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नेपाल त्रासदी: मौत के साये में फंसे रहे तीर्थयात्री, बोले- समझ नहीं आ रहा था बचेंगे या नहीं; लोगों की आपबीती

Sun, 30 Aug 2026 01:38 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, चंदाैली।
अमर उजाला नेटवर्क, चंदाैली। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 30 Aug 2026 01:38 AM IST
सार

नेपाल की त्रासदी से सुरक्षित निकलकर 106 तीर्थयात्री भारत पहुंचे। पीडीडीयू जंक्शन पर पहुंचने के बाद यात्रियों ने आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि रास्ते बंद होने और मोबाइल नेटवर्क ठप होने से घंटों मौत के साये में फंसे रहे। संपर्क नहीं हो पाने से परिजन भी चिंतित रहे। यात्रियों ने कहा कि उस दौरान समझ नहीं आ रहा था कि बच पाएंगे या नहीं।

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Pilgrims trapped shadow of death harrowing accounts from those who returned from Nepal
महिला यात्री को ढांढस बंधाती महिला कल्याण संगठन की अध्यक्ष चित्रा सिंह। - फोटो : संवाद

विस्तार

रास्ते बंद, मोबाइल ठप, घंटों मौत के साए में फंसे रहे। समझ में नहीं आ रहा था कि बचेंगे या नहीं। ये बातें नेपाल त्रासदी में बचकर आए तीर्थयात्रियों ने पीडीडीयू जंक्शन पर आपबीती सुनाते हुए कहीं। शनिवार को नेपाल में आई त्रासदी से बचकर महाराष्ट्र के 106 तीर्थयात्रियों का जत्था पटना पुणे एक्सप्रेस ट्रेन से नागपुर के लिए रवाना हुआ। 

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पीडीडीयू जंक्शन पर पहुंचे तीर्थयात्रियों के चेहरे पर अभी भी नेपाल त्रासदी की भयावहता का खौफ दिख रहा था। पुणे से तीर्थयात्रियों का जत्था पशुपतिनाथ में आयोजित शिव महापुराण कथा काे सुनने गए थे। बुधवार की सुबह रसुवा की भोटेकोशी / त्रिशूली नदी में आई भीषण बाढ़ के कारण नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन सहित कई जिले प्रभावित हुए। 
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दशरथ यादव ने कहा कि रास्ता बंद होने के कारण उन्हें कई बार अपना रास्ता बदलना पड़ा और वापस लौटना पड़ा। काफी मशक्कत के बाद वे रक्सौल बॉर्डर तक पहुंच सके। उन्होंने कहा कि नेपाल में हालात बेहद भयावह थे। लंबे समय तक यह समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या होगा और सुरक्षित बाहर निकल पाएंगे या नहीं। 

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इसी तरह श्रीधर त्रिपाठी ने कहा कि करीब 114 लोग नेपाल से बिहार के रास्ते नागपुर जा रहे थे। कुछ यात्री हवाई और सड़क मार्ग से निकल गए, जबकि 104 से अधिक यात्रियों को ट्रेन के जरिए वापस लाया गया। यात्री विमला राजीव प्रसाद दुबे बातचीत करते हुए रो पड़ी।

बताया कि नेपाल में पशुपतिनाथ दर्शन के दौरान उन्होंने ऐसे दृश्य देखे, जिन्हें वह जिंदगीभर नहीं भूल पाएंगी। कहा कि भयावह दृष्य देख कर उसे विश्वास ही नहीं था कि वे अपने बेटे और परिवार के अन्य सदस्यों से कभी मिल पाएगी। मंगला नरहरी खुरसुंडे ने बताया कि आपदा के दौरान रास्ते बंद हो गए थे और मोबाइल फोन भी काम करना बंद कर चुके थे। ऐसे में परिवार के लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा था। कई घंटे तक वे डर और अनिश्चितता के बीच फंसे रहे। रक्सौल बॉर्डर पहुंचने के बाद उन्हें सुरक्षित भारत आने की उम्मीद जगी।

Pilgrims trapped shadow of death harrowing accounts from those who returned from Nepal
महिलाओं का जाना हाल। - फोटो : संवाद

पीडीडीयू जंक्शन पर यात्रियों के स्वास्थ्य की हुई जांच, नाश्ता और खाना उपलब्ध कराया
पीडीडीयू नगर। नेपाल त्रासदी में बचकर आए 106 तीर्थ यात्री शनिवार की सुबह पटना-पुणे एक्सप्रेस ट्रेन से पुणे के लिए रवाना हुए। इसके पूर्व ट्रेन के पीडीडीयू जंक्शन पर पहुंचने पर यात्रियों के स्वास्थ्य की जांच की गई। वहीं महिला कल्याण संगठन की ओर से यात्रियों को चाय, नाश्ता और भोजन की व्यवस्था की गई। ट्रेन में रो राही महिला यात्री की महला कल्याण संगठन की अध्यक्ष ने आंसू पोंछे और सांत्वना दी।

नेपाल में बाढ़ की स्थिति के बीच भारत लौट रहे यात्रियों की सुगम वापसी के लिए रेलवे की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। इसी क्रम में 106 तीर्थयात्रियों का जत्था नेपाल से लौटकर पटना पहुंचा। पटना पुणे एक्सप्रेस ट्रेन में दो अतिरिक्त थर्ड एसी कोच जोड़ कर इन्हें सीट उपलब्ध कराया गया। 

शनिवार की सुबह 10:23 बजे ट्रेन पीडीडीयू जंक्शन के प्लेटफार्म संख्या चार पर पहुंची। यहां पहले से तैनात पं. दीनदयाल उपाध्याय मंडलीय चिकित्सालय और एक निजी अस्पताल से आई चिकित्सकों की टीम ने यात्रियों के स्वास्थ्य का परीक्षण किया। अधिकतर यात्री घबराहट, हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित मिले। इन्हें दवाइयों के साथ ओआरएस का पैकेट वितरित किया। वहीं महिला कल्याण संगठन की ओर से अध्यक्ष चित्रा सिंह, डीआरएम उदय सिंह मीना विभागीय टीम के साथ पहुंचे और यात्रियों का हाल चाल जाना। 

इस दौरान चाय, नाश्ता, फल और भोजन वितरित किया। इस दौरान एडीआरएम सूरज कुमार, वरीय मंडल सुरक्षा आयुक्त दिनेश सिंह तोमर, सीनियर डीएमई नितिन कुमार, सीएमएस डॉ. केशब चंप्रमनारी, डीसीएम विश्वनाथ, स्टेशन अक्षीक्षक एसके सिंह, सीएसजी एनके मिश्र, स्वास्थ्य निरीक्ष्क राजेश कुमार, आरपीएफ निरीक्षक अनिता कुमारी आदि रहे।

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