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स्कूली बसों की फिटनेस नहीं
चंदौली ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Fri, 20 Jan 2017 01:19 AM IST
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स्कूली बसों में मानक का ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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एटा जिले के अलीगंज में हुई स्कूली बस दुर्घटना के बाद भी स्कूल प्रबंध तंत्र बच्चों को बसों में ठूंसकर ले जा रहे हैं। बच्चों को स्कूल भेजने के बाद जब तक बच्चे सुरक्षित घर नहीं पहुंच जाते अभिभावक लगातार चिंतित रहते हैं।
अभिभावकों का कहना है कि अधिकतर स्कूली वाहन खटारा हैं और क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर ले जाते हैं जबकि शुल्क में कोई कटौती नहीं की जाती। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो अधिकांश स्कूूली बसों की फिटनेस और इंश्योरेंस सही नहीं है। ऐसे में दुर्घटना होने पर कौन जिम्मेदार होगा यक्ष प्रश्न बनकर रह गया है।
जनपद में जूनियर हाईस्कूल स्तर के लगभग तीन सौ विद्यालय संचालित होते हैं। सूत्रों की मानें तो विद्यार्थियों को घर से स्कूलों तक ले आने और ले जाने के लिए विद्यालयों की ओर से कुल 418 वाहनों का एआरटीओ कार्यालय में पंजीकरण कराया गया है जबकि सूत्रों पर भरोसा करें तो छह सौ से अधिक बस और छोटे वाहन स्कूलों में चल रहे हैं। अधिकांश स्कूली बसों में तीस बच्चों को बैठाने की बजाए स्कूल प्रशासन चालीस से अधिक बच्चों को बैठाकर स्कूल ले जाते हैं। पिछले छह माह में जनपद में स्कूली वाहनों के पलटने की तीन घटनाएं हो चुकी हैं। संयोग रहा कि सभी सुरक्षित रहे। कुल आठ बच्चों को हल्की चोटें आईं जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने छोड़ दिया। अभिभावकों की तरफ से कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराए जाने से मामला दबा का दबा रह गया। अक्तूबर में बबुरी क्षेत्र के चोरमरवा गांव के समीप बच्चों को स्कूल ले जा रही एक निजी स्कूल की बस पलट गई जिसमें तीन बच्चे घायल हुए थे। इसी प्रकार नवंबर में चहनियां के भूपौली में भी निजी स्कूल की बस पलटने से दो बच्चे घायल हो गए थे। बीते 18 जनवरी को सैयदराजा के वन विभाग के समीप निजी स्कूल की मैजिक पलटने से एक शिक्षिका और दो बच्चे घायल हो गए। एक को जिला चिकित्सालय भेज दिया गया था।
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अभिभावकों का कहना है कि अधिकतर स्कूली वाहन खटारा हैं और क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर ले जाते हैं जबकि शुल्क में कोई कटौती नहीं की जाती। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो अधिकांश स्कूूली बसों की फिटनेस और इंश्योरेंस सही नहीं है। ऐसे में दुर्घटना होने पर कौन जिम्मेदार होगा यक्ष प्रश्न बनकर रह गया है।
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जनपद में जूनियर हाईस्कूल स्तर के लगभग तीन सौ विद्यालय संचालित होते हैं। सूत्रों की मानें तो विद्यार्थियों को घर से स्कूलों तक ले आने और ले जाने के लिए विद्यालयों की ओर से कुल 418 वाहनों का एआरटीओ कार्यालय में पंजीकरण कराया गया है जबकि सूत्रों पर भरोसा करें तो छह सौ से अधिक बस और छोटे वाहन स्कूलों में चल रहे हैं। अधिकांश स्कूली बसों में तीस बच्चों को बैठाने की बजाए स्कूल प्रशासन चालीस से अधिक बच्चों को बैठाकर स्कूल ले जाते हैं। पिछले छह माह में जनपद में स्कूली वाहनों के पलटने की तीन घटनाएं हो चुकी हैं। संयोग रहा कि सभी सुरक्षित रहे। कुल आठ बच्चों को हल्की चोटें आईं जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने छोड़ दिया। अभिभावकों की तरफ से कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराए जाने से मामला दबा का दबा रह गया। अक्तूबर में बबुरी क्षेत्र के चोरमरवा गांव के समीप बच्चों को स्कूल ले जा रही एक निजी स्कूल की बस पलट गई जिसमें तीन बच्चे घायल हुए थे। इसी प्रकार नवंबर में चहनियां के भूपौली में भी निजी स्कूल की बस पलटने से दो बच्चे घायल हो गए थे। बीते 18 जनवरी को सैयदराजा के वन विभाग के समीप निजी स्कूल की मैजिक पलटने से एक शिक्षिका और दो बच्चे घायल हो गए। एक को जिला चिकित्सालय भेज दिया गया था।
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