुलन बिगड़ता जा रहा है। कहा कि महाभारत से सीख मिलती है कि सत्य बात को भी समय देख कर कहना चाहिए।