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माइनर का तटबंध टूटा, खेत जलमग्न
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शहाबगंज। क्षेत्र के मुरकौल गांव के पास शनिवार की सुबह माइनर का तटबंध टूटने से सौ बीघा से अधिक गेहूं की फसल डूब गई। कड़ी मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने पानी रोका। विभागीय लापरवाही को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों के अनुसार सिंचाई के लिए बने नाले और कुलाबो को बंद करने से तटबंध टूटा है।
लेफ्ट कर्मनाशा नहर से अताय गांव के पास निकली तियरा महारथपुर माईनर से सैकड़ों एकड़ खेत की सिंचाई होती हैं। उसी माईनर के पास से पीडब्लूडी की ओर से सड़क का निर्माण कराया जा रहा हैं। निर्माण के दौरान सिंचाई के लिए लगाए गए नाली और कुलाओं को बंद कर दिया गया है। ग्रामीणों ने बंद नालियों को साफ कराने के लिए विभागीय लोगों से शिकायत की लेकिन नाली को नहीं खोला गया। शनिवार को माइनर में पानी आने के साथ ही टतबंध टूट गया। इससे सैकड़ों बीघा खेत जलमग्न हो गया। ग्रामीणों ने शिकायत उपजिलाधिकारी सीपू गिरी से किया। उन्होंने सिंचाई विभाग के कर्मचारियों को मौके पर भेजा। गांव के शिवकुमार, चन्द्र प्रकाश मौर्य, योगेन्द्र सिंह, राम अवध, राम दुलार, संत, बसंत, दशरथ यादव, राम प्यारे के खेतों में पानी भर गया है और गेहूं की फसल डूब गई। मौका मुआयना के बाद सिंचाई विभाग के कर्मियों ने पानी को रोका। किसानों का कहना है कि अभी बरसात की वजह से धान की मड़ाई प्रभावित हुई थी। अब किसी तरह गेहूं की बुआई की गई और अब जल भराव से फसल प्रभावित होगी।
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लेफ्ट कर्मनाशा नहर से अताय गांव के पास निकली तियरा महारथपुर माईनर से सैकड़ों एकड़ खेत की सिंचाई होती हैं। उसी माईनर के पास से पीडब्लूडी की ओर से सड़क का निर्माण कराया जा रहा हैं। निर्माण के दौरान सिंचाई के लिए लगाए गए नाली और कुलाओं को बंद कर दिया गया है। ग्रामीणों ने बंद नालियों को साफ कराने के लिए विभागीय लोगों से शिकायत की लेकिन नाली को नहीं खोला गया। शनिवार को माइनर में पानी आने के साथ ही टतबंध टूट गया। इससे सैकड़ों बीघा खेत जलमग्न हो गया। ग्रामीणों ने शिकायत उपजिलाधिकारी सीपू गिरी से किया। उन्होंने सिंचाई विभाग के कर्मचारियों को मौके पर भेजा। गांव के शिवकुमार, चन्द्र प्रकाश मौर्य, योगेन्द्र सिंह, राम अवध, राम दुलार, संत, बसंत, दशरथ यादव, राम प्यारे के खेतों में पानी भर गया है और गेहूं की फसल डूब गई। मौका मुआयना के बाद सिंचाई विभाग के कर्मियों ने पानी को रोका। किसानों का कहना है कि अभी बरसात की वजह से धान की मड़ाई प्रभावित हुई थी। अब किसी तरह गेहूं की बुआई की गई और अब जल भराव से फसल प्रभावित होगी।
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