Ram Mandir Bhumi Pujan कराने वाले मुख्य आचार्य जयप्रकाश त्रिपाठी का चंदौली से नाता, वेदों पर किया है शोध
अयोध्या में राम जन्म भूमि पर मंदिर निर्माण के लिए शिलान्यास भूमि पूजन में चंदौली जिले के पीडीडीयू नगर से सटे सहजौर निवासी पंडित जयप्रकाश त्रिपाठी मुख्य आचार्य रहे। श्रीराम मंदिर निर्माण के शिलान्यास-पूजन में न सिर्फ आचार्य की भूमिका निभाई बल्कि इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बन पुनीत कार्य का हिस्सा बन गए। इस पावन कार्य में पंडित जयप्रकाश के शामिल होने से गांव सहित जिले के लोग खुुुुशी से फूले नहीं समा रहे हैं।
सहजौर निवासी तीन भाइयों में सबसे छोटे जयप्रकाश वर्षों से कर्मकांड कराते आ रहे हैं। शुरूआती शिक्षा के बाद वे वाराणसी में कर्मकांड की शिक्षा लेने चले गए। जयप्रकाश ने यजुर्वेद, सामवेद और ऋग्वेद पर शोध किए। इसके लिए राज्यपाल के हाथों एवार्ड भी मिल चुका है। वर्ष 1996 में घातक फिल्म की शूटिंग का शुभ मर्हूत पूजन कराया था।
एक अगस्त को विद्वान जयप्रकाश अयोध्या के लिए रवाना हुए। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शिलान्यास कराया। बड़े भाई सेवानिवृत्त शिक्षक और मझले भाई चिकित्सक अवधेश त्रिपाठी ने पूरे परिवार के साथ पूरे कार्यक्रम को लाइव देखा।
भारत के परम वैभव प्राप्ति के संकल्प के साथ प्रधानमंत्री ने किया पूजन
काशी विद्वत परिषद के मार्गदर्शन में श्रीराम मंदिर के लिए भूमि पूजन संपन्न हुआ। प्रधानमंत्री ने विश्व में शांति और भारत के परम वैभव की प्राप्ति के संकल्प के साथ भूमिपूजन किया। काशी विद्वत परिषद के मंत्री डॉ. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि बुधवार सुबह 9.30 बजे पूजन आरंभ हुआ।
गौरी गणेश के पूजन के बाद कलश पूजन और पंचांग पूजन संपन्न हुआ। इसके बाद शिला पूजन हुआ और पांच शिलाएं नंदा, भद्रा, जया, रिक्ता और पूर्णा को रखा गया। काशी से गया चांदी का कछुआ और उसके ऊपर शेषनाग को विराजमान कराया गया है। फिर पंचरत्न डाले गए। वास्तु पुरुष, सर्वोषधि और देश के विभिन्न स्थानों से आई वस्तुओं व रत्नों को डाला गया।
भगवान राम के भूमिपूजन को तीन चरणों में बांटा गया था। तीन अगस्त को पहले दिन भगवान गणेश की पूजा, गणेश अथर्व शीर्ष के पाठ के बाद 1108 लड्डू भगवान गणेश को अर्पित किए गए। दूसरे दिन अयोध्या की परंपरा के अनुसार, महानिशान पूजा संपन्न हुई।
इसमें हनुमानगढ़ी पर हनुमान जी से प्रार्थना की गई कि भगवान राम के काम निर्विघ्न संपन्न हों। इसके बाद रामलला के विग्रह पर वैष्णो संप्रदाय की सबसे बड़ी पूजा संपन्न हुई। काशी विद्वत परिषद की ओर से प्रो. रामचंद्र पांडेय और प्रो. विनय पांडेय समेत दो कर्मकांडी ब्राह्मण भी शामिल हुए।