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विधि विधान से हुई परशुराम जी की पूजा
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पीडीडीयू नगर के कैलाशपुरी में पशुराम जयंती मनाते लोग।
- फोटो : CHANDAULI
पीडीडीयू नगर। भगवान विष्णु के अवतार भगवान परशुराम की जयंती शनिवार को पूजन अर्चन के साथ मनाया गया। लॉक डाउन की वजह से लोग एकत्र नहीं हुए और सामूहिक पूजन नहीं हुआ। ब्राह्मण समाज और ब्रम्हर्षि समाज के लोगों ने घर पर भगवान की पूजा अर्चना की। लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखते हुए पूजन अर्चन किया। इस मौके पर हुई गोष्ठी में भगवान परशुराम के कृत्यों पर चर्चा की गई।
ब्रह्मर्षि समाज की ओर से नगर के कैलाशपुरी स्थित संजय राय के आवास पर विधि विधान से भगवान परशुराम की पूजा अर्चना की गई। इस मौके पर समाज के अध्यक्ष शिवगेेविंद राय ने कहा कि भगवान परशुरामजी समकालीन दिग्भ्रमित समाज मे अपने तपोबल ओर पराक्रम से समता ओर न्याय की स्थापना करने वाले हैं। भगवान परशुराम का जीवन अत्यंत प्रेरणादायी और अनुकरणीय है। इनके बारे में कहा जाता है कि एक बार भगवान शंकर से मिलने अंत: पुर में प्रवेश करने लगे तभी भगवान गणेश ने उन्हें रोक दिया। इस पर आक्रोशित होकर उन्होंने अपने फरसे से भगवान गणेश का एक दांत काट दिया। बाद में भगवान परशुराम की भव्य आरती उतारी गई। इस मौके पर संजय राय और अजय राय रहे। ब्राह्मण हितकारिणी के अध्यक्ष श्याम नगीना मिश्र ने कैलाशपुरी स्थित अपने आवास पर विधि विधान से मंत्रोच्चार के बीच भगवान परशुराम की पूजा अर्चना की और आरती उतारी।
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नगर के ब्राह्मण समाज के लोगों ने भगवान परशुराम की जयंती पर पूजन अर्चन के बाद पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दोहराया। इस मौके पर हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि विप्र कुलभूषण भगवान परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार है। भगवान परशुराम जमदग्नि मुनि ने सत्यवती के गर्भ से जन्म लिया। इनका विवाह रेणुका से हुआ जमदग्नि के चार पुत्र थे, परशुराम चौथे पुत्र थे। अक्षय तृतीया को ही नर नारायण और परशुराम के अवतरण से संबंध होने से यह पर्व राष्ट्रीय शासन व्यवस्था के लिए भी अविस्मरण है। परशु धारण करने से इनका नाम परशुराम पड़ गया। इस मौके पर पं. संतोष कुमार तिवारी, बंटी कुमार मिश्र, दीपक दुबे, रोहित पांडेय, विक्की तिवारी, नवीन पांडेय रहे।
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ब्रह्मर्षि समाज की ओर से नगर के कैलाशपुरी स्थित संजय राय के आवास पर विधि विधान से भगवान परशुराम की पूजा अर्चना की गई। इस मौके पर समाज के अध्यक्ष शिवगेेविंद राय ने कहा कि भगवान परशुरामजी समकालीन दिग्भ्रमित समाज मे अपने तपोबल ओर पराक्रम से समता ओर न्याय की स्थापना करने वाले हैं। भगवान परशुराम का जीवन अत्यंत प्रेरणादायी और अनुकरणीय है। इनके बारे में कहा जाता है कि एक बार भगवान शंकर से मिलने अंत: पुर में प्रवेश करने लगे तभी भगवान गणेश ने उन्हें रोक दिया। इस पर आक्रोशित होकर उन्होंने अपने फरसे से भगवान गणेश का एक दांत काट दिया। बाद में भगवान परशुराम की भव्य आरती उतारी गई। इस मौके पर संजय राय और अजय राय रहे। ब्राह्मण हितकारिणी के अध्यक्ष श्याम नगीना मिश्र ने कैलाशपुरी स्थित अपने आवास पर विधि विधान से मंत्रोच्चार के बीच भगवान परशुराम की पूजा अर्चना की और आरती उतारी।
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नगर के ब्राह्मण समाज के लोगों ने भगवान परशुराम की जयंती पर पूजन अर्चन के बाद पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दोहराया। इस मौके पर हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि विप्र कुलभूषण भगवान परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार है। भगवान परशुराम जमदग्नि मुनि ने सत्यवती के गर्भ से जन्म लिया। इनका विवाह रेणुका से हुआ जमदग्नि के चार पुत्र थे, परशुराम चौथे पुत्र थे। अक्षय तृतीया को ही नर नारायण और परशुराम के अवतरण से संबंध होने से यह पर्व राष्ट्रीय शासन व्यवस्था के लिए भी अविस्मरण है। परशु धारण करने से इनका नाम परशुराम पड़ गया। इस मौके पर पं. संतोष कुमार तिवारी, बंटी कुमार मिश्र, दीपक दुबे, रोहित पांडेय, विक्की तिवारी, नवीन पांडेय रहे।