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ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ा मच्छरों का प्रकोप, लोग परेशान
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कंदवा। ग्रामीण क्षेत्र में मच्छरों की बढ़ती संख्या और डंक ने लोगों की नाक में दम कर दिया है। मच्छरों के प्रकोप से लोगों का जीना दूभर हो गया है। सोते- जागते, उठते-बैठते हर वक्त मच्छरों की भिनभिनाहट और डंक से लोग परेशान हैं। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य जिम्मेदार विभाग लापरवाह बने हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्र में फागिंग कब हुई किसी को याद नहीं है।
मच्छरों को भगाने के लिए जलाए जाने वाले क्वायल व मच्छर अगरबत्ती सहित अन्य उपाय भी कारगर साबित नहीं हो पा रहे हैं। लोग ज्यादा देर क्वायल इसलिए भी नहीं जला पा रहे हैं कि इसका धुआं स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। ग्रामीण क्षेत्र में तो शाम ढलते ही मच्छरों का प्रकोप इस कदर बढ़ जाता है कि लोगों का चैन से बैठना भी मुहाल हो गया है। लोगों को मच्छरों के काटने से होने वाले संक्रमण का भी डर सताने लगा है। अमड़ा निवासी डॉ. समर बहादुर सिंह का कहना है कि फॉगिंग नहीं होने से मच्छर तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। खोर निवासी यशवंत सिंह का कहना है कि शाम के समय मच्छर बहुत बढ़ जाते हैं। जिस वजह से लोग जरूरी कार्य भी नहीं कर पा रहे हैं। पई निवासी रमेश राय का कहना है कि बैठने पर दिन के समय भी मच्छर काट रहे हैं। दवा छिड़काव की बहुत आवश्यकता है। कादिराबाद निवासी आल्हा बिंद का कहना है कि मच्छरों से बहुत परेशानी हो रही है
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मच्छरों को भगाने के लिए जलाए जाने वाले क्वायल व मच्छर अगरबत्ती सहित अन्य उपाय भी कारगर साबित नहीं हो पा रहे हैं। लोग ज्यादा देर क्वायल इसलिए भी नहीं जला पा रहे हैं कि इसका धुआं स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। ग्रामीण क्षेत्र में तो शाम ढलते ही मच्छरों का प्रकोप इस कदर बढ़ जाता है कि लोगों का चैन से बैठना भी मुहाल हो गया है। लोगों को मच्छरों के काटने से होने वाले संक्रमण का भी डर सताने लगा है। अमड़ा निवासी डॉ. समर बहादुर सिंह का कहना है कि फॉगिंग नहीं होने से मच्छर तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। खोर निवासी यशवंत सिंह का कहना है कि शाम के समय मच्छर बहुत बढ़ जाते हैं। जिस वजह से लोग जरूरी कार्य भी नहीं कर पा रहे हैं। पई निवासी रमेश राय का कहना है कि बैठने पर दिन के समय भी मच्छर काट रहे हैं। दवा छिड़काव की बहुत आवश्यकता है। कादिराबाद निवासी आल्हा बिंद का कहना है कि मच्छरों से बहुत परेशानी हो रही है
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