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जिम्मेदार ही तोड़ रहे प्रोटोकाल, लापरवाही का जंजाल बना अस्पताल

Sat, 08 Jan 2022 12:30 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 08 Jan 2022 12:30 AM IST
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jimmedaar hee tod rahe protokaal, laaparavaahee ka janjaal bana aspataal
पीडीडीयू राजकीय महिला चिकित्सालय में बिना मास्क के जांच करते चिकित्सक। संवाद - फोटो : CHANDAULI
पीडीडीयू नगर। देश के साथ-साथ जिले में कोरोना संक्रमण बढ़ने लगा है। शासन और प्रशासन की तरफ अलर्ट जारी कर लोगों को कोरोना नियमावली का अनुपालन अनिवार्य किया गया है। इसके बाद भी लापरवाही जारी है, आश्चर्य तो जब हुआ जब जिम्मेदार खुद ही प्रोटोकाल तोड़ते नजर आ रहे हैं। नगर स्थित राजकीय महिला चिकित्सालय के ज्यादातर डॉक्टर और कर्मचारी बिना मास्क के काम कर रहे हैं। डाक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की यह लापरवाही कही सभी के लिए जी का जंजाल न बन जाए, और अस्पताल ही कोरोना का घर। देश में कोरोना के आंकड़े लाख को छू चुके हैं। 15 दिनों के अंदर जिले में संक्रमित मरीजों के मिलने से एक्टिव मरीजों की संख्या 49 पहुंच चुकी है। इसके बाद भी लापरवाही जारी है। आम लोगों की बात तो छोड़िए जिनके कंधे पर कोविड के इलाज और उसके बचाव का जिम्मा है वे डॉक्टर खुद लापरवाही बरत रहे हैं। इससे संक्रमण का खतरा और बढ़ सकता है। अमर उजाला की टीम ने बृहस्पतिवार को नगर स्थित राजकीय महिला चिकित्सालय का पड़ताल की। इसमें कोविड जांच सेंटर भी संचालित है, इसके अलावा टीकाकरण भी होता है। लिहाजा यहां प्रतिदिन एक से दो हजार की भीड़ उमड़ती है। लेकिन लापरवाही का आलम यह है कि यहां के ज्यादातर डॉक्टर बिना मास्क के मरीजों का इलाज करते दिखे। पड़ताल में मिला कि कोविड जांच के लिए जहां रजिस्ट्रेशन होता है, वहां तैनात कर्मचारी भी मास्क का प्रयोग नहीं कर रहा था। ऊपर से मुंह में गुटखा भरे था। बार-बार टेबल के पास रखे कूड़ेदान में थूक भी रहा था। जबकि इससे संक्रमण का खतरा और बढ़ता है। सेंटर पर महिलाओं की भीड़ थी सभी महिलाओं ने मास्क लगाया था पर डॉक्टर को इसकी फिक्र ही नहीं थी। इससे भी बदतर हालत टीबी विभाग कक्ष की थी। अंदर से बाहर तक ठूस कर मरीज भरे थे। कहीं कोई सोशल डिस्टेंसिंग और दूरी का पालन नहीं हो रहा था। वहीं सबको देखने वाले डॉक्टर ने मास्क को लगाया था पर वह नाक में नहीं बल्कि गले में लटक रहा था। रोजाना कोविड जांच और टीकाकरण के ही ज्यादातर मरीजों के आने के बाद भी अस्पताल के गेट पर या अंदर कहीं भी सैनेटाइजर की व्यवस्था नहीं की गई थी। लोग अस्पताल में इलाज कराने जाते हैं अगर ऐसे लापरवाही रही तो लोग अस्पताल से ठीक होने के बजाय बीमारी लेकर घर लौटेंगे।
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