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मजलिस में हुई नौहाख्वानी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंदौली
Updated Fri, 16 Oct 2015 02:13 AM IST
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नगर के वार्ड नंबर 15, गांधीनगर स्थित डा. एसए मुजफ्फर के आवास पर इमाम
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हुसैन की शहादत के महीने में मजलिस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर
नौहाख्वानी व मातमजनी की गई।
मजलिस का कार्यक्रम लगातार 10 दिनों तक चलेगा।
पहली मुहर्रम को मजलिस पढ़ते हुए बनारस के मौलाना बदरूल हसन ने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत दुनियां में सच्चाई की जीत का प्रतीक है।
मुहर्रम के महीने में इमाम हुसैन अपने 72 साथियों के साथ शहीद हुए थे। उनकी याद में मुहर्रम में मातम व नौहाख्वानी किया जाता है। कहा कि इमाम हुसैन अहिंसा के समर्थक थे।
स्वयं गांधीजी ने उनके आदर्शों को श्रेष्ठ बताया। इस अवसर पर सिकंदरपुर से आयी अंजुमन ने नौहाख्वानी व मातमजनी किया। कानपुर से आये दानिश रिजवी ने नौहाख्वानी की।
इस दौरान मायल चंदौलवी, ताबिश, मजाहिर, राशिद व जैगम इमाम मौजूद रहे।
मजलिस का कार्यक्रम लगातार 10 दिनों तक चलेगा।
पहली मुहर्रम को मजलिस पढ़ते हुए बनारस के मौलाना बदरूल हसन ने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत दुनियां में सच्चाई की जीत का प्रतीक है।
मुहर्रम के महीने में इमाम हुसैन अपने 72 साथियों के साथ शहीद हुए थे। उनकी याद में मुहर्रम में मातम व नौहाख्वानी किया जाता है। कहा कि इमाम हुसैन अहिंसा के समर्थक थे।
स्वयं गांधीजी ने उनके आदर्शों को श्रेष्ठ बताया। इस अवसर पर सिकंदरपुर से आयी अंजुमन ने नौहाख्वानी व मातमजनी किया। कानपुर से आये दानिश रिजवी ने नौहाख्वानी की।
इस दौरान मायल चंदौलवी, ताबिश, मजाहिर, राशिद व जैगम इमाम मौजूद रहे।