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प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए सही पोषण देना जरूरी : डॉ. राजेश
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कंदवा। बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए शुरू के एक हजार दिन यानि गर्भकाल के 270 दिन और बच्चे के जन्म के दो साल (730 दिन) तक का समय बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान पोषण का खास ख्याल रखना बहुत ही जरूरी होता है क्योंकि इस दौरान स्वास्थ्य को हुआ नुकसान पूरे जीवन चक्र को प्रभावित कर सकता है। ये बातें पीएचसी बरहनी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश सिंह ने बताईं।
कहा कि मां यदि बच्चे को सही पोषण दे तो बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और बच्चा स्वस्थ जीवन जी सकेगा। जब बच्चा 6 माह अर्थात 180 दिन का हो जाता है तब स्तनपान शिशु की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होता है। इस समय बच्चा तीव्रता से बढ़ता है और उसे अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार नवजात शिशु को स्तनपान के साथ 6 माह की आयु पूरी होने के बाद पूरक आहार देना शुरू कर देना चाहिए। पूरक आहार 6 माह के बाद ही शुरू करना चाहिए। बच्चों को देर से पूरक आहार देने से उनका विकास धीमा हो जाता है या रुक जाता है। साथ ही बच्चे में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी होने की संभावना बढ़ जाती है और वे कुपोषित हो सकते हैं। बताया कि स्तनपान के साथ 6 माह के बाद के आयु के बच्चों को 250 मिली आधा कटोरी अर्द्धठोस आहार दिन में दो बार शुरू में कम मात्रा में फिर बढ़ते क्रम में देना चाहिए। वहीं 9 से 11 माह के बच्चे को स्तनपान के साथ 250 मिली की आधी कटोरी दिन में तीन बार पहले कम फिर बढ़ते क्रम में देनी चाहिए। 11 से 23 माह के बच्चे को भी स्तनपान के साथ 250 मिलीलीटर की पूरी कटोरी दिन में तीन बार देनी चाहिए। बच्चे को तरल आहार न देकर अर्द्धठोस पदार्थ देने चाहिए। भोजन में चतुरंगी आहार (लाल, सफेद, हरा व पीला) जैसे गाढ़ी दाल, अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल और दूध व दूध से बने उत्पाद खिलाने चाहिए। इनमें भोजन में पाए जाने वाले कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, विटामिन, खनिज पदार्थ, रेशे और पानी जैसे आवश्यक तत्व जरूर होने चाहिए।
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कहा कि मां यदि बच्चे को सही पोषण दे तो बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और बच्चा स्वस्थ जीवन जी सकेगा। जब बच्चा 6 माह अर्थात 180 दिन का हो जाता है तब स्तनपान शिशु की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होता है। इस समय बच्चा तीव्रता से बढ़ता है और उसे अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार नवजात शिशु को स्तनपान के साथ 6 माह की आयु पूरी होने के बाद पूरक आहार देना शुरू कर देना चाहिए। पूरक आहार 6 माह के बाद ही शुरू करना चाहिए। बच्चों को देर से पूरक आहार देने से उनका विकास धीमा हो जाता है या रुक जाता है। साथ ही बच्चे में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी होने की संभावना बढ़ जाती है और वे कुपोषित हो सकते हैं। बताया कि स्तनपान के साथ 6 माह के बाद के आयु के बच्चों को 250 मिली आधा कटोरी अर्द्धठोस आहार दिन में दो बार शुरू में कम मात्रा में फिर बढ़ते क्रम में देना चाहिए। वहीं 9 से 11 माह के बच्चे को स्तनपान के साथ 250 मिली की आधी कटोरी दिन में तीन बार पहले कम फिर बढ़ते क्रम में देनी चाहिए। 11 से 23 माह के बच्चे को भी स्तनपान के साथ 250 मिलीलीटर की पूरी कटोरी दिन में तीन बार देनी चाहिए। बच्चे को तरल आहार न देकर अर्द्धठोस पदार्थ देने चाहिए। भोजन में चतुरंगी आहार (लाल, सफेद, हरा व पीला) जैसे गाढ़ी दाल, अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल और दूध व दूध से बने उत्पाद खिलाने चाहिए। इनमें भोजन में पाए जाने वाले कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, विटामिन, खनिज पदार्थ, रेशे और पानी जैसे आवश्यक तत्व जरूर होने चाहिए।
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