{"_id":"631a307cc4acc97f57060140","slug":"medicinal-plants-missing-department-was-forgotten-tree-guards-are-also-throwing-dust-chandauli-news-vns6732314168","type":"story","status":"publish","title_hn":"औषधीय पौधे गायब, विभाग गया भूल, ट्री गार्ड भी फांक रहे धूल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
औषधीय पौधे गायब, विभाग गया भूल, ट्री गार्ड भी फांक रहे धूल
विज्ञापन
पीडीडीयू नगर-पड़ाव मार्ग पर चंदासी के समीप सूखे हर्बल पौधे। संवाद
- फोटो : CHANDAULI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीडीडीयू नगर। हर्बल मार्ग योजना का आरंभ तो जोरशोर से हुआ बाद में यह ठंडे बस्ते में चली गई। एक ओर जहां सड़क के चयनित स्थान तक पौधे नहीं लगाए गए वहीं लगे हुए पौधे भी सूख गए। पौधों की सुरक्षा के लिए लगाए गए ट्री गार्ड गिर गए या फिर चोर उन्हेें उखाड़ ले गए। जिस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
पड़ाव से पचफेड़वा के बीच जीटी रोड के करीब 14 किलोमीटर हिस्से को वर्ष 2020 में हर्बल मार्ग के रूप में चयनित किया गया था। सड़क के इस हिस्से के दोनों किनारों पर औषधीय पौधे लगाए जाने थे। इसके लिए पीडब्ल्यूडी विभाग को शासन की ओर से चार लाख 20 हजार रुपये भी दिए गए थे। धन प्राप्त होने के बाद विभाग ने सड़क के करीब तीन किलोमीटर तक कुछ पौधे लगाए लेकिन देखभाल के अभाव में पौधे नष्ट हो गए । आलम यह है कि पौधों की सुरक्षा के लिए लगे ट्री गार्ड भी गिर गए। बहुत से ट्री गार्ड तो चोरी हो गए।
योजना के तहत विभाग को करीब 200 पौधे लगाकर उन्हें ट्री गार्ड से सुरक्षित भी करना था लेकिन केवल 50 पौधे ही डांडी से दामोदरदास पोखरे तक लगाए गए। सरकार की मंशा थी कि सड़कों के किनारे औषधीय पौधों को लगाने से प्रदूषण कम होगा , वहीं लोगों को नीम, अमलतास, अर्जुन, अशोक, कचनार, गुंदा, जामुन आदि के पेड़ों से फायदा भी मिलेगा।
विज्ञापन
जहां पौधे लगाए गए थे वहां झाड़ झंखाड़ उग गए हैं। अब स्थिति यह है कि लोग हर्बल मार्ग को भी भूल गये हैं। दुर्भाग्य की बात है कि योजनाएं चालू की जाती हैं किंतु बाद में ये योजनाएं ठंढे बस्ते में चली जाती हैं और कोई जिम्मेदारी तय नहीं होती है।
हर्बल रोड के रूप में चयनित जीटी रोड के डांडी से दामोदरदास पोखरे तक के हिस्से पर करीब 50 औषधीय पौधे लगाए गए थे। इन पौधों में अधिकांश को पशुओं ने नष्ट कर दिया है। शीघ्र ही नए ट्री गार्ड लगाकर नए सिरे से पौधे लगवा दिए जाएंगे।
- डीपी सिंह, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग।
विज्ञापन
पड़ाव से पचफेड़वा के बीच जीटी रोड के करीब 14 किलोमीटर हिस्से को वर्ष 2020 में हर्बल मार्ग के रूप में चयनित किया गया था। सड़क के इस हिस्से के दोनों किनारों पर औषधीय पौधे लगाए जाने थे। इसके लिए पीडब्ल्यूडी विभाग को शासन की ओर से चार लाख 20 हजार रुपये भी दिए गए थे। धन प्राप्त होने के बाद विभाग ने सड़क के करीब तीन किलोमीटर तक कुछ पौधे लगाए लेकिन देखभाल के अभाव में पौधे नष्ट हो गए । आलम यह है कि पौधों की सुरक्षा के लिए लगे ट्री गार्ड भी गिर गए। बहुत से ट्री गार्ड तो चोरी हो गए।
विज्ञापन
योजना के तहत विभाग को करीब 200 पौधे लगाकर उन्हें ट्री गार्ड से सुरक्षित भी करना था लेकिन केवल 50 पौधे ही डांडी से दामोदरदास पोखरे तक लगाए गए। सरकार की मंशा थी कि सड़कों के किनारे औषधीय पौधों को लगाने से प्रदूषण कम होगा , वहीं लोगों को नीम, अमलतास, अर्जुन, अशोक, कचनार, गुंदा, जामुन आदि के पेड़ों से फायदा भी मिलेगा।
विज्ञापन
जहां पौधे लगाए गए थे वहां झाड़ झंखाड़ उग गए हैं। अब स्थिति यह है कि लोग हर्बल मार्ग को भी भूल गये हैं। दुर्भाग्य की बात है कि योजनाएं चालू की जाती हैं किंतु बाद में ये योजनाएं ठंढे बस्ते में चली जाती हैं और कोई जिम्मेदारी तय नहीं होती है।
हर्बल रोड के रूप में चयनित जीटी रोड के डांडी से दामोदरदास पोखरे तक के हिस्से पर करीब 50 औषधीय पौधे लगाए गए थे। इन पौधों में अधिकांश को पशुओं ने नष्ट कर दिया है। शीघ्र ही नए ट्री गार्ड लगाकर नए सिरे से पौधे लगवा दिए जाएंगे।
- डीपी सिंह, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग।