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लॉकडाउन से दुग्ध व्यवसाइयों पर छाए संकट के बादल

Thu, 30 Apr 2020 09:27 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 30 Apr 2020 09:27 PM IST
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Lockdown brings crisis to milk businessmen
कंदवा। सामाजिक संस्था अंकुर वेलफेयर सोसायटी की पहल पर बृहस्पतिवार को लॉकडाउन में दुग्ध व्यवसाय और उसमें आ रही कठिनाइयां विषय पर टेली कांफ्रेंसिंग कॉल के जरिए परिचर्चा का आयोजन किया गया। इसमें पशुपालकों, किसानों और समाजसेवियों ने भाग लिया।
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जलालपुर गांव निवासी संजय सिंह ने कहा कि लॉकडाउन के चलते पशुपालकों के सामने दूध खपाने का संकट खड़ा हो गया है। होटलों, ढाबों और मिठाई की दुकानों को खुलने की छूट देकर ही उनकी परेशानियों को दूर किया जा सकता है। असना गांव निवासी कादिर अंसारी ने कहा कि लॉकडाउन की वजह से दुग्ध व्यवसाय पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। पशुपालक कहीं दूध बेचने नहीं जा पा रहे हैं जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर प्रभाव पड़ रहा है। अदसड़ गांव निवासी दुग्ध व्यवसायी जितेंद्र यादव का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से मिठाई व चाय की दुकानें और होटल-ढाबे बंद हैं। इससे दूध की खपत नहीं हो पा रही है। तलाशपुर गांव निवासी देवेंद्र यादव ने कहा कि शीघ्र ही दुग्ध व्यवसाय से जुड़े किसानों के प्रति ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो उन्हें काफी आर्थिक क्षति उठानी पड़ेगी। पई गांव निवासी रमेश राय ने कहा कि दुग्ध व्यवसाय से जुड़े कई किसान पूर्ण रूप से इसी धंधे पर निर्भर थे। लॉकडाउन के चलते उनका धंधा पूरी तरह से ठप हो गया है। तेल्हरा गांव निवासी विजय शंकर सिंह ने कहा कि लॉकडाउन से पहले पशुपालक अपने पशुओं का दूध वाराणसी, पीडीडीयू नगर और चंदौली में मिठाई की दुकानों पर भेजते थे लेकिन लॉकडाउन की वजह से दुकानों को बंद कर दिया गया है जिससे दूध का व्यवसाय चरमरा गया है। सरकार को इस ओर अवश्य ध्यान देना चाहिए।
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